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बुधवार, 16 मार्च 2022

मुख्यमंत्री के ब्यान की माकपा ने की निंदा, कर्मचारियों को प्रताड़ित करने का भी किया विरोध

 मुख्यमंत्री के ब्यान की माकपा ने की निंदा, कर्मचारियों को प्रताड़ित करने का भी किया विरोध



मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी धर्मपुर क्षेत्रीय कमेटी ने पिछले कल विधानसभा में दिये उस ब्यान की कड़े शब्दों में निंदा की है जिसमें उन्होंने कर्मचारियों को पेंशन लेने के लिए चुनाव लड़ने की चुनौती दी है।इसके अलावा ओल्ड पेन्शन स्कीम की मांग के लिए पिछले दिनों विधानसभा पर हुई रैली के दौरान सिरमौरी भाषा में "जोईया मामा सुनंदा नी, कर्मचारियों की मन्दा नी" के नारे लगाने वाले कर्मचारियों और सँयुक्त कर्मचारी संघ के अध्यक्ष की ट्रांसफर करने की भी आलोचना की है।पार्टी के सचिव व पूर्व ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह द्वारा जारी प्रेस बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री का यह ब्यान की अगर कर्मचारियों ने पेंशन लेनी है तो वे नॉकरी छोड़ कर चुनाव लड़े बहुत ही गैर जिम्मेदारराना औऱ घटिया स्तर का है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति या कर्मचारी चुनाव नहीं लड़ सकता है कियूंकि एक विधानसभा क्षेत्र से तो एक ही उम्मीदवार चुना जाता है जिसे वर्तमान में सरकार  93 हज़ार रुपये वार्षिक पेंशन दे रही है जबकि हज़ारों कर्मचारियों की पेंशन सरकार ने बन्द कर दी है।जिसके लिए कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है और अब इस प्रकार की अनाप शनाप बयान बाजी कर रहे हैं जो पूरी तरह से कर्मचारी विरोधी है।उन्होंने पिछले सप्ताह भी इसी प्रकार की बयानबाजी की थी जिसमें उन्होंने धमकी भरे लहज़े में कर्मचारियों को कहा था कि वे राजनीति और आंदोलन न करें और शांति से और उनके जय जयकार के नारे लगाएं तभी उनकी मांग सुनी जायेगी अन्यथा नहीं।इसी प्रकार सरकार ने जोईया मामा का नारा लगाने वाले कर्मचारिओं की ट्रांसफर करके उनको प्रताड़ित करने का काम किया है और कर्मचारियों को दबाने की कोशिश की जा रही है जिसे प्रदेश की जनता होने नहीं देगी और सरकार के इस दमनकारी फ़ैसले का विरोध करेगी।इससे साफ़ हो गया है कि वर्तमान सरकार व मुख्यमंत्री कर्मचारिओं के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को बहाल नहीं करेगी।इसलिए माकपा सभी कर्मचारियों से आह्वान करती है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में इन्हें सबक सिखाने के लिए एकजुट होकर काम करें।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी कर्मचारियों के साथ खड़ी है और उनकी पेशन की मांग का पुरज़ोर समर्थन करती है और आवश्यकता पड़ी तो कर्मचारिओं के आंदोलन में भी शामिल होगी।

वाइट भुपेंद्र सिंह




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