*वेनेजुएला पर हुए अमेरिकी हमले पर एस एफ आई हिमाचल प्रदेश राज्य समिति का वक्तव्य*
*वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को देर रात उनके घर से अमेरिकी कमांडो द्वारा गिरफ्तार करने और वेनेजुएला पर ट्रंप सरकार द्वारा हमले और कब्जे के विरुद्ध पूरी दुनिया में हो रहे विरोध के साथ एस एफ आई हिमाचल प्रदेश राज्य समिति एकजुटता जाहिर करता है।*
एस एफ आई हिमाचल प्रदेश राज्य समिति ने वेनेजुएला की सम्प्रभुता पर किए इस हमले की कड़ी निंदा की है। * एस एफ आई हिमाचल प्रदेश राज्य समिति ने लिए प्रस्ताव में कहा कि किसी स्वतंत्र देश पर हमला, उसकी चुनी हुई सरकार को हटाना और उसके प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने की कोशिश अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र संघ चार्टर और लोकतांत्रिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है।* वेनेजुएला पर हमले के मामले पर यह तथ्य है कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका के संवैधानिक प्रावधानों का भी खुला उल्लंघन किया है। हमले के संदर्भ में अमेरिकी कांग्रेस से मंजूरी लेना तो दूर की बात है ट्रंप ने कांग्रेस को सूचना तक नहीं दी। दुनिया में पेट्रोडॉलर का वर्चस्व बनाए रखने के लिए ट्रंप प्रशासन ने यह हताशापूर्ण गैर पारंपरिक कार्रवाई की है। लेकिन इस तरह की गई कार्रवाईयों से पेट्रोडॉलर के वर्चस्व को बनाए रखना अब अमेरिका के लिए संभव नही है। उलटे दुनियाभर में इस तरह की कार्रवाई अशांति और अस्थिरता ही पैदा करेगी।
एस एफ आई हिमाचल प्रदेश राज्य समिति ने प्रस्ताव में कहा कि वेनेजुएला का अपराध महज इतना था कि उसने अपने प्राकृतिक संसाधनों पर अपने लोगों का अधिकार स्थापित करने की कोशिश की और तेल क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों से मुक्त करने की कोशिश की थी। वेनेजुएला ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर के एकाधिकार को चुनौती दी।* अमेरिका का यह कहना कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो ड्रग्स व्यापार में लिप्त थे और विरोधियों की लोकतांत्रिक गतिविधियों पर हमला कर रहे थे, इसलिए उसने वेनेजुएला पर हमला किया, पूरी तौर पर पाखंड है।
*अमेरिका दुनिया भर में तानाशाही की सरकारों का समर्थन करता है और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष ढंग से ग्लोबल साउथ के देशों के संसाधनों पर कब्जा करता आ रहा है।*
एआईपीएफ एनडीए की केंद्र सरकार से यह मांग करता है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा वेनेजुएला पर कब्जा करने के खिलाफ वह अपना विरोध दर्ज कराए। क्योंकि यह हमला ग्लोबल साउथ के सभी देशों के आत्मनिर्णय के अधिकार पर हमला है। इसी तरह के हमले पहले भी अमेरिका इराक, लीबिया आदि देशों में बहाने बनाकर करता रहा है।
*पुलिस प्रशासन की एक तरफ कार्यवाही के विरुद्ध हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में विद्यार्थी परिषद ने खोला मोर्चा :–नैंसी अटल*
*एबीवीपी के विरुद्ध शिमला पुलिस कर रही एकतरफा कार्यवाही : नैंसी अटल।*
*शिमला पुलिस बिना किसी दबाव के करे जांच, एस.एफ.आई के गुंडों पर भी हो जल्द कार्यवाही : अभाविप।*
*सोमवार 17 मार्च 2025* बीते कुछ दिनों से एच.पी.यू शिमला में छात्र संगठनों के बीच लगातार तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा प्रदेश भर में शिमला पुलिस द्वारा अभाविप के कार्यकर्ताओं पर की जा रही एकतरफा कार्यवाही के विरुद्ध विभिन्न स्थानों पर धरने प्रदर्शन किए गए। *आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में VC office के बाहर धरना प्रदर्शन किया गया ।प्रदेश भर में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के बीच शिमला पुलिस की एकतरफा कार्यवाही के रुख को लेकर लगातार रोष बना हुआ है।*
नैंसी अटल (प्रदेश मंत्री) ने मीडिया में जानकारी साझा करते हुए बताया कि शिमला पुलिस केवल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर ही कार्यवाही कर रही है और एस.एफ.आई के गुंडे विश्वविद्यालय में खुलेआम घूम रहें हैं। नैंसी ने बताया कि पिछले एक माह से एस.एफ.आई के गुंडों द्वारा अभाविप की छात्रा कार्यकर्ताओं पर लगातार अभद्र टिप्पणियां की जा रहीं थी। नैंसी अटल ने बताया कि "एस.एफ.आई एक देश विरोधी छात्र संगठन है और एस.एफ.आई के गुंडों के पास शरेआम विश्वविद्यालय में दूसरे छात्र संगठनों की छात्रा कार्यकर्ताओं पर गलत तंज कसने के अलावा और कोई कार्य नहीं बचा है।" उन्होंने बताया कि इन्हीं कारणों से छात्र संगठनों के बीच तनाव की स्थित उत्पन्न हुई और एस.एफ.आई के गुंडों ने इसे हिंसक रुख दिया।
एस.एफ.आई के गुंडे द्वारा आज भी खुले मंच से विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को धमकी दी जाती है कहां जाता है कि विद्यार्थी परिषद के प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश मंत्री की टांगे काट देंगे। छात्राओं को मैसेज कर के कॉल करके धमकियां दे रहे है कि तुम बाहर निकले घर से तुम्हे हम बताएंगे ऐसी धमकियां उनके द्वारा विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को दी जा रही है। पूरे प्रदेशभर में लॉ एंड ऑडर की स्थिति गिरती जा रही है जिला शिमला इसका आदर्श बना हुआ है।
नैंसी अटल ने बताया कि अगर शिमला पुलिस इसी प्रकार केवल अभाविप के कार्यकर्ताओं पर एकतरफा कार्यवाही करती रहेगी तो पूरे प्रदेश भर में विद्यार्थी परिषद शिमला पुलिस के खिलाफ धरने प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशाशन को बिना किसी सरकारी तंत्र के दबाव में आकर अपनी कार्यवाही करनी चाहिए। नैंसी ने संदेह जताया कि शिमला पुलिस सरकारी तंत्र के दबाव में आकर एकतरफा कार्यवाही कर रही है। नैंसी ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार का सदैव से ही एस.एफ.आई के लिए नर्म रुख रहा है और अगर पुलिस प्रशाशन इस मामले में दोहरी कार्यवाही नहीं करेगी तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रदेश भर में शिमला पुलिस के विरुद्ध बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेगी।
एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी द्वारा प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार व चिट्टे के प्रकोप के खिलाफ़ "नुक्कड़ नाटक" दिखाकर लोगो को जागरूक
आज एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी द्वारा प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार व चिट्टे के प्रकोप के खिलाफ़ संजौली चौक पर "नुक्कड़ नाटक" दिखाकर लोगो को जागरूक किया । प्रदेश में नशा लागतार बढ़ते जा रहा और प्रदेश युवा इस दल दल में धंसते जा रहा है
संजौली चौक पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिखाया कि कैसे नशों ने कई लोगों के घर व जिंदगी को तबाह कर दिया है। नशा करने वाले पहले सस्ते नशे से अपनी शुरुआत करते हैं। उसके बाद वे मंहगे नशे करने लगते हैं। महंगा नशा करने के लिए उनके पास पैसे नहीं होते तो वे चोरी का रास्ता अपना लेते हैं। नशा खुद एक बीमारी है इसे भी दवा की जरूरत है। SFI राज्य कमिटी द्वारा चलाए गए "युवा बचाओ" अभियान के तहत पूरे हिमाचल प्रदेश में गांव ,शहर स्कूल कॉलेजों में नशे के खिलाफ़ जागरूकता अभियान चलाएगी नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जनता को जागरूक करेगी।
SFI राज्य कमिटी सरकार से मांग करती है कि सबसे पहले तो हिमाचल प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार नशा माफियों पर रोक लगानी होगी । नशा तस्करों को कानून का कोई डर नहीं है । प्रदेश में कुछ नशा तस्कर बैखौफ होकर नशा बेचते हैं। इन लोगों को किसी न किसी का संरक्षण प्राप्त होता है। जिसके दम पर ये बेधड़क होकर काम करते हैं। पर फिर भी वे इनके खिलाफ बनती कानूनी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।सरकार नशे के कारोबार पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगाए।
*एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला में ABVP के गुंडों द्वारा किए गए जानलेवा हमले और ABVP , आरएसएस की बढ़ती गुंडागर्दी के खिलाफ प्रेस वार्ता का आयोजन किया।*
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में बीते 11 मार्च 2025 को ABVP, भाजपा व आरएसएस के 40 से 50 गुंडों ने SFI के कैंपस अध्यक्ष सहित 5 छात्रो पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में 6 छात्रों को गंभीर चोटे आई है व एक छात्र अभी भी IGMC में उपचाराधीन है।
यह हमला सुनियोजित तरीके से विश्वविद्यालय परिसर के अंदर पुलिस की मौजूदगी में तेजधार हथियारों (दराट, खुखरी) से किया गया।
यह हमला उस समय किया गया है जब हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में शिक्षक,गैर शिक्षक , व छात्र अपनी मूलभूत सुविधाओं की मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शनरत है। वर्तमान समय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति दयनीय है विश्वविद्यालय प्रशासन संसाधन जुटाने की आड़ में विश्वविद्यालय के अंदर छात्रों की बुनियादी ज़रूरत पर भी कटौती कर रहा है विश्वविद्यालय में अस्थाई नियुक्तियां की जा रही है आउटसोर्स भर्तियों के खिलाफ शिक्षक, गैर शिक्षक व छात्र विरोध में है। SFI 2019/20 में हुई अवैध प्रोफ़ेसर भर्तियों पर लगातार जांच करवाने को लेकर आंदोलन में है इन भर्तियों के ज़रिए कैसे भाजपा ,आरएसएस के लोगों को अवैध तरीके से भर्ती किया गया है । कुछ दिनों पहले SFI ने छात्रों को लामबंद करते हुए चक्का जाम किया था जो कि छात्रों को बसों की सुविधा बढ़ाने को लेकर किया गया था। और साथ में छात्रवासों की मरम्मत व छात्रावासों को 24 घंटे खुला रखे जाने की मांग को लेकर SFI द्वारा शुरू किए गए आंदोलन में छात्रों की भागीदारी बढ़ते जा रही है और ABVP द्वारा किए गए जानलेवा हमले से उनकी बौखलाहट का पता चलता है।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब जब छात्र आंदोलन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाता है,तब तब ABVP द्वारा शिक्षण संस्थानों के अंदर शैक्षणिक माहौल को खराब किया जाता है। एबीवीपी की गुंडागर्दी के ऐसे अनेकों उदाहरण है। हाल ही में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय व ऐसे अनेको शिक्षण संस्थानो में इनकी गुंडागर्दी सामने आयी है।
SFI का मानना है कि ABVP एक फासीवादी संगठन है जो RSS /BJP की छत्रछाया में खुलेआम लोकतंत्र-विरोधी कार्य करता है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय,शिमला के ABVP के गुंडों को संरक्षण संघ विचारधारा के प्रोफ़ेसर देते है जो कि शिमला शहर में कई हिंसाओं( संजौली मस्जिद विवाद, रामकृष्ण मिशन आश्रम पथराव)में शामिल रहे है। जो शहर के सांप्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने का कार्य करते आए है।ABVP के लोग द्वारा कई बार कैंपस में आकर दिन दिहाड़े छात्रों पर जानलेवा हमले किए गए और इन्हीं प्रोफ़ेसर और प्रशासन की मिलीभगत से हर बार मामले दबा दिए जाते हैं। विश्विद्यालय में प्रोफेसर खुलेआम ABVP की गतिविधियों में भाग लेते है जो कि विश्विद्यालय ऑर्डिनेंस के कंडक्ट रूल 35.20 की शरेआम अहवेलना है परंतु विश्विद्यालय प्रशासन द्वारा कोई भी कार्यवाही इन पर नहीं की जा रही । इस घटना को अंजाम देने में भी इन्हीं प्रोफ़ेसरों की संलिप्तता है जिन्होंने इस सुनियोजित हमले की योजना बनाई। SFI की मांग है कि इन सभी प्रोफेसरों पर भी ठोस कार्यवाही विश्विद्यालय प्रशासन व प्रदेश सरकार द्वारा की जाए।
SFI राज्य कमेटी ने आरोप लगाया है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार प्रदेश में RSS व उसके संगठनों द्वारा फैलाई जा रही सांप्रदायिकता व शिक्षा के भगवाकरण को रोकने में नाकाम साबित हुई है। देश भर में जहां कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व RSS व उसके फासीवादी विचार से लड़ने की बात करता है वहीं प्रदेश में कांग्रेस सरकार इनके सामने घुटने टेकती हुई नजर आती है जो कांग्रेस के दोगले चरित्र को उजागर करता है।
SFI का मानना है कि शैक्षणिक परिसरों को फासीवादी ताकतों के हाथों में नहीं छोड़ सकते SFI मीडिया के माध्यम से आम जनता व सभी प्रगतिशील संगठनों से आहवान करती है कि सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ व फासीवादी विचार के खिलाफ एकजुटता दिखाएं।
SFI सरकार व पुलिस प्रशासन से मांग करती है कि इस हिंसा में शामिल सभी लोगों पर जिन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 (जो कि किसी व्यक्ति को जान से मारने का प्रयास करने के लिए लगाई जाती है )और भी अन्य कई धाराओं में मुकद्दमा बालूगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है सभी को गिरफ़्तार किया जाए।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग करती है
SFI का आरोप है कि घटनाक्रम को 5 दिन बीत जानें के बाद भी अभी विश्वविद्यालय प्रशासन ने किसी भी तरह की कार्यवाही इन गुंडों के खिलाफ नहीं की है,इसलिए sfi विश्वविद्यालय प्रशासन से भी यह मांग करती है कि इन गुंडों पर कड़ा संज्ञान ले और उचित कार्यवाही करें।
*पुलिस प्रशासन की एक तरफ कार्यवाही के विरुद्ध उपआयुक्त कार्यालय के बाहर विद्यार्थी परिषद के खोला मोर्चा :–नैंसी अटल*
*एबीवीपी के विरुद्ध शिमला पुलिस कर रही एकतरफा कार्यवाही : नैंसी अटल।*
*शिमला पुलिस बिना किसी दबाव के करे जांच, एस.एफ.आई के गुंडों पर भी हो जल्द कार्यवाही : अभाविप।*
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*शनिवार, 15 मार्च 2025* बीते कुछ दिनों से एच.पी.यू शिमला में छात्र संगठनों के बीच लगातार तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा प्रदेश भर में शिमला पुलिस द्वारा अभाविप के कार्यकर्ताओं पर की जा रही एकतरफा कार्यवाही के विरुद्ध विभिन्न स्थानों पर धरने प्रदर्शन किए गए। *आज शिमला उपआयुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया गया ।प्रदेश भर में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के बीच शिमला पुलिस की एकतरफा कार्यवाही के रुख को लेकर लगातार रोष बना हुआ है।*
नैंसी अटल (प्रदेश मंत्री) ने मीडिया में जानकारी साझा करते हुए बताया कि शिमला पुलिस केवल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर ही कार्यवाही कर रही है और एस.एफ.आई के गुंडे विश्वविद्यालय में खुलेआम घूम रहें हैं। नैंसी ने बताया कि पिछले एक माह से एस.एफ.आई के गुंडों द्वारा अभाविप की छात्रा कार्यकर्ताओं पर लगातार अभद्र टिप्पणियां की जा रहीं थी। नैंसी अटल ने बताया कहा कि "एस.एफ.आई एक देश विरोधी छात्र संगठन है और एस.एफ.आई के गुंडों के पास शरेआम विश्वविद्यालय में दूसरे छात्र संगठनों की छात्रा कार्यकर्ताओं पर गलत तंज कसने के अलावा और कोई कार्य नहीं बचा है।" उन्होंने बताया कि इन्हीं कारणों से छात्र संगठनों के बीच तनाव की स्थित उत्पन्न हुई और एस.एफ.आई के गुंडों ने इसे हिंसक रुख दिया।
एस.एफ.आई के गुंडे द्वारा आज भी खुले मंच से विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को धमकी दी जाती है कहां जाता है कि विद्यार्थी परिषद के प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश मंत्री की टांगे काट देंगे। छात्राओं को मैसेज कर के कॉल करके धमकियां दे रहे है कि तुम बाहर निकले घर से तुम्हे हम बताएंगे ऐसी धमकियां उनके द्वारा विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को दी जा रही है। पूरे प्रदेशभर में लॉ एंड ऑडर की स्थिति गिरती जा रही है जिला शिमला इसका आदर्श बना हुआ है।
नैंसी अटल ने बताया कि अगर शिमला पुलिस इसी प्रकार केवल अभाविप के कार्यकर्ताओं पर एकतरफा कार्यवाही करती रहेगी तो पूरे प्रदेश भर में विद्यार्थी परिषद शिमला पुलिस के खिलाफ धरने प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशाशन को बिना किसी सरकारी तंत्र के दबाव में आकर अपनी कार्यवाही करनी चाहिए। नैंसी ने संदेह जताया कि शिमला पुलिस सरकारी तंत्र के दबाव में आकर एकतरफा कार्यवाही कर रही है। नैंसी ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार का सदैव से ही एस.एफ.आई के लिए नर्म रुख रहा है और अगर पुलिस प्रशाशन इस मामले में दोहरी कार्यवाही नहीं करेगी तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रदेश भर में शिमला पुलिस के विरुद्ध बड़े स्तर पर प्रदेश करेगी।
एसएफआई एचपीयू इकाई ने एबीवीपी के गुंडों द्वारा छात्रों पर किए गए बर्बर हमले के खिलाफ उप- कुलपति के माध्यम से कुलपति को ज्ञापन सौंपा।
आज एस एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने 11 मार्च को एबीवीपी के गुंडों द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों पर किए गए बर्बर हमले के खिलाफ उप कुलपति के माध्यम से कुलपति को ज्ञापन दिया। 11 मार्च को हुई इस घटना में जब एस एफ आई के कार्यकर्ता विश्वविद्यालय के प्रशासनिक विभाग के पीछे बैठ कर नाश्ता कर रहे थे, उस वक्त एबीवीपी के गुंडे बिना किसी वजह के उन पर तेज़-धार हथियारों से हमला कर देते हैं। इस निर्दय हमले के चलते 5 छात्र गंभीर रूप से घायल होते हैं जिनमें से एक अभी भी अस्पताल में दाखिल है।
गौरतलब है कि इस पूरे प्रकरण के दौरान समरहिल पुलिस चौकी के एएसआई भरत भूषण मौका ए वारदात पर ही मौजूद होते हैं लेकिन इसके बावजूद वे इस घटना को होने से रोकने में नाकाम साबित होते हैं। इस बर्बर हमले में सम्मिलित 8 आरोपियों (अंकुश, अक्षय, पीयूष, हर्ष, राहुल, हनी, आशीष और ईश) को कोर्ट ने 6 दिन की हिरासत में रखने का आदेश दे दिया है। बाकी आरोपियों की तलाश अभी जारी है।इन अपराधियों के खिलाफ एफआईआर संख्या 42/25, दिनांक 11 मार्च 2025 दर्ज की जा चुकी है और पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 (हत्या के प्रयास) व अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
गौर करने की बात है कि ये अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के वही गुंडे हैं जो कुछ समय पहले राम कृष्ण मिशन आश्रम में पथराव करते पाए गए थे और संजौली मस्जिद विवाद के दौरान भी इन्हीं लोगों ने शिमला शहर में सांप्रदायिकता की आग भड़कने का काम किया था।
इस निर्दय हमले के तीन दिन गुजरने के बाद भी अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इन गुंडों पर किसी भी तरीके की अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं करी गई है।
एस एफ आई ने विश्वविद्यालय उप कुलपति से ये मांग करी है कि इस वाक़िए की गंभीरता को मद्देनजर रखते हुए इन असामाजिक तत्वों पर विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करे ताकि इस घटना में घायल हुए छात्रों को इंसाफ मिल सके और विश्वविद्यालय के अकादमिक और छात्र अनुकूल वातावरण में सुधार लाया जा सके।
एस एफ आई हमारे पूरे देश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अ भा वि प जैसे संगठनों द्वारा करवाई जा रही हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा करती है। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन इस घटनाक्रम में सम्मिलित सभी आरोपियों पर जल्द से जल्द कार्यवाही नहीं करती है तो एस एफ आई विश्वविद्यालय की छात्र समुदाय को लामबंद करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के नकारात्मक रवैया के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का निर्माण करेगी जिसका जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन खुद होगा।
*महिलाओं को उनके सामाजिक व राजनितिक हक़ और हिस्सेदारी के प्रति किया जागरूक*
*प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षा प्रतिभा सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि की शिरकत*
*विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को युवा कांग्रेस ने किया सम्मानित*
भारतीय युवा कांग्रेस द्वारा अंतराष्ट्रीय महिला दिवस को देशभर में महिला सम्मान दिवस के रूप में मनाया और विभिन्न राज्यों में उत्कृष्ट महिलाओं के लिए शक्ति सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में हिमाचल युवा कांग्रेस द्वारा शिमला स्थित राजीव भवन में राज्य स्तरीय महिला सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। युवा कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष अमला कश्यप और पूनम चोपड़ा की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और उनके योगदान को समाज में बड़े स्तर पर पहचान दिलवाने का प्रयास किया गया। महिला शक्ति सम्मान समारोह में विभिन्न महिला शिक्षकों, डाक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों, वकीलों, पुलिस व होमगार्ड, सफाई कर्मियों सहित विभिन्न एनजीओ, महिला मण्डलों व स्वयं सहायता समूह की महिलाओं व अन्य महिला सोशल वर्करों और पंचायती राज संस्थाओं की कई उत्कृष्ट महिलाओं को सम्मानित किया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा सिंह जी उपस्थित रही और उनके साथ युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष छतर ठाकुर व नगर निगम शिमला की उप महापौर उमा कौशल ने इस आयोजन में विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की।
कांग्रेस अध्यक्षा प्रतिभा सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि महिलाएं हमारे समाज की रीढ़ हैं और उनके योगदान को पहचान दिलवाना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और हमारे कार्यकर्ताओं को इस दिशा में काम करने के लिए सदैव प्रेरित किया जाता रहा है। कांग्रेस पार्टी प्रमुख प्रतिभा सिंह ने इस मौके पर महिलाओं को उनके सामाजिक व राजनितिक हक़ और हिस्सेदारी के प्रति भी जागरूक किया।
हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष अमला कश्यप और पूनम चोपड़ा ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि महिलाएं हमारे समाज की प्रगति के लिए अति महत्वपूर्ण हैं और हमें उनके अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। हम महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार काम करना जारी रखेंगे और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए युवा कांग्रेस संगठन सदैव ही प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए संगठन की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए युवा कांग्रेस विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों को आगे भी आयोजित करना जारी रखेगी जिसमे महिला शिक्षा, स्वास्थ्य, और आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित कार्यक्रम शामिल होंगे।
हमारा लक्ष्य है कि महिलाएं समाज में समान अधिकार और अवसर प्राप्त करें, और हम इस दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
युवा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष छतर ठाकुर ने इस मौके पर कहा की महिलाएं समाज में समान अधिकार और अवसर प्राप्त करें कांग्रेस संगठन इस दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
आज प्रदेश की युवा नस्ल को ख़त्म करने वाली नशाखोरी जैसी समस्याओं को जड़ से उखाड़ फाइकने में मातृशक्ति और महिलाशक्ति को अपना विशेष योगदान देने की आवश्यकता है। युवा कांग्रेस हमेशा ही युवा व महिला सशक्तिकरण के लिए काम करना जारी रखेगा।
*अ•भा•वि•प• हिमाचल प्रदेश वि•वि• इकाई का अभ्यास वर्ग हुआ शुरू - आशीष शर्मा*
*नए कार्यकर्ताओं का किया जायेगा प्रशिक्षण - अ•भा•वि•प•*
*08/03/2025*
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला इकाई के इकाई मंत्री आशीष शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय इकाई द्वारा दो दिवसीय इकाई अभ्यास वर्ग का आयोजन विकासनगर शिमला के सरस्वती विद्या मंदिर में किया गया है जो 08 मार्च से शुरू हो चुका है। प्रत्येक वर्ष होने वाले इकाई के इस अभ्यास वर्ग में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को विद्यार्थी परिषद के सिद्धांत, वैचारिक यात्रा एवं कार्य पद्धति के बारे में बताया जाता है।
विभाग संगठन मंत्री अश्वनी ठाकुर जी द्वारा दीप प्रज्वलन कर एच पी यू इकाई के अभ्यास वर्ग का विधिवत शुभारंभ किया गया ।अश्वनी ठाकुर जी ने प्रस्तावना देते हुए विद्यार्थी परिषद के 75 वर्षों के कार्यकाल के बारे में संक्षिप्त में बताते हुए सुनील उपाध्याय जी के बारे में वर्णन करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के अंदर विद्यार्थी परिषद के काम की नींव रखने का श्रेय एक मात्र किसी को जाता हैं तो वह सुनील उपाध्याय जी रहे , जिन्होंने 18 वर्ष की उम्र से लेकर 25 उम्र की आयु तक लगातार हिमाचल के अंदर संघर्ष करते हुए विद्यार्थी परिषद का काम खड़ा किया।
राष्ट्रीय कला मंच प्रांत प्रमुख डॉ शशिकांत जी ने वैचारिक यात्रा में कार्यकर्ताओं को जागरूक करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् प्रदेश का ही नहीं बल्कि भारत का सबसे बड़ा छात्र संगठन है और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जुलाई, १९४९ को संघ कार्यकर्ता बलराज मधोक जी की अगुआई में की गयी थी। मुंबई के प्रोफेसर यशवन्तराव केलकर इसके मुख्य कार्यवाहक बने।साथ ही साथ उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह जी के जीवन पर प्रकाश डाला ।9 जुलाई 1949 राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के बारे में जानकारी दी और छात्र संघ चुनाव के बारे में कार्यकर्ताओं को जागरूक किया । वैचारिक यात्रा में राष्ट्रीय भाषा हिंदी के इतिहास तथा भारत के इतिहास पर प्रकाश डाला ।
एस् एफ आई हिमाचल् प्रदेश् विश्विद्यालय् इकाई ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर खेल प्रतियोगिता आयोजित की।
आज पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, जिसमें महिलाओं के अधिकारों, समानता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में एस एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय ने भी खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें विश्वविद्यालय के लडकियों ने भाग लिया जिसमे उनका उल्लेखनीय योगदान रहा।
प्रतियोगिता का शुभारंभ एस एफ आई विश्विद्यालय इकाई सचिव रितेश द्वारा किया गया । रितेश ने काहा की "महिलाएं समाज की रीढ़ हैं और उनकी भागीदारी के बिना किसी भी राष्ट्र की प्रगति संभव नहीं है। आज महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, खेल, व्यवसाय और सामाजिक कार्यों में अद्वितीय योगदान दे रही हैं। हमें महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाइए ।
खेल प्रतियोगिता के दौरान इकाई अध्यक्ष अंकुश राणा ने कहा कि "इस वर्ष का महिला दिवस का विषय ' अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2025 के लिए संयुक्त राष्ट्र की थीम है ' सभी महिलाओं और लड़कियो के लिए अधिकार,समानता और सशक्तिकरण'। जो हमें यह याद दिलाता है कि महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें हर क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करना आवश्यक है। महिला सशक्तिकरण केवल समाज की प्रगति के लिए ही नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी जरूरी है।महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए इस खेल प्रतियोगिता के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, शिक्षा के महत्व को समझने और नेतृत्व कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।
एस एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई की खेल प्रतियोगिता मे 100 लड़कियों ने भाग लिया।इस प्रतियोगिता मे बहुत सी गतिविधियां कराई गई ओर इन गतिविधियो मे लड़कियो ने बड़ चढ़ कर भाग लिया ।
एस एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय हमारे देश ओर दुनिया मे महिलाओं के ऊपर हो रहे शोषण ओर हमारे समाज मे फेले पितृस्तात्मक सोच ओर प्रचलन कर खिलाफ आवाज उठाने वाली महिला हित की बात रखने वाली माहिलाओ की कुर्बानियों ओर प्रायसो का सम्मान करती है ।साथ हि साथ एस एफ आई हमारे देश ओर प्रदेश की सरकार से मांग करती है की महिलाओ के ऊपर हो रहर शोषण पर रोक लगाई जाए ओर महिला कल्याण की नीतियाँ लागु करे।
नशा मुक्ति के लिए एक प्रखर सामाजिक आंदोंलन की आवश्यकताः डॉ. रिंकू योगा
बात हिमाचल की / यादविन्द कुमार
राष्ट्रीय जनगणना आंकलन रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनियां का सबसे युवा देश है, किसी भी देश की तरक्की युवा शक्ति पर निर्भर करती है, युवा शक्ति को राष्ट्र शक्ति भी माना जाता है। किसी शायर ने कहा था " तलवारों की धारों पर इतिहास हमेशा बनता है जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है" परन्तु जब मेरे देश की युवा पीडी नशे के दलदल में फंसी हो तो देश का भविष्य अंधकारमय दिखाई देता है आज समाज के सभी वर्गों में नशे की लत बुरी तरह घर कर गई है विशेष रूप से युवा वर्ग खतरनाक हद तक इसकी लपेट में आता जा रहा है, वर्तमान समय में नशाखोरी विशेषकर (चिट्टा और वैपिंग) की समस्या एक अति संवेदनशील मुद्दा बन गया है। इसका गंभीरता से विश्लेषण करने की जरूरत है, वास्तविकता यह है कि नशीले पदार्थों का व्यापार वैश्विक स्तर पर हो रहा है इसमें स्थानीय से लेकर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक अति आधुनिक तकनीकें उपुक्त हो रही हैं, यह कारोबार न केवल पूरी तरह संगठित है, बल्कि आधुनिक हथियारों से भी लैस है। इसमें राजनीतिक अपराधी, माफिया नेटवर्क, अन्तराष्ट्रीय ट्रांजिट प्रणालियाँ अनेक द्गों से और अनेक स्तरों पर संलिप्त है, मैक्सिको, ब्राजील, भारत, चीन, अमेरिका, रूस, यूरोप, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, अफ्रीका, नाइजीरिया, श्रीलंका इत्यादि देशों की सीमाओं और अंदरूनी केन्द्रों पर यह कारोबार फैला हुआ है | पुलिस, कर्मचारी, नेता, प्रसाशनिक अधिकारी, व विचोलिये इस तंत्र में संलिप्त हैं, औपनिवेश्क काल में अंग्रेजो ने बहुत गहरी साजिस के अधीन यहाँ के नौजवानो को नशेडी बनाकर कमजोर करने का लम्बे समय तक प्रयास किया, हम आज भी इसका परिणाम भुक्त रहें है और पता नहीं आगे कब तक भुगतेंगें ।
नशे के बारे में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने कहा था " मदपान मनुष्य को क्षणभर दीवाना बनाता है, मद उसे खा जाता है और उसे पता भी नहीं होता | यदि मुझे एक दिन के लिए शासन मिले तो मैं तत्काल सारे देश में नशाबंदी लागू कर दूंगा" वैसे तो सभी सरकारें देशभक्त और गाँधीवादी होने का दावा करती हैं लेकिन नशे पर रोक लगाने में पूरी तरह नाकाम रही हैं, इस समस्या पर सिर्फ भाषणों का उद्योग पनपा है, आजकल विनाशकार नशीले पदार्थों का अख़बारों और टेलीविजन के माध्यम से प्रचार हो रहा है, हमारे फ़िल्मी सितारे और सुपरस्टार खिलाडी मात्र कुछ पैसों के लिए अपनी दिलकश अदाओं से इन पदार्थों की विज्ञापनबाजी करते हैं, हमारी चुनी हुई सरकारें इस विज्ञापनबाजी पर प्रतिबंध लगाने में विफल रहीं हैं, शराब की बोतल, गुटका, तम्बाकू, सिगरेट इत्यादि की डिब्बियों पर लिखा होता है "इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है" इतना लिखकर कम्पनिय अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाती हैं,
हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे से प्रान्त के छोटे छोटे कस्बे, गाँव और शहर नशीले पदार्थों के गढ़ बन चुके हैं, रेव पार्टियों में हर रोज हजारों युवक-युवतियां नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं, रही सही कसर अब चिट्टा, समैक, कोकीन, हैरोइन, स्नेक वाइट, भांग और टीके पूरी कर रहें हैं, युवा पीडी आर्थिक, वौदिक के साथ-साथ स्वास्थ्य से भी बर्बाद हो रही है। इस हिरदयविदारक स्थिति से निपटने के लिए एक प्रखर सामाजिक आन्दोलन की आवश्यकता है। आत्मकेंद्रित सोच के कारण हम ऐसी समस्याओं पर मूकदर्शक बन कर नहीं रह सकते | भारत के युवा वर्ग को बर्बाद करने की इस सुनियोजित साजिस को असफल बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक व धार्मिक संगठनों, सम्प्रदायों, सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं को आपसी गिले शिकवे भुलाकर नशे के विरुद्ध जागरूकता आन्दोलन शुरू करना चाहिए | सामाजिक सम्मेलनों, सेमिनारों, नाटकों, मेलों और मीडिया में भी जोरदार प्रचार अभियान चलाया जाना चाहिए | नशा माफिया के खिलाफ सरकार और पुलिस प्रशासन का हर प्रकार से सहयोग करना होगा।
हमारे शास्त्रों में लिखा है कि "बुद्धि लुम्पति यद द्रव्यम मकारी तद उच्चतेः" यानि जिस पदार्थ के सेवन से बुि का विनाश हो जाता है उसे मकारी द्रव्य कहते हैं, पशुओं और मनुष्यों में मात्र बुद्धि और विवेक का ही अंतर है, हमारा देश विविधताओं का देश है, यहाँ पर हर प्रकार की मान्यताओं के लोग रहते हैं और उनकी जीवन शैलियाँ भी भिन्न है कई जगहों में धार्मिक अनुष्ठानो में या शादी-ब्याह जैसे सामाजिक समारोहों में नशे के कुछ प्रकारों की मान्यता है, जैसे शिवरात्रि पर भांग का उपयोग, शादी-ब्याह में शराब व सिगरेट का खुला उपयोग | हमारे फिल्म उद्योग भी हीरो हीरोइन के जीवन की कुछ घटनाओं को चित्रित करने के लिए नशे के दृश्यों को फिल्माकिंत करते हैं, जिसे किशोरावस्था के युवा स्टाइल स्टेटमेंट के रूप में इनका प्रयोग करते हैं, यहाँ तक तो स्तिथि समान्य थी | परन्तु चिट्टा जेसे नशे ने पिछले कुछ वर्षों से समाज में हडकंप मचा दिया है। चिट्टे का शिकार अधिकतर शिक्षित और संभ्रांत परिवारों के बच्चे होते हैं, क्योंकि महंगा नशा करने के लिए जेब खर्च भी अधिक चाहिए, ड्रग और चिट्टा माफिया की गिद्ध दृष्टी देश व प्रदेश के शिक्षण संस्थानों पर है। हमें मिलकर इस सारे ताने- बाने को तोडना है। लोगों को मानसिक तौर पर नशाखोरी के विरुद्ध तैयार करना होगा, लोगों को बताना होगा, कि नशा कभी अकेला नहीं आता यह अपने साथ भूखमरी, गरीबी, हिंसा मारपीट, अपराध, बीमारी, योनाचार और अंत में मौत भी लेकर आता है |
विश्विद्यालय शिक्षक कल्याण संघ एवं ग़ैर शिक्षक संगठन पदाधिकारियों ने आज कुलपति जी को ज्ञापन दिया
आज मीडिया को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय शिक्षक कल्याण संघ एवं ग़ैर शिक्षक संगठन पदाधिकारियों ने आज कुलपति जी को ज्ञापन दिया जिसमे उन्होंने कहा की जिस तरह से इस बार कर्मचारियों के वेतन में विलंब हुआ ऐसा भविष्य में नहीं होना चाहिए ।संयुक्त रूप में जारी बयान में कर्मचारी नेताओं ने कहा कि कहाँ अध्यापकों को अपने अकादमिक कार्य पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कार्य करना चाहिए लेकिन उन्हें अपनी तनख्वाह के लिए सड़कों में उतर कर अपने लिए भीख मंगनी पड़ रही है! वहीं गैर शिक्षक संघ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय भी सड़कों पर इंटरनेट को मजबूर है क्योंकि विश्वविद्यालय प्रसाशन ख़ुद ऐसी स्थितियाँ पैदा कर रहा है जहाँ कर्मचारियों में रोष पैदा हो रहा है ।
उन्होंने कहा कि विश्विद्यालय के इतिहास में ऐसा पहले कभी भी नहीं हुआ है ,की कर्मचारियों को वेतन के लिए सड़कों पर आना पड़ा हो ।
ये हमारे कल के धरने का ही प्रभाव था कि शिक्षा मंत्री को इसमें बोलना और निर्देश देना पड़ा जिससे कुछ ही समय में हमारी सैलरी को हमारे खाते में डाल दी गई! ऐसा पहली बार नहीं हो रहा! उपरोक्त स्थिति अभी कुछ माह पूर्व भी ऐसा ही हुआ था तब भी प्रसाशन को चेताया गया था ।
उन्होंने कहा कि विश्विद्यालय को सरकार कि ओर से मिलने वाली ग्रांट सालाना रूप में मिल जाया करती थी लेकिन उसे 3 माह में देने का प्रावधान किया गया और अब इसे हर माह देने कि व्यवस्था कि गई है जो कि सरासर गलत है!हर महीने हमारा वित् अधिकारी क्यूँ सरकार के पास कटोरा लेकर हमारी सैलरी कि भीख मांगने जाये जब हमें सालाना बजट पहले से ही जारी हो चूका है! अतः इसे एक मुश्त यूनिवर्सिटी को जारी किया जाये!
पूरा विश्विद्यालय सरकार के इस रव्वये के खिलाफ लामबंद हुआ जो की एक इतिहास है ।
उन्होंने प्रसाशन को चेतावनी देते हुआ कहा कि अगर एक बार फिरसे इस तरह कि स्थिति भविष्य में फिर से बनी तो हम सचिवालय कि ओर कूच करने और वहां जाकर प्रदर्शन करने से भी गुरेज नहीं करेंगे! उन्होंने पूरे विश्विद्यालय परिवार का कल के धरने को सफल बनाने और आगे के लिए संगठित रहने कि भी अपील कि है
राष्ट्रीय कवि चौपाल दौसा द्वारा आकस्मिक काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन
काव्य गोष्ठी में भीलवाड़ा के कवि कैलाश मंडेला का किया सम्मान
दौसा : हिमाचल अब तक : हरीश शर्मा -: राष्ट्रीय कवि चौपाल, दौसा के तत्वावधान में शाहपुरा, भीलवाड़ा से पधारे राष्ट्रीय गीतकार कवि कैलाश मंडेला के आतिथ्य में सम्मान समारोह एवं आकस्मिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय कवि चौपाल दौसा के जिलाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रचारक कवि कृष्ण कुमार सैनी, उपाध्यक्ष डॉ.बृजमोहन मीना, महासचिव कवि कैलाश सुमा, सलाहकार मिमिक्री कलाकार अशोक खेड़ला ने संस्था के माध्यम से भीलवाड़ा के कवि कैलाश मंडेला का माला, दुप्पटा, सम्मान पत्र एवं कलम भेंट कर सम्मान किया गया। जिलाध्यक्ष कवि कृष्ण कुमार सैनी ने राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर से प्रकाशित अपनी पुस्तक "नमन शहीदों को" एवं महासचिव कैलाश सुमा ने अपनी पुस्तक "करारी चोट" की प्रति भेंट की। इस दौरान सभी ने अपनी अपनी कविताएं भी सुनाई।
सर्वप्रथम कवि कैलाश मंडेला ने "बनते नहीं है गीत कभी भी प्रयास से, कहता है कोई और ही मेरे कयास से, जुड़ते हैं तार श्वास के गूंजता है नाद, मदहोशियां को लिखता हूं होशो हवास से" गीत सुना कर खूब वाह वाही लूटी। कवि कृष्ण कुमार सैनी ने वीर रस की कविता "स्वर्णाक्षर से लिक्खेंगे इतिहास हमेशा वीरों का, गाएगी गुणगान सदा ही ये दुनिया रणधीरों का, दी हैं जान जिन्होंने अपने वतन क़ी रक्षा की खातिर , होगा सदा सम्मान वतन में ऐसे हीरों का" सुनाकर वीर जवानों को याद किया। मिमिक्री कलाकार अशोक खेड़ला ने विभिन्न जानवरों एवं साधनों की, फिल्म अभिनेताओं की आवाज निकाल कर अपनी कला का प्रदर्शित किया और खूब वाह वाही लूटकर जमकर तालियां बटोरी।
डॉ.बृजमोहन मीना ने "झूठे वादों से मन कितना बहलाओगे, तुम मेरी जान हमें कितना तरसाओगे, सच बताऊं कि बन ठन के तुम इस तरह, किससे मिलने सनम रात तुम जाओगे" प्रेम गीत सुनाया। कवि कैलाश सुमा ने "बता दे सत्य की राहे वही तो ज्ञान है जग में, मिले हर और मधुवानी वही सम्मान है जग में, दया और सत्य के बल से हर जो दर्द दीनों का, विपत में साथ जो देता वही इंसान है जग में" भावपूर्ण कविता सुनाई। इस दौरान कवि कैलाश मंडेला ने संस्था के पदाधिकारियों का आभार प्रकट किया।
शाहगढ़ की रोशनी : विकलांगता को मात देकर बनीं प्रेरणा स्रोत
शाहगढ़/अमेठी : : हरीश शर्मा -: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, शाहगढ़, अमेठी की एक दिव्यांग महिला रोशनी की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। रोशनी ने अपनी विकलांगता को कभी भी अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया और आज वह न केवल एक आत्मनिर्भर महिला हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। रोशनी को बचपन से ही विकलांगता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपनी प्रारंभिक कठिनाइयों और समाज के उपहास के बावजूद, उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और सिलाई, कढ़ाई और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण लिया। रोशनी ने अपने कौशल का उपयोग करके अपना खुद का स्वरोजगार शुरू किया और जल्द ही अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सफल रही।
रोशनी एक प्रतिभाशाली महिला हैं और सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग बहुत बड़ी है। इसके अलावा, वह एक प्रतिभाशाली गायिका भी हैं और अवधी लोकगीतों में उनकी आवाज बहुत पसंद की जाती है। "मैं अपनी विकलांगता को कभी भी अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दूंगी। मैं अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार शुरू करने में मदद करना चाहती हूं," रोशनी कहती हैं। रोशनी की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपनी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। यह हमें सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कुछ भी संभव है।
प्रदेश में नशे के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की
आज एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने राज्य कमेटी के आवाहन पर प्रदेश में बढ़ रहे नशे के कारोबार को लेकर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विश्विद्यालय के छात्रों को जागरूक किया और आने वाले समय प्रदेश में नशे के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की* ।
प्रदेश में बढ़ते नशे के खिलाफ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एसएफआई कमेटी ने पिंक पेटल पर नुक्कड़ नाटक किया । एस एफ आई के द्वारा इस नुक्कड़ के जरिए लोगों को जागरूक करने का काम किया गया । इस नुक्कड़ में एस एफ आई में नशे के गंभीर परिणामों को लोगो के समक्ष रखा गया ।
इस नुक्कड़ में बात रखते हुए कैंपस उपाध्यक्ष मुकेश ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हिमाचल प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग्स ने प्रदेश को उड़ता हुआ हिमाचल प्रदेश बना दिया है। जिसमें प्रदेश के लगभग 60 % लोग आज सिंथेटिक ड्रग्स के शिकार हो चुके है प्रदेश में 10 परिवार में से 8 परिवार इसके आदि हो चुके है। सिंथेटिक ड्रग्स में चिट्टा प्रदेश में बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है जिसके कारण हजारों युवा इसके शिकार हो चुके है। इसके साथ-साथ प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों से लेकर एमबीबीएस छात्र व वकील एवं डॉक्टर इसके आदि हो चुके है ओर न जाने कितने लोग अभी ओर इसके शिकार होने वाले है।
उन्होंने बात रखते हुए कहा कि प्रदेश में स्थिति अब बहुत दयनीय हो चुकी है आय दिन चिट्टे कि खबरें सुनने और देखने को मिल रही है जिसमें प्रदेश पुलिस अपनी कार्यवाई लगातार जारी रखे हुए है उसके बाबजूद भी यह रुकने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश में चिट्टा लेने के साथ-साथ कुछ लोगो ने इसे आर्थिकी तौर पर कारोबार का धंधा बना दिया है जिसके चलते आज यह हिमाचल को दीमक की तरह खोकला कर रहा है
इस प्रदर्शन में इन्होंने कहा की आज का युवा देश का भविष्य है परन्तु आज का बेरोजगार युवा नशे के जाल में फसता जा रहा है और केंद्र की सरकार और हिमाचल प्रदेश की सरकार इस पर कोई ठोस रणनीति बनाने में नाकमयाब है प्रदेश सरकार तो इस पर सुधारवादी तरीका अपनाने में लगी है जिसमें सरकार के करीबी लोग जो इस चिट्टा के कारोबार में संलिप्त है उनको संरक्षण देते हुए उनको बचाने में लगी है एसएफआई प्रदेश सरकार से यह मांग करती है की प्रदेश में जो ड्रग्स का करोबार कर रहा है उसके खिलाफ कार्यवाई करें और प्रदेश में इसके खिलाफ सख़्ती से कानून को लगू करें ताकि प्रदेश में फैल रहे चिट्टे और बाकी सिंथेटिक ड्रग्स पर रोक लगायी जा सके। यह सिर्फ समाजिक मुद्दा नहीं है यह एक राजनीतिक मुद्दा है।
आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से राज्य कमेटी के नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान को शुरू किया गया और प्रदेश में नशे के खिलाफ काम कर रहे जनवादी संगठन के साथ मिलकर चलते हुए प्रदेश में इस नशे को खत्म करने का ऐलान किया गया और प्रदेश सरकार से यह मांग करती है की प्रदेश में नशे के कारोबार पर रोक लगाए और जो लोगो चिट्टे के शिकार हो चुके है उन्ह लोगो की लिए सरकारी Rehab centre में उपचार एंव साइकैटरिस्ट की सुविधा उपलब्ध करवाएं ताकि वह इस नशे के चुंगल से बाहर आ सके।
*विद्यार्थी परिषद जिला शिमला ने जिला उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन*
*ड्रग माफ़िया के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग*
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद शिमला ने क्षेत्र में नशे के बढ़ते जाल और प्रशासन की लापरवाही के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने आज शिमला जिला उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्रातिशीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो परिषद उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद शिमला द्वारा प्रदेश में बढ़ रही नशा प्रवृति (चिट्टा) के विरुद्ध मोर्चा खोला है। विद्यार्थी परिषद ने ये मांग की है कि प्रशासन को इसके विरुद्ध कार्य कर रही विभिन्न संस्थाओं का भी सहयोग लेना चाहिए और प्रशासन अविलंब ड्रग माफ़िया के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए, सभी ड्रग पेडलर्स को गिरफ़्तार किया जाए, नशे के अड्डों पर छापेमारी की जाए और इस गंदे खेल में सम्मिलित बड़े सरगनाओं को बेनकाब किया जाए। यदि सरकार व प्रशासन ऐसा नहीं करती है तो एबीवीपी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी जिसका पूरा ज़िम्मेदार प्रशासन होगा।
एबीवीपी ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि हिमाचल जैसी देवभूमि पर नशे का कारोबार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि शीघ्रातिशीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो विद्यार्थी परिषद क्षेत्रव्यापी आंदोलन छेड़ने से पीछे नहीं हटेगी। अब समय आ गया है कि सरकार और प्रशासन नींद से जागे और नशे के सौदागरों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए ताकि देव भूमि हिमाचल में बढ़ती नशा प्रवृत्ति पर रोक लग सके।
*विद्यार्थी परिषद की मुख्य मांगे*
1. जिला स्तर पर चिट्टे को रोकने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद ली जाए।
2. चिट्टा तस्करी में संलिप्त लोगों पर सख्ती से नकेल कसी जाए।
3. जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में चौकसी बढ़ाई जाए तथा नशे के संवेदनशील क्षेत्रों पर निरंतर गश्त और छापेमारी की जाए।
4. . जिले के समस्त शिक्षण संस्थानों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए तथा नशा निवारण केंद्रों की मदद से प्रशिक्षण शिविर लगाए जाए।
5. जिला स्तर पर उड़न दस्तों का गठन किया जाए तथा संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए।
6. जिला मुख्यालय में एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए, जहां नशा तस्करी और नशे से जुड़ी गतिविधियों की गोपनीय सूचना दी जा सके। यह हेल्पलाइन 24x7 सक्रिय रहे और सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए।
संघ विचार को समाज में ले जाकर ही होगा वास्तविक परिवर्तन : शिवप्रताप शुक्ल
मातृवंदना पत्रिका के विशेषांक एवं दिनदर्शिका का भव्य विमोचन कार्यक्रम
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ला जी ने कहा कि कुंभ में लगभग 80 करोड़ लोगों ने स्नान किया। इतने बड़े स्तर पर प्रशासन प्रत्येक व्यक्ति के सुरक्षा का दावा नही कर सकता। फिर भी विचार की ताकत ने सभी लोगों को अनुशासित किया और यह वैश्विक अभियान सफल रहा। प्रदेश की सर्वाधिक प्रसारित और लोकप्रिय मासिक पत्रिका मातृवन्दना एवं दिनदर्शिका विमोचन कार्यक्रम का आयोजन शिमला के गयेटी थियेटर में किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल उपस्थित हुए। मुख्य अतिथि राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने कहा कि कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि प्रसिद्ध समाजसेवी राजकुमार वर्मा और मुख्य वक्ता राष्टीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता वीरेन्द्र सेपेइया रहे। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से नशे के विरुद्ध अभियान चलाने का आह्वान किया।
ने कहा कि जब अयोध्या में ढांचा गिराया गया तो देश में पर्याप्त विचार सशक्त था लेकिन प्रसार नही था इसलिए सता में सरकार नही बन पाई। इसलिए कुछ भी कार्य करना हो तो विचार का प्रचार जन जन तक होना चाहिए।
राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने कहा कि मातृवंदना पत्रिका के बारे बताया कि यद्यपि संघ विचार के बारे विस्तार से बताया गया है फिर भी इसमें पंचप्राण के बारे बताया गया है। उन्होंने हिमाचल के बदले पर्यावरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यहां लगातार आपदाएं आ रही है ऐसे में नागरिक के रूप में हमें अपने कर्तव्य का बोध होना चाहिए। उन्होंने समरसता में संघ की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। मुख्य वक्ता वीरेन्द्र सेपइया ने अपने उद्बोधन में कहा कि उन्होंने कहा कि संघ किस स्तिथि क्या थी आज संघ किस स्थिति में और समाज के लिए संघ ने क्या किया। उन्होंने संघ को प्रारंभ करने वाले प्रथम पूज्य सरसंघचालक हेडगेवार के जीवन के बारे महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि आजादी अंग्रेजों को भगाना मात्र नही है बल्कि भारतीय समाज की कुरीतियों को दूर करना है। उन्होंने भारतीय समाज को संगठित करना और भारतीय समाज में राष्ट्रभक्ति पैदा करना इन उद्देश्यों को लेकर संघ का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने जान लिया था कि भारतीय संस्कृति से अलग किए बगैर भारत पर शासन नही किया जा सकता। उन्होंने मैकाले की शिक्षा नीति को लागू किया जिसका उद्देश्य ही था भारत में काली चमड़ी के अंग्रेज पैदा करना जो इंग्लिश के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कृति के प्रति घृणा का भाव रखे। अंग्रेजी शिक्षा ने भारतीयों आत्मिक श्रेष्ठता का भाव ही समाप्त कर दिया। उन्होंने जानकारी दी की देश भर में 80 हजार से ज्यादा शाखाएं चल रही है जिसमे लाखों संघ के कार्यकर्ता शाखाएं लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि संघ का कार्य हिमाचल में आसान नही था संघ के कार्यकर्ताओं ने अनेकों विरोधों के बावजूद भी संघ का कार्य आगे बढ़ाया। कार्यक्रम में मातृवन्दना पत्रिका के बारे में जानकारी प्रदान करते हुए पत्रिका संपादक दयानंद शर्मा ने बताया कि प्रदेश में जागरण मासिक मातृवन्दना पत्रिका की 30 हजार से अधिक प्रतियां प्रतिमास हिमाचल के जन-जन तक पहुचती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष संघ अपनी 100 वीं वर्षगांठ मना रहा है। लोगों में जी पत्रिका पठन के प्रति लगातार उत्साह बना हुआ है। उन्होंने कहा पत्रिका ने लोगों में देशभक्ति का जागरण के विशिष्ठ भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख प्रताप जी, विश्व संवाद केंद्र न्यास के अध्यक्ष राजेश बंसल, उपाध्यक्ष यादवेंद्र सिंह चौहान, कार्यालय प्रमुख दलेल सिंह ठाकुर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित हुए।
*शोध द्वारा किया जायेगा युवाओं को जागरूक - सर्वेश दीक्षित*
*बढ़ते नशे को रोकने लिए समाज के प्रत्येक नागरिक का योगदान जरूरी - सर्वेश दीक्षित*
शोध हिमाचल प्रदेश इकाई द्वारा प्रदेश में बड़ रहे नशे की खेप के चलते 3-6 मार्च तक अभियान के तहत विश्वविद्यालय की विभिन्न शोध समितियों में सेमिनार करवाने जा रही है। जिसके निमित प्रदेश के युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इसी के निमित 3 मार्च को शोध समिति धर्मशाला, 5 मार्च को शोध समिति देहरा, 6 मार्च को शोध समिति हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में Mental Health of Drug Abuse पर 7 मार्च को शोध समिति शाहपुर में सेमिनार का आयोजन किया जाएगा।
इसमें विभिन्न NGO के लोग, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, Rehabilitation चलाने वाले लोग, विभिन्न विभागों के आचार्य, शोधार्थियों व छात्रों की उपस्थिति रहेगी। इन सेमिनारों में नशा के खिलाफ काम करने वाले वक्ताओं को विशेष रूप से बुलाया जा रहा है।
शोध प्रांत संयोजक सर्वेश दीक्षित ने जानकारी देते हुए कहा कि बढ रही चिट्टा तस्करी पर जल्द से जल्द रोक लगाने की आवश्यकता है। शोध द्वारा आयोजित इन सेमिनारों के माध्यम से आम लोगों तक नशे के प्रति जागरूकता का संदेश दिया जा रहा है। ताकि चिट्ठे जैसे खर्तरनाक नशों से इस हिमाचल का नागरिक बच पाए।
**अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा प्रदेश स्तरीय मांगों के आहवान को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया गया।*
**अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदेश सरकार के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया गया*
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने आज विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न मांगों को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया। इस अभियान का उद्देश्य गेस्ट टीचर पॉलिसी को वापस लेने और छात्र संग चुनाव बहाल करने जैसी अनेक मांगों को उठाया।
1. छात्र संघ चुनाव शीघ्र बहाल किए जाएं।
2. शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक भर्तियां शीघ्र की जाए।
3. NEP 2020 - को प्रभावित रूप से शिक्षा प्रणाली में लागू किया जाया।
4. अतिथि शिक्षक भर्ती के निर्णय को वापिस लें।
5. विधानसभा में विभिन्न पदों पर हुई भर्तियों पर लगे आरोपों की न्यायिक जांच की जाएं।
6. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति की नियुक्ति की जाए।
इकाई अध्यक्ष हनी शर्मा ने बताया कि पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य है। गेस्ट टीचर पॉलिसी से न केवल छात्रों की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, बल्कि इससे शिक्षकों के भविष्य पर भी अनिश्चितता बनी रहती है।
विश्वविद्यालय परिसर में हस्ताक्षर अभियान में लगभग 700 से 800 छात्रों ने भागीदारी को सुनिश्चित किया! विद्यार्थी परिषद ने यह अभियान हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय मैं पढ़ने वाले छात्रों की सहभागिता करते हुए स्टूडेंट सेंटर पिंक पेटल पर चलाया!
छात्र संघ चुनाव हिमाचल प्रदेश के अंदर 2013 से , ऐसे लगभग 1 दशक से भी ज्यादा हो चुका है जब से हिमाचल प्रदेश का मूलभूत अधिकार छात्र संघ को अभी तक प्रदेश की सरकार द्वारा बहाल नहीं किया गया है जिससे कि छात्रों के अधिकारों का भी हनन होरा है , शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए छात्रों के मूलभूत अधिकार छात्र संघ चुनाव को बहाल करना अनिवार्य है।
पूरे देश भर में देखने को मिलता है कि जहां जहां भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किया गया वहां वहां शिक्षा सुचारू रूप से चल रही है परंतु हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में इसे अभी तक लागू न करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है , अत: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को शीघ्र से शीघ्र लागू किया जाया ।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, प्रदेश का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है पर फिर भी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति का न होना , प्रदेश की सरकार का शिक्षा की तरफ लापरवाह रवैया को दिखाता है और शिक्षा के साथ खिलवाड़ करने का काम जो है प्रदेश की सरकार कर रही है अत: विद्यार्थी परिषद सरकार से स्थाई कुलपति की नियुक्ति के लिए मांग करती है ।
अभियान के दौरान छात्रों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों ने बड़ी संख्या में हस्ताक्षर कर इस मुहिम को समर्थन दिया। एबीवीपी के इकाई अध्यक्ष [ हनी शर्मा] ने कहा कि यदि प्रशासन हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं लेता है, तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि गेस्ट टीचरों की नियुक्ति के स्थान पर स्थायी शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की रुकावट न आए।
*प्रदेश स्तरीय आंदोलनों की रूपरेखा तैयार - अ•भा•वि•प•*
*सोलन के नालागढ़ में संपन्न हुई विद्यार्थी परिषद की प्रांत कार्यकारिणी बैठक - नैंसी अटल*
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश की वर्ष 2025 की प्रांत कार्यकारिणी बैठक संगठनात्मक जिला नालागढ़ सोलन में संपन्न हुई प्रांत मंत्री नैंसी अटल जी ने बयान जारी करते हुए कहा कि विद्यार्थी परिषद की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक साल में 2 बार होती है ऐसे ही इस बैठक में विद्यार्थी परिषद की प्रदेश कार्यकारिणी के लगभग 68 छात्र, 21 छात्राएं, 30 प्राध्यापक एवं 2 अन्य कुल 121 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस बैठक में विद्यार्थि परिषद द्वारा पिछले 1 साल में अभी तक हुए कार्यक्रमों एवं आंदोलनों की समीक्षा हुई और आने वाले 1 साल तक होने वाले कार्यक्रमों एवं आंदोलनों की योजना भी की गई।
विद्यार्थी परिषद द्वारा प्रांत कार्यकारिणी बैठक में दो प्रस्ताव पारित किए गए हैं जिसमें पहले हिमाचल प्रदेश के वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए चर्चा की गई है कि हिमाचल प्रदेश एक शांतिपूर्ण वातावरण के लिए और सदृढ़ कानून व्यवस्था के लिए जाना जाता है। लेकिन सरकार की नीतियों से न केवल प्रदेश की सकारात्मक छवि धूमिल हो रही है बल्कि प्रदेश के संसाधनों का भी दुरुपयोग हो रहा है।
वर्तमान सरकार द्वारा सत्ता में आने से पहले जो 10 गारंटीया की गई थी उसमें से एक भी गारंटी सरकार प्रभावी रूप से पूरी नहीं कर पाई है। सरकार द्वारा युवाओं को 5 लाख रोजगार देने का वादा किया गया था लेकिन पिछली सरकार द्वारा स्वीकृत पदों को भी अभी तक नहीं भरा गया है।
प्रदेश में नशा माफिया दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है लेकिन प्रदेश सरकार नशा माफिया में अंकुश लगाने में भी असफल होती नजर आ रही है। अब प्रदेश की स्थिति दिन प्रतिदिन ऐसी बिगड़ती जा रही है की हर दिन चिट्टे जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों की घटनाओं के बारे में लगभग हर दिन सुनने को मिल रहा है।
पिछले दो वर्षों में प्रदेश के अंदर 458 दुष्कर्म, 138 हत्याएं, 1643 चोरियां ईवा, 51 झगड़े के मामले सामने आए हैं जो कि प्रदेश के अंदर बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था की भयानक तस्वीर पेश करती है।
प्रदेश के अस्पतालों के बाहर लगने वाली लंबी कतारे प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे के वास्तविक स्थिति को उजागर करती है। गरीब असहाय और मजबूर लोगों को इलाज के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। यह समस्या न केवल स्वास्थ सेवाओं की कमी को दर्शाती है बल्कि प्रशासनिक उपेक्षा और संसाधनों की अपर्याप्तता का भी प्रतीक है।
ऐसे ही विद्यार्थी परिषद की प्रांत कार्यकारिणी की बैठक में पारित किए दूसरे प्रस्ताव में हिमाचल प्रदेश का वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य रहा। सरकार निरंतर एक के बाद एक छात्र विरोधी फैसले ले रही है। वर्तमान सरकार कई शिक्षण संस्थानों को बंद करने का निर्णय ले रही है। जिस कारण दूरदराज के क्षेत्र में आने वाले छात्रों को अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
फिर बात करें प्रदेश की दूसरे विश्वविद्यालय की जो कि वह सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में है तो वहां भी सरकार द्वारा ₹1000 प्रति लेक्चर काजल निर्णय लिया है इसका भी विद्यार्थी परिषद विरोध करती है युवाओं को स्थाई रोजगार प्रदेश सरकार को देना होगा जिससे प्रदेश सरकार अपना पल्ला झाड़ रही है। बात करें कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की इस विश्वविद्यालय की जमीन को भी सरकार द्वारा टूरिज्म के लिए देना छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ है जहां 112 हेक्टेयर जमीन सरकार द्वारा छात्रों से छीनी जा रही है।
बात करें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की तो हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में भी अभी तक स्थाई कुलपति की नियुक्ति नहीं की गई है जिसके कारण हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में प्रत्येक कार्य समय से नहीं हो पा रहा है। एवं हर कार्य के लिए लंबा समय लग रहा है। प्रदेश के विश्वविद्यालय के लिए यह एक दुर्भाग्यपूर्ण विषय है।
इन सभी समस्याओं एवं मांगो को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थी परिषद ने एक बड़ा आंदोलन खड़ा करने का फैसला लिया है। इस आंदोलन के चलते विद्यार्थी परिषद इकाई स्तर पर प्रत्येक महाविद्यालय में प्राचार्य को ज्ञापन सौंपेगी उसके बाद प्रत्येक इकाई स्तर में धरने प्रदर्शन करेगी उसके बाद हिमाचल प्रदेश के कोने-कोने में प्रत्येक इकाई में सांकेतिक भूख हड़ताल करेंगी। एवं सरकार को जगाने के लिए अगर मुख्य प्रदर्शन करना पड़ा तो वह भी विद्यार्थी परिषद प्रत्येक इकाई स्तर पर करेगी।
इसी आंदोलन के अंतर्गत विद्यार्थी परिषद जीमेल के माध्यम से मुख्यमंत्री शिक्षा मंत्री और राज्यपाल महोदय को अपनी मांगों को लेकर एक बड़ी संख्या में मेल करेगी। ऐसे ही प्रत्येक जिला केन्द्रों पर धरना प्रदर्शन विद्यार्थी परिषद करेगी डीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री जी को ज्ञापन सोपा जाएगा। और इसके अलावा भी इस आंदोलन को जारी रखने के लिए जो भी आंदोलनात्मक कदम उठाने पड़े वह विद्यार्थी परिषद उठाएगी।