पुलिस टेस्ट के पेपर लीक की जांच हाई कोर्ट के जज से कर्यवाई जाये-माकपा
निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफ़ा दें
के लिएमुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने आज 27 मार्च को लिया गया पुलिस भर्ती का टेस्टरद्द कर दिया है और टेस्ट दोबारा करवाने के आदेश जारी किए हैं।मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने इसे जयराम सरकार की विफ़लता बताया है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है।पार्टी के सचिव व पूर्व ज़िला परिषद भूपेंद्र सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस सरकार के समय में नई भर्तियों में कभी कोर्ट से स्टे हो रहे हैं तो कभी पेपर लीक हो रहे हैं और प्रदेश के हज़ारों युवाओं को नॉकरियां नहीं मिल रही है।उन्होंने कहा कि बहुत सी भर्तियां पारदर्शी तरीके से नहीं हो रही हैं जिसके कारण ही उन्हें न्यायालय के दख़ल से रोका गया है।जिनमें शिक्षा विभाग में मल्टी टास्क वर्करों की भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से पूरी नहीं हो पा रही है।इसी प्रकार नर्सरी अध्यपिकाओं की भर्ती भी सरकार नहीं करवा पा रही है।अब पुलिस विभाग में होने वाली 1700 कॉन्स्टेबलों की लिखित परीक्षा पेपर लीक के कारण सरकार ने रद्द कर दी है।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि इस सरकार के कार्यकल में एक तरफ़ शराब माफ़िया सक्रिय है जो नकली शराब बना कर लोगों की जान ले रहा है तो कहीं पर खनन माफिया सक्रिय है जो अवैध खनन धड़ल्ले से कर रहा है जिसे इस सरकार से पूर्ण सरंक्षण प्राप्त है।अब युवाओं को नॉकरी के नाम पर ठगा जा रहा है और पेपर लीक करवा के लाखों रुपये लेकर रोज़गार देने का धंधा फ़लफूल रहा है।वर्तमान सरकार जिसका आखिरी छह माह का समय शेष है वो प्रदेश के 15 लाख बेरोजगार युवाओं को रोज़गार देने में पूरी तरह बिफल रही है और युवा वर्ग बेकारी की समस्या के कारण तनावग्रस्त हो चुके हैं।भूपेंद्र सिंह ने मांग की है कि सामान्य प्रशासन का विभाग मुख्यमंत्री के पास है जिसमें पेपर लीक हुआ है इसलिए उन्हें नैतिकता से इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।उन्होंने सरकार से यह भी मांग की है कि जब यह टेस्ट दोबारा करवाया जाएगा तो उस समय टेस्ट देने वाले युवा युवतियों से आने जाने का किराया न लिया जाए और रोलनम्बर स्लीप दिखा कर निःशुल्क यात्रा की छूट दी जाये।उन्होंने ये भी मांग की है कि इस पेपर लीक गिरोह को निश्चित तौर पर राजनैतिक सरंक्षण प्राप्त है इसलिए इसकी जांच पुलिस महकमें की टीम के बजाये हाई कोर्ट के जज को सौंपी जाये तभी निष्पक्ष जांच हो सकती है।

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