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रविवार, 3 नवंबर 2024

*चंबा में 816 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास नहीं अपने भवन*

 *चंबा में 816 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास नहीं अपने भवन*






*चंबा*। जिले में 816 आंगनबाड़ी केंद्रों को अभी तक भवन नसीब नहीं हो पाए हैं। कई सालों से ये आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। यहां छोटे बच्चों को पढ़ाने से लेकर बच्चों को आवंटित होने वाला राशन रखने में परेशानी हो रही है।



*सरकार ने जिले की हर पंचायत में दो से तीन आंगनबाड़ी केंद्र खोल दिए हैं, लेकिन इनके संचालन के लिए भवनों की व्यवस्था नहीं की है। ग्रामीण इलाकों में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत सबसे दयनीय है।*



हालात यह हैं कि कुछ आंगनबाड़ी केंद्र तो कच्चे मकानों में चल रहे हैं। यहां बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है। कुछ निजी कमरों में चल रहे हैंं, जहां बच्चों को एक साथ रखना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए मुश्किल हो रहा है। सरकार और विभाग की अनदेखी के चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मजबूरी में निजी भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र चलाने के लिए विवश हैं। जिले में 1495 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र निजी कमरों और स्कूलों में चल रहे हैं। कुछ आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी कार्यालयों में भी चलाए जा रहे हैं। इससे सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को भी परेशानी हो रही है। आंगनबाड़ी केंद्र बनाने के लिए विभाग के पास अपनी जमीन नहीं है। विभाग ग्रामीणों से निजी भूमि विभाग के नाम करने की अपील कर रहा है, जिससे वहां आंगनबाड़ी केंद्र भवन बनवाए जा सके। सवाल यह उठता है कि जब आंगनबाड़ी केंद्र खोला गया तब जमीन का चयन क्यों नहीं किया गया। विभाग की इसी लापरवाही के कारण जिले में 800 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र निजी भवनों में चलाए जा रहे हैं। इन केंद्रों को कभी अपना भवन नसीब भी होगा इसको लेकर भी विभाग के पास कोई जवाब नहीं है। 



*जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश कुमार ने बताया* कि आंगनबाड़ी केंद्र का भवन बनाने के लिए यदि ग्रामीण निजी भूमि विभाग के नाम करने के लिए तैयार हैं तो उसके बाद ही आंगनबाड़ी केंद्र के लिए खुद का भवन बनवाया जा सकता है।



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