बल्ह हवाई अड्डे का समर्थन केबल बल्ह के खनन माफिया, ठेकेदार , तथाकथित पर्यावरणविद, सरकार के अन्धभक्त किसान यूनियन के चंद लोग कर रहे हे
20 मार्च,2022
बल्ह हवाई अड्डे का समर्थन केबल बल्ह के खनन माफिया, ठेकेदार , तथाकथित पर्यावरणविद, सरकार के अन्धभक्त किसान यूनियन के चंद लोग कर रहे हे जिनका प्रस्ताबित भूमि से कोई नाता नहीं है : बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति ।
बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम चौधरी तथा सचिव नन्द लाल वर्मा ने अपने संयुक्त वक्तव्य में बल्ह में प्रस्तावित हवाई अड्डे के निर्माण को लेकर हिमाचल किसान यूनियन के तथाकथित,स्वम्भू ,सरकार के अन्धभक्त और अपने को पर्यावरणविद कहलाने वाले बल्ह की जनता के बीच में अबेध कब्ज़े का भ्रम तथा गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी कड़ी निंदा की है। प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए 3500 बीघा भूमि का अधिग्रहण किया जाना है 460 बीघा भूमि सरकारी है लगभग 200 बीघा कंसा मैदान है, सुकेती, कंसा,लुहारी खड्ड में भी जमीन आती है अगर बल्ह के किसी किसान ने अगर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया है तो डबल इन्जन की सरकार को कार्यवाही करने से किसने रोका है। अपने को पर्यावरणविद बताने वाले को मालूम ही नहीं है कि हवाई अड्डा बनने से लाखों पेड़ कटेंगे, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी विलुप्त हो जाएंगे यही नहीं,प्रस्तावित हवाई अड्डे की भूमि से चारों तरफ पानी की सप्लाई की जाती है व् भी समाप्त हो जायेगी। बल्ह के किसान समझदार और पढ़े लिखें हैं उन्हें गुमराह करने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रदेश में सर्किल के आधार पर ही मुआवजा दिया जाता है, वह है सर्किल रेट, किसी को शक शुबहा हो तो बल्ह तहसील से रेट पूछे जा सकते हैं और जान सकते हे की कोन किसानों को गुमराह कर रहे हैं । 15 मार्च 2022 को खुद एसडीएम (बल्ह) ने माना की हमने स्कूलों, डिस्पेंसरी, आंगनवाड़ी, बिजली विभाग, लोकनिर्माण विभाग को कहा है कि प्रस्तावित हवाई अड्डे को मद्देनजर रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था का चयन करें। इन आदेशों से बल्ह के किसान भयभीत तथा सहमें हुए हैं। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
आज तक स्वम्भू ,सरकार के भक्त ब तथाकतित किसान यूनियन नेता ने आवारा पशुओं, जंगली जानवरों और किसानों के लिए क्या किया सिर्फ चंद लोगों और अपने आका के कहने पर अनापशनाप बयानबाजी करते रहते हैं। बल्ह की जमीन पुरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान रखती है जिसे मिनी पंजाब के नाम से भी जाना जाता है। सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में सरकारी नौकरी न होने के कारण बल्ह का नौजवान /किसान अपने खेतों में नकदी फसलें उगाकर अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में शिक्षा दिला रहा है व् अपने परिवार का पेट पाल रहा है। बल्ह हवाई अड्डे का समर्थन सिर्फ खनन माफिया, ठेकेदार ,सरकार के समर्थक जिनका इस प्रस्ताबित भूमि से कोई नाता नहीं है । कौड़ियों के भाव कोई भी प्रस्तावित हवाई अड्डे में जा रही है जमीन देने को तैयार नहीं है। बल्ह की भूमि को बचाने के लिए बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति को बहुत संगठनों का साथ मिल रहा है जिनमें हिमाचल किसान सभा, हिमाचल किसान संघ, भारतीय किसान यूनियन (टिकेत) का समर्थन मिल रहा है और आने बाले दिनों में अन्य किसान संघठनो से सहयोग लिया जायेगा जिस तरह सवा साल तक एकजुट किसान संघठनो ने दिल्ली के बॉर्डर पर बैठकर तीनो काले कानून रद करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री को मजबूर कर दिया और अंत में उन्हें देश से माफ़ी मांगनी पड़ी ।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें