सांझा व्यान में कहा कि यदि सारे निर्णय जयराम सरकार को ही लेने हैं तो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट तुरंत प्रभाव से वंद कर देने चाहिए
हिमाचल प्रदेश वेरोजगार अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष निर्मल सिंह धीमान, महासचिव श्रीमति लाजेश धीमान तथा मीडिया प्रभारी प्रकाश चंद ने अपने सांझा व्यान में कहा कि यदि सारे निर्णय जयराम सरकार को ही लेने हैं तो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट तुरंत प्रभाव से वंद कर देने चाहिए।176 कमिशन पास भाषा अध्यापकों को एस. एम. सी शिक्षकों के स्थान पर नियुक्ति नहीं देना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। हिमाचल प्रदेश की जनता जानती है कि 2555 एस. एम. सी शिक्षकों की भर्तीयां माननीय हाईकोर्ट ने 14-8-2020 को रद्द कर दी थीं। माननीय मुख्यमंत्री अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 24-11-2020 को अपना फैसला सुनाया कि 17-7-2012 की नोटिफिकेशन के तहत जो एम. एम. सी भर्तीयां जिस उद्देश्य पूर्ति के लिए की गईं थी, उस उदेश्य के लिए ठीक हैं। साथ ही कहा कि यह भर्तीयां तव तक ठीक हैं जव तक इन शिक्षकों के स्थान पर नियम, 2009 के तहत नियमित शिक्षक नहीं पहुंच जाते। ज्ञात रहे एस. एम. सी शिक्षकों की नियुक्तियां 17-7-2012 की नोटिफिकेशन के तहत स्टाप गैप अरेंजमैंट था। 17-7-2012 की नोटिफिकेशन की क्लाज नं 9 और 10 में साफ साफ कहा गया है कि एस. एम. सी शिक्षकों के स्थान पर हर शैक्षणिक सत्र के पश्चात नियमित शिक्षक भेजने होंगे। ज्ञात रहे 2555 नियमित शिक्षकों की भर्तीयों में एक भी भर्ती बैचवाईज नहीं हुई है जिससे प्रदेश के लाखों पात्र बेरोजगारों को रोजगार के समान अवसर नहीं मिले हैं। यदि जयराम सरकार 2555 शिक्षकों की भर्तीयों में एक भी भर्ती वैचवाईज नहीं करना चाहती है तो उसे प्रदेश के सभी रोजगार कार्यलय भी वंद कर देने चाहिए। 2555 नियमित शिक्षकों के पदों को छोड़कर प्रदेश के सभी लाखों पात्र उमीदवारों को रोजगार के समान अवसर मिल चुके हैं। इसलिए एस. एम. सी शिक्षकों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं हुआ है । नियमित शिक्षक वनने के लिए एस. एम. सी शिक्षकों को कमिशन पास करना अनिवार्य कर देना चाहिए ताकि भर्ती नियमों का उल्लंघन न हो। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2009 में शिक्षकों की भर्ती के लिए संबिधान की धारा 309 के अनुसार भर्ती नियम वनाए जिनके अनुसार नियमित शिक्षकों की भर्ती या तो कमिशन से हो सकती है या बैचवाईज प्रक्रिया के तहत हो सकती है। अब जयराम सरकार कह रही है कि वह 2555 एस. एम. सी शिक्षकों के स्थान पर नियमित शिक्षक नहीं भेजेगी।
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