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रविवार, 15 मई 2022

बागवानी विभाग की शिवा परियोजना पर किसान सभा ने उठाये सवाल पिछले छह माह से नहीं हो रहा है कोई काम,सिंचाई और मार्केटिंग सुविधा उपलब्ध कराने की उठी मांग

 बागवानी विभाग की शिवा परियोजना पर किसान सभा ने उठाये सवाल



पिछले छह माह से नहीं हो रहा है कोई काम,सिंचाई और मार्केटिंग सुविधा उपलब्ध कराने की उठी मांग


धर्मपुर विकास खण्ड में बागवानी विभाग की शिवा परियोजना के तहत लगाए जा रहे बगीचों का कार्य वर्तमान में रुक गया है।इस खंड में छह दर्ज़न गांवों में लोगों द्धारा अपनी भूमि पर अमरूद और अन्य फलदार पौधों के बगीचे लगाने के लिए अपनी सहमति दी है जिनमें से 51 गांवों में बगीचे लगाने का काम शुरू हो गया है।लेकिन पिछले छह महीने से बगीचे लगाने के काम में सुस्ती आई है जिससे इस परियोजना के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।हिमाचल किसान सभा डरवाड़ कमेटी के प्रधान मेहर सिंह पठानिया सचिव रणबीर शास्त्री, अशोक कुमार,सुरेंद्र पाल, बालकृष्ण रांगड्डा, रामस्वरूप, प्रेम सिंह, राजकुमार, यशवंत सिंह, राजेश कुमार, सुखराम, अनन्त राम, हँसराज, मांन सिंह, बीरबल सिंह, मोहान लाल, भाग सिंह, धर्मचंद, सागर चन्द, अच्छर सिंह, सुरेंद्र कुमार, चंदा सिंह,विजय कुमार रणजीत सिंह, रणवीर सिंह इत्यादि ने कहा कि उन्होंने पिछली बरसात के समय विभाग को डरवाड़ प्रथम में बगीचा लगाने का प्रस्ताव दिया था।इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने गाँव में आकर किसानों के साथ बैठक भी की थी और जल्दी ही भूमि का सर्वेक्षण करवा कर प्रस्तावित भूमि पर से पेड़ काटने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी।लेकिन अब छह महीने का लंबा समय गुज़र जाने के बाद भी कोई कार्यवाई नही हुई है जिससे किसानों के मन में इस योजना के बारे में शक पैदा हो गया है।उधर पूर्व ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने इस योजना के बारे में कहा कि अभी तक इस परियोजना के तहत लगाए गए 51 क्लस्टरों की लैंड प्रेप्रेशन और फैंसिंग पर 2करोड़ 30 लाख रुपये ख़र्च हो चुके हैं तथा बगीचों को पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत एक करोड़ ग्यारह लाख रुपये ख़र्च किये जा चुके हैं। भूपेंद्र सिंह ने बताया कि कुल लगाये गए बगीचों में से अभी केवल मात्र चार में ही पौधे तैयार हो पाये हैं और चार दर्ज़न बगीचों में केवल बाड़बंदी और पेड़ो का कटान ही हुआ है।उन्होंने बताया कि जब तक सभी बगीचों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं किया जाता है तब तक इस परियोजना के सफ़ल होने पर सवालिया निशान लगे हैं।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान में जलशक्ति मंत्री और बागवानी मंत्री धर्मपुर के ही विधायक बने हैं लेकिन चार माह बाद चुनावों के बाद क्या तस्वीर सामने आएगी इस बारे कई तरह की आशंकाएँ हैं।वर्त्तमान में जलशक्ति विभाग के मजदूरों को ही इन बगीचों में पानी सप्लाई करने के लिए लगाया गया है और पीने का पानी बगीचों को दिया जा रहा है।बाबजूद इसके अभी तक मात्र बगीचे में ही फ़ल आना शुरू हुए हैं लेकिन उन्हें बिक्री करने के लिए मार्किट की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है जिसके कारण किसानों को सड़क किनारे बैठकर और नज़दीकी स्थानीय मार्किट में अमरूद बेचना पड़ा था।भूपेंद्र सिंह और हिमाचल किसान सभा ने विभाग में मांग की है कि सभी बगीचों के लिए सिंचाई योजना बनाई जाये तथा पैदावार बिक्री करने के लिए सब्जी मंडी खोली जाये।उन्होंने इस योजना में भूमि समतलीकरण के काम को मनरेगा के साथ जोड़ कर करने की भी मांग उठाई है कियूंकि बहुत से परिवार स्वयं इस काम को करने में असमर्थ हैं।



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