चोलथरा सार्वजनिक शौचालय पर डेढ़ साल से लगा है ताला!
हररोज़ स्थानीय लोगों व आने जाने वालों को होती है दिक्कत
धर्मपुर उपमण्डल की चोलथरा ग्राम पंचायत में बना सार्वजनिक शौचालय पिछले डेढ़ साल से बन्द है जिसके चलते यहां आने जाने वाले लोगों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।लेकिन पँचायत प्रधान सरौंन द्धारा इस शौचालय पर लगाया गया ताला लंबे अरसे से जनता के लिए परेशानी बना हुआ है जिसे जिला परिषद सदस्य बन्दना गुलेरिया भी खुलवाने के लिए कोई कार्यवाई नहीं कर रही हैं जबकि ये प्रधान उसी का ख़ास समर्थक है।हिमाचल किसान सभा पँचायत कमेटी चोलथरा के प्रधान बलदेव ठाकुर सचिव करतार सिंह चौहान, केहर सिंह, अंनत राम, इंद्र सिंह परदेशी, शनवीर ठाकुर, रुपलाल शाष्त्री, श्रवण सिंह,हरजीत सिंह, कर्म सिंह, कशमीर सिंह, विजय कुमार,वचन सिंह, प्रकाश चन्द, रत्न सिंह,सतीश कुमार, गांधी राम, बौना राम, रमेश कुमार इत्यादि ने इस शौचालय पर लगे ताले को तुरंत खोलने की मांग की है। व्यापार मंडल चोलथरा के प्रधान व सदस्यों ने बताया कि उन्होंने गत वर्ष इस शौचालय को खोलने के लिए उपमंडलाधिकारी नागरिक सरकाघाट को माँगपत्र दिया था और इसकी सफ़ाई और रखरखाव करने की जिम्मेवारी लेने की भी बात कही थी लेकिन पँचायत प्रधान सरौंन इस शौचालय के ताले को नहीं खोल रहा है जिसकारण हररोज़ दर्ज़नों लोगों को परेशानी होती है और बहुत से लोग खुले में पेशाब करने के लिए मजबूर हैं।उधर पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने इसके लिए सीधे तौर पर सरौंन पँचायत के प्रधान व यहां की ज़िला पार्षद को जिम्मेदार ठहराया है।उन्होंने बताया कि तकनीकी रूप में ये शौचालय चोलथरा से टूट कर बनी नई ग्राम पंचायत सरौंन के क्षेत्र में है जबकि जब इसका निर्माण हुआ था तो इसे चोलथरा ग्राम पंचायत ने बनवाया था। लेकिन सरौंन पँचायत के प्रधान जो अपने आप को मंत्री का खास आदमी बताते हैं वे लोगों की सुविधा के लिए बने इस शौचालय पर डेढ़ साल से ताला लगाकर बैठे हैं।यही नहीं मंत्री की बेटी व ज़िला परिषद सदस्य का घर सौ मीटर की दूरी पर है वह भी इसे खुलवाने के लिए कोई पहल नहीं कर रही है जबकि वह अपने आप को धर्मपुर की सत्ता का दूसरा केंद्र बताती है। इसलिये सरकारी पैसे से बने शौचालय को गैरकानूनी तरीके से बन्द करने के लिए सरौंन पँचायत के प्रधान पर कार्यवाई होनी चाहिये।यही नहीं चोलथरा स्कूल ग्राउंड में हर पन्द्रह दिन में कोई न कोई सार्वजनिक प्रोग्राम होता रहता है जिसमें महिलाएं भाग लेती हैं लेक़िन यहां पर पेशाब करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि इन्ही दो पँचायत प्रतिनिधियों ने चोलथरा स्कूल के आंगन में विज्ञान प्रयोगशाला बना दी गयी जो वहां के बजाए साईड में बननी चाहिए थी।इसके अलावा चोलथरा के पटवार घर को यहाँ से बदलने और मिडिल स्कूल के भवन के स्थान पर सामुदायिक भवन बनाने का दबाब डाला जा रहा है।यही नहीं इन्होंने राष्ट्रीय उच्च मार्ग को भी अपने फायदे के लिए अपने घरों को बचाते हुए परिवर्तित करवाया है।इन सब कार्यों का क्षेत्र की जनता में भारी रोष व्याप्त है।

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