पूंजीपतियों को अमृत और जनता को जहर हैं सरकार की नीतियां-माकपा
अमृत महोत्सव मनाने के बहाने आज़ादी का झूठा श्रेय लेने की है कोशिश!
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी धर्मपुर लोकल कमेटी ने भाजपा सरकार द्धारा आज़ादी की 75वीं सालगिरह को अमृत महोत्सव के रूप में मनाने पर प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इस भाजपा की नीतियों को आमजनता औऱ देश के लिए ज़हर और उनके मित्र पूंजीपतियों के लिए अमृत बताया है।पार्टी के सचिव व पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह, सुरेश शर्मा, सुरेश राठौर, सुरेश शननी, मिलाप चन्देल, बाला राम,प्रकाश सकलानी,करतार सिंह, रामचन्द ठाकुर, रनताज राणा आदि ने कहा कि भाजपा सरकार ने आज़ादी के सत्तर साल में जो सार्वजनिक क्षेत्र के जरिये विकास किया था और राष्ट्रीय सम्पतियाँ खड़ी की थी उसे पिछले छह साल में अपने पूंजीपति दोस्तों को बेचने का काम किया है।जिसके चलते सरकार सब कुछ निजी हाथों को सौंपने का काम बड़ी तेज़ी से कर रही है।सरकार ने सभी प्रकार की नॉकरियाँ पार्ट टाइम वाली कर दी है और अब तो सेना में भी चार साल के लिए अग्निवीरों को रखा जा रहा है।जिसके चलते भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को सेना में भर्ती करके उन्हें प्रशिक्षित करने जा रही है जो आरएसएस के प्लान का हिस्सा है।भाजपा की केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को भी पूंजीपतियों के हवाले करने के उद्देश्य से काले कृषि क़ानून किसानों पर थोपने का काम कर दिया था लेकिन किसानों के विरोध के कारण उन्हें वापिस करना पड़ा है।इसी तर्ज़ पर मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा करने वाले श्रम कानूनों को भी बदला जा रहा है।इस सरकार ने नई शिक्षा नीति लाकर शिक्षा का भगवाकरण किया जा रहा है और हमारे इतिहास को बदला जा रहा है और उसके जरिये ज़हर घोलने का काम किया जा रहा है।यही नहीं यह सरकार सँविधान के मूल प्रावधानों को भी बदल रही है और जितने भी ससंस्थान देश में हैं उनका राजनैतिक लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।जिसके चलते चुनाव आयोग, रिज़र्व बैकं,आई बी सीबीआई,ईडी,न्यायपालिका इत्यादि संस्थानों को भाजपा के प्रकोष्ठ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।देश की सामूहिक सांस्कृतिक विरासत को तोड़ने का काम ये सरकार लगातार कर रही है और आपसी भाईचारे को तहस नहस करने का काम कर रही है।जैसा कि सबको मालूम है कि जनसंघ और आर आर एस ने आज़ादी के संग्राम में अग्रजों के साथ दोस्ती की हुई थी और माफ़ी मांगी थी लेकिन आज आज़ादी की 75वें साल में इसे आज़ादी का अमृत महोत्सव बता कर मनाया जा रहा है और आज़ादी का झूठा श्रेय लेने का अभियान चलाया जा रहा है।जिसकी माकपा निंदा करती है और इतिहास को गलत तरीके से पेश करके अपने पक्ष में करने की ओछी चाल करार देती है।माकपा ने आज़ादी के 75वें वर्ष में देश की संप्रभुता के लिए भाजपा द्धारा पेश की गई चुनौती का मुकाबला करने की अपील जनता से की है।

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