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गुरुवार, 1 सितंबर 2022

विष्वविद्यालय उसी आड़ में षिक्षकों की भर्तियों में ताबड़तोड़ फर्जी भर्तियां चल रही थी और किसी को भी , समझ नहीं आ रहा थो कि इस फर्जीवाड़े को कैसे रोका जाए।( षिक्षक, छात्र व कर्मचारी संगठनों)

  विष्वविद्यालय उसी आड़ में षिक्षकों की भर्तियों में ताबड़तोड़ फर्जी भर्तियां चल रही थी और किसी को भी , समझ नहीं आ रहा थो कि इस फर्जीवाड़े को कैसे रोका जाए।



BHK NEWS HIMACHAL: वास्तव में आज की प्रैस वार्ता एक लम्बे अंतराल के बाद हम एक विषेड मुददे को लेकर कर रहे हैं जिसमें हमें पूर्ण विष्वास है कि सभी मिडिया के लोगों इसमें सहयोग करेंगें।


पिछले करीब दो सालों से जब देष कोरोना महामारी की मार से देष उबरने की कोषिष कर रहा था तो उस वक्त हिमाचल प्रदेष विष्वविद्यालय उसी आड़ में षिक्षकों की भर्तियों में ताबड़तोड़ फर्जी भर्तियां चल रही थी और किसी को भी ( षिक्षक, छात्र व कर्मचारी संगठनों), समझ नहीं आ रहा थो कि इस फर्जीवाड़े को कैसे रोका जाए। एस0एफ0आई0 का मानना है कि पूर्व कुलपति ने करीब 280 षिक्षकों की भर्तियां अपने कार्यकाल बड़ी जल्दवाजी में की हैं जो संदेह के घेरे में हैं और वर्तमान कार्यवाहक कुलपति सतपाल वंसल उन धांधलियों को निरंतर जारी रखे हुए है और सहयोग दे रहें प्रति कुलपति जो वि०वि० अनूदान आयोग के नियमों के अनुसार अयोग्य हैं।


एस०एफ०आई० ने सूचना के अधिकार के माध्यम से करीब 145 चयनित षिक्षकों (Assistant Professors Associate Professors and Professors) का रिकार्ड मांगा जो विष्वविद्यायल के जनसूचना अधिकारी ने समय पर नहीं दिया फिर अधिनियम के अंतर्गत पहली अपील की गई तब भी सूचना नहीं दी गई और दूसरी अपील में राज्य सूचना आयोग में अपील करने के बाद हमें सूचना दी गई जो करीब 13000 पनों की है और इसके लिए विष्वविद्यालय के जागरूक छात्रों, कर्मचारियों और षिक्षकों के सहयोग से रू0 26000/- को एकत्र करने में भरपूर सहयोग रहा है जिसके लिए हम धन्यावाद करते है।


सूचना के अधिकार के तहत जुटाई गई 13000 पृष्टों की सूचना के आधार पर हम ने एस0एफ0आई0 के पूर्व कार्यकर्तायों और बकीलों की मदद से यू०जी०सी० कुछ चुनिदा मानकों पर छानबीन की जिसमें:


1. विष्वविद्यालय अनूदान आयोग (विष्वविद्यालय और ममाविद्यालयों में षिक्षकों और अन्य पैक्षिक कर्मचारियों की नियूक्ति हेतू न्यूनतम अर्हता तथा उच्चतर षिक्षा में मानकों के रखरखव हेतू अन्य उपाय संवेधी) विनियम, 2018.


[Ugc Regulations On Minimum Qualifications For Appointment Of Teachers And Other Academic Staff In Universities And Colleges And Other Measures For


The Maintenance Of Standards In Higher Education, 2018]


12. विष्वविद्यालय अनूदान आयोग (एम० फिल० / पी०एच०डी० उपाधि के लिए न्यूनतम मानक एवं प्रक्रिया) विनियम, 2009 [UGC (MINIMUM STANDARDS AND PROCEDURE FOR AWARDS OF M.PHIL. / PHD. DEGREE), REGULATION, 2009/2016.


3. विष्वविद्यालय अनूदान आयोग (उच्चतर षिक्षा संस्थानों में अकादमिक सत्यनिष्ठा एवं साहित्यिक चोरी की रोथाम को प्रोत्साहन ) विनियम, 2018 [UNIVERSITY GRANTS COMMISSION (PROMOTION DIF ACADEMIC INTEGRITY AND PREVENTION OF PLAGIARISM IN


HIGHER EDUCATIONAL INSTITUTIONS) REGULATIONS. 2018]



विष्वविद्यालय आरक्षण निति व प्रक्रिया

 BHK NEWS HIMACHAL: हिमाचल प्रदेष विष्वविद्यालय अधिनियम 1971 और विष्वविद्यालय के अध्यादेष


आर0टी0आई0 के अन्दर जुटाई गई 145 चयनित सहायक- आचार्यों, सह- आचार्यों और आचार्यों के कागजातों की अपरलिखित नियमों के आधार पर छानबीन करने के बाद हम यह कह सकते हैं कि इन षिक्षकों भर्तियों में जमक फर्जीवाड़ा हुआ है और खुलकर भ्रष्टाचार किया गया है, जिसमें करीब 70 प्रतिषत अयोग्य लोगों की भर्ती की गई है। हालांकि यह फर्जीवाड़ा बढ़ा बृहद है जिसे संक्षेप में एस०एस०आई० तमाम बिदुओं को आपके समक्ष रखना चाहती है।


चयनित षिक्षकों को पोर्टलिस्ट / स्क्रीनिंग करने में धांधली


• जाली तरीके से प्रकाषित षोध पत्रों यू०जी०सी० सूची या पीयर रिव्यूड नहीं है को भी अंक देना ।

 • International Journal of Analytical and Experimental Model Analysis, Vol. XII, Issue 1 Jan 2020. Single author. 5 research papers in same issue & same journal.


• आवेदन फार्म में ही दिषानिर्देष दिए हैं कि जिस पेपर का प्उचंबज बिजवत समें जींद 1 होगा उस के 10 अंक होंगे और संयुक्त लेखकों के मामले में अंकों का बंटवारा होगा। लेकिन तीन लेखकों द्वारा लिखें गए षोध - पत्र में कुल 10 अंक के मुकाबले 12.6 अंक एक को ही दे दिए गए हैं।


• ऐसे षिक्षकों का चयन किया गया है जिनकी पी०एच०डी० की डिग्री यू०जी०सी० के रेगूलेषन 2009 व 2016 के अनूरूप ही नहीं है। मतलब जब तक उन षिक्षकों ने डिग्री मुक्कमल की उन्होंने एक भी षोध-पत्र प्रकाषित नहीं किया। जबकि रेगूलेषन में दो षोध पत्रों के प्रकाषन की षर्त है के साथ चार अन्य पर्ते भी हैं। 

[1. The Ph.D. degree of the candidate has been awarded in a regular mode: 2. The Ph.D. thesis has been evaluated by at least


two external examiners; 3. An open Ph.D. viva voce of the candidate has been conducted: 4. The Candidate has published two research papers from his/her Ph.D. work, out of which at least one is in a refereed journal; and 5. The candidate has presented at least two papers based on his/her Ph.D. work in conferences/seminars sponsored/funded/supported by the UGC/ICSSR/ CSIR or any similar agency. The fulfilment of these conditions is to be certified by the Registrar or the Dean (Academic Affairs) of the University concerned.]


हम क्यों कह रहें हैं यह फर्जी है?


छतमहनसंजपवद 2018 जिसमें पात्रता का जिक है साफ षब्दों में कहता है कि केवल वही पी० एच० डी०,


NET से exempted होगी जो UGC regulation -2009/2016 के अनूरूप अवार्ड होगी।


• जो पी० एच० डी० UGC regulation - 2009 / 2016 के अनूरूप अवार्ड होगी तो भले ही उम्मीदवार NET qualified है तो उसे shortlisting के समय 30 अंक कैसे मिल सकते हैं?


• जो उम्मीदवार NET भी नहीं है और उसकी पी० एच० डी० UGC regulation - 2009/2016 के अनुरूप भी अवार्ड


नही है उनको सह आचार्य के लिए चयन किया गया है। और यही नहीं विष्वविद्यालय के अधिष्ठाता अध्ययन षरेआम नियमों को ताक पर रख कर NET Exemption प्रमाण-पत्र जारी कर रहा है जबकि आर0टी0आई0 के तहत जुटाई गई सूचना में साफ है कि उम्मीदवार वा


जरूरी पांच षतें पूरी नही कर रहा है।

BHK NEWS HIMACHAL: 

• कई षिक्षक अपने जो अनूभव माचमतपमदबम का प्रमाण-पत्र दे रहें हैं जिसके लिए 10 अंक हैं सहायक आचार्य के लिए और 8 और 10 सालों की जरूरी पर्त है सहायक आचार्यों व आचार्यों के लिए।


• चयनित उम्मीदवार एक तरफ यह बता रहें हैं कि उन्होनें पी०एच०डी० रेगूलर मोड से हासिल की और उस समय का वो अपना अध्यापन का अनुभव का प्रमाण पत्र भी दिखा रहें हैं। या तो अनुभव फर्जी है या डिग्री ? • जो अनुभव संस्थान जारी कर रहें हैं कोई वेतन की पर्ची Pay Slips या वितीय प्रमाण कुछ नहीं दिखाया गया है।


सिर्फ एक कोरे कागज पर चार लाइनों का प्रमाण पत्र दे रहें हैं जो प्रथम दृष्टि में फर्जी लगता है। ये अनुभव (Experience) के प्रमाण-पत्र हैं अपने आप में विरोधाभासी है कि उम्मीदवार ने जिस साल अपनी नियुक्ति जिस पद पर बताई है उस समय उसके पास विष्वविद्यालय मानकों के अनुसार योग्यता ही नहीं थी तो कैसे उसका अनुभव मान्य हो सकता था।


उदाहरण- उम्मीदवार सह आचार्य यानि Associate Professor के लिए आवेदन कर रहा है जिसमें यू०जी०सी० नियमों के अनुसार 8 वर्षो का अनुभव चाहिए। अब उम्मीदवार के वैक्षणिक योग्यता के प्रमाण पत्रों के मुताबिक 2004 में master degree हो रही है और 2014 में पी०एच०डी० और उम्मीदवार कहता कि वो निजि संस्थान में 2006 में बतौर सह-आचार्य (Assistant Professor) कार्य कर रहा हूं। लेकिन यहां नियम के मुताबिक वो 2015 में योग्य हुआ है सह-आचार्य (Assistant Professor) के पद के लिए तो इस प्रकार 2015 से 2021 उसके पास तो 8 के मुकाबले सिर्फ 6 वर्गों का अनुभव का ही अनुभव हुआ, फिर कमेटी ने उसको सह आचार्य यानि Associate Professor के लिए कैसे योग्य कर दिया। बहुत ही गम्भीर सवाल है!


इसमें भी कई उम्मीदवार है जो अपने अनुभव में Assistant Professor Associate Professor Professor. HOD इत्यादि अनुभवों का जिक कर रहें हैं लेकिन कोई विज्ञापन, साक्षात्कार, नियक्ति पत्र या पे स्लिप का सबूत नहीं दिया है।


English, Hindi, Microbiology, Bio-Sciences. Chemistry, Laws. Mathematics, Journalism and Mass Communication,


Sociology. Political Sciences etc.


नियमों के खिलाफ आचार्यों (Professors) के पदों को एक विभाग से दूसरे में ले जाना


• बायोटेक्नोलॉजी विभाग से गैर-कानूनी तरीके से आचार्य का एक पद जो पहले विज्ञाप्ति था उसे अपने चहेतों की भर्ती के लिए षारीरिक षिक्षा विभाग में ले जाना ।


संबंधित विभाग के लिखित आपति के बाबजूद ।


आरक्षण निति के खिलाफ


• भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ क्यों कि यह सीट पहले से एक विभाग में विज्ञापित थी जिसके लिए आवेदन मांगे जा चुके थे अन्तिम तारीख हो चुकी थी।


• किसी भी विभाग में नई सीट आती है तो नए सिरे से विज्ञाप्ति होती है जिसे लिए नए उम्मीदवार भी आवेदन करते है।


अति महत्वपूर्णः यहां ये फजीवाड़ा करते हैं डीन कमेटी के माध्यम से, यह कमेटी दरअसल अकादमिक परिहृद् की स्टैंडिंग कमेटी है ताकि यह सम्भव नहीं है हि बार 2 अकादमिक परिवद मिल सके जिसमें 150 से ज्यादा सदस्य होते है तो आपालकाल और जरूरी समय में 10-12 अधिष्ठाताओं की यह डीन कमेटी होती है जिसके फैसले अंतिम नहीं होते बल्कि आगामी अकादमिक परिङ्कद की बैठक में पारित किए जाते हैं। बड़ी हैरानी की बात है कि 2018 के बाद अभी तक पूर्ण अकादमिक परिहृद की बैठक पांच सालों से नहीं हुई हैं।


हर फर्जी, भ्रष्ट निणर्य इस कमेटी के माध्यम से ले कर सीधे कार्यकारी परिहृद पास किए जा रहे है जो नियमों बिल्कुल खिलाफ है।



 BHK NEWS HIMACHAL: आचार्य (Professor) के पद को एक विभाग से दूसरे में ले जाने का सिलसिला डॉ० सतपाल बंसल ने भी जारी रखा है।


एक आचार्य की सीट उसी तरीके से सम्बन्धित विभाग की सहमति के बिना भन्दै से प्टै को ले गए हैं जो बिल्कुल नियमों के खिलाफ है। जिसे तुरन्त रोकना चाहिए


सूचना के अधिकार के तहत जुटाई गई जानकारी के मुताबिक HPUBS की विभागीय अकादमिक कमेटी से कोई भी चर्चा नहीं की गई। जबकि जब भी कोई सीट सृजित होती है तो कामकाज के भार के आधार पर संबंधित विभाग से हर तरह से प्रस्ताव तैयार होता है।


आर्थिक आधार पर कमजोर (EWS) और ओ०बी०सी० के प्रमाण-पत्र के फर्जी होने का संदेह:


कुछेक चयनित षिक्षकों के कागजात के छानबीन के बाद ये पता चलता है कि इन्हें यह प्रमाण पत्र गलत तरीके से जारी किये गए हैं जिससे योग्य उम्मीदवार के हक को छीना है।


उदाहरण: इस वर्ग में चयनित षिक्षक लिखित में दे रहें है कि आवेदन करने तक वो किसी अन्य संस्थान में बतौर सह आचार्य नियमित रूप से 15600-39100 6000 पर पिछले 7-8 सालों से कार्यरत था तो उनकों इन वर्गों के प्रमाण-पत्र कैसे जारी किए जा सकते है। गहन छानबीन का मुद्दा है।


हिमाचल प्रदेष में * प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए पात्रता है।


उसके या उसके परिवार के पास निम्नलिखित में से कोई भी संपति नहीं है: 1. ग्रामीण क्षेत्रों में एक हेक्टयर से अधिक कृड्डि भुमि और षहरी क्षेत्रों में 500 स्केयर मीटर भूमि, 2. ग्रामीण व ष्षहरी क्षेत्रों में 2500 वर्ग फीट से अधिक का आवासीय फलैट / घर 3. आयकर दाता का परिवार 4. केंद्र सरकार, राज्य सरकार, बोर्ड, निगमों और स्वायत निकायों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम आदि के नियमित / संविदा कर्मचारी का परिवार ।


जीव-विज्ञान, लोक प्रषासन, षारीरिक षिक्षा, सस्कृत इत्यादि इसके तहत संदेह के घेरे में हैं।


षिक्षकों के नियुक्ति कार्यकारी परिहृद के द्वारा होती है लेकिन कुलपति ने गैर-कानूनी तरीके से व्यक्तिगत रूप से इस का दुरूपयोग किया है।


ई०सी० की बैठक में यथा प्रस्तावित मद के माध्यम से षिक्षकों के साक्षात्कार के परिणाम उसी दिन घाडित करने की अनुमति ले ली। जबकि अतिमहत्वपूर्ण मद को उचित रूप से चर्चा के बाद ही एक निर्णय पर पहुचना चाहिए।


यह सिर्फ इसलिए किया गया ताकि कुलपति के फर्जीवाड़े के खिलाफ किसी उम्मीदवार को न्याययिक प्रक्रिया में जाने


का समय न मिल सके।


न में न्युक्तियों में धाधलियां


UIIT में ऐसे षिक्षकों का चयन किया गया है जिनका टेलीषीट में अकादमिक स्कोर 100 में से केवल 30, 32 और 40 ही है और दूसरी तरफ प्रतिभाषाली और अनुभवी उम्मीदवारों की अनदेखी की गई है।


LIIT की कार्यप्रणाली प्रषासनिक और वितीय नियमों के खिलाफ निरन्तर कार्यवाही को निरन्तर बढ़ावा दे रहा है। उदाहरण कई प्रकार के षिक्षकों और गैर- षिक्षकों के पदों का सृजन सीधी ही अपने विभाग के अकादमिक कमेटी में फैसले के बाद बोर्ड ऑफ स्टडी, अकादमिक परिवद को अनदेखा कर सीधे ई०सी० में ले जा कर चालवाजी से निर्णय ले रहे हैं।



BHK NEWS HIMACHAL: क्योंकि इसके निदेषक वही भ्रष्ट प्रवृति के षिक्षक है जिन्होंने अपने बेटे की विना परीक्षा से पी०एच०डी० में प्रवेष करवाया है।


मेधावी उम्मीदवारों की उपेक्षा


इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में परेआम मेधावी उम्मीदवारों की अनदेखी हुई हैं और उन्हें हतात्साहित किया गया है। पहले


भर्ती प्रक्रिया में अंतिम चयन में 80 और 20 अंकों का बंटवारा होता था और फायनल मेरिट में 80 अंक अकादमिक,


अनुभव और प्रकाषन इत्यादि के और 20 अंक साक्षात्कार के होते थे। लेकिन इस बार परेआम भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया गया और 100 प्रतिषत साक्षात्कार के आधार पर चयन किया गया। अकादमिक अनुभव और प्रकाषन के अंकों को फाइनल चयन के लिए कोई तरजीह नहीं दी गई है। इसी लिए 86 से 96 अंकों वाले उम्मीदवारों को दरकिनार कर 50 और 60 फर्जी अनुभवों और प्रकाषन वालों का चयन


किया गया गया है।


इन तमाम धांधलियों के मध्यनजर एस०एस०आई० की मांग है कि अभी जो भर्ती प्रक्रिया कार्यवाहक कुलपति जारी रखे हुए है तुरन्त रोक लगनी चाहिए और अभी तक की भर्तियों की एक निष्पक्ष जांच माननीय उच्च न्यायालय के जज के द्वारा निम्न बिंदुओं पर हानी होनी चाहिए। जिसमें


चयनित षिक्षकः जो चयनित षिक्षक द्वारा झुठे और भ्रमित कागजात तैयार कर आवेदन किया गया।


अधिष्ठाता अध्ययनः जो षिक्षक है उसके पास कुछ षोध-पत्र के प्रकाषन का रिकार्ड ही नहीं है तो NET Exemption का


प्रमाण-पत्र कैसे जारी किया गया।


स्क्रीनिंग कमेटी: आवेदन के बाद सबसे पहले सकीनिंग कमेटी आवेदक के कागजातों की जांच पड़ताल करती है कि वो तमाम नियमों के अनुरूप है कि नहीं तो कैसे उस कमेटी द्वारा अपात्र उम्मीदवारों को shortlist किया गया?


फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र जारी करने वाले संस्थानः उन सभी संस्थानों के वितीय लेखा जोखों की कर जमा करने, वेतन जारी करने, सरकार के खाते में आयकर जमा करने इत्यादि की छानबीन जरूरी है जो एक सादे कागज पर अनुभव हर किसी को अनुभव देकर पूरी भर्ती प्रक्रिया में इमानदार उम्मीदवार के साथ धोखा करते हैं।


उनसे यह देखना चाहिए कि उक्त उम्मीदवार का चयन किस विज्ञापन के बाद किया? कब साक्षात्कार हुआ? यू0जी0सी0 के किन नियमों का पालन किया? क्योंकि यह नहीं है कि केवल उम्मीदवार Graduate or Post Graduate है और आपने नियमों के खिलाफ सह और सहायक आचार्य लगा दिया। फिर यू०जी०सी० के नियमों के अनुसार उन्हे वेतन दिया गया इसका प्रमाण तो उन निजी संस्थानों को सम्बंधित उम्मीदवार के हिस्से से आयकर जमा करने के प्रमाण को देना होगा।


विभिन्न वर्गों के प्रमाण-पत्र जारी करने वाले अधिकारियों की जांच: सभी प्रकार के प्रमाण पत्रों को जारी करने के लिए एक निष्चित योग्यता है चाहे EWS हो या OBC जिस प्रकार के सवाल इन पर खड़े होते है यह अति गम्भीर है की सरकारी क्षेत्र में कैसे यह धाधलियां हो रही है।


वि०वि० की डीन कमेटी: जो भ्रष्टाचार से ओत प्रोत निर्णय होते है षुरू होते हैं डीन कमेटी से जिसमें अति से अति भ्रष्टाचारी व्यक्ति हैं जैसे अरविन्द भटट् (जिसने अपनी बेटी को विना परीक्षा पी०एच०डी० में प्रवेष फिर एक कालेज में सहायक आचार्य और अब अपना 20-22 साल पुराना को अनुभव जोड़ने का षड़यंत्र), पी०एल० षर्मा (हू ब हू कारनामें जैसे भट्ट के हैं) इत्यादि । क्यों



BHK NEWS HIMACHAL: विना सम्बंधित विभाग को पूछे विना बायोटेक्नॉलाजी विभाग से एक प्रौफसर की सीट षारीरिक षिक्षा विभाग में नियमों के खिलाफ ले गए और नियमों के खिलाफ उसे भर भी दिया। RTI से प्राप्त जानकारी में आया कि बायोटेक्नॉलाजी विभाग ने लिखित विरोध के बावजूद उस सीट को वापिस नही किया गया।


कहानी यहीं नही रूकती है यह डीन कमेटी फिर एक और प्रौफसर की सीट को HPUUBS से IVS यानि MT में जतंदेमित के लिए प्रस्तावित करती है जिसे भरने के लिए प्रक्रिया जारी है RTI से प्राप्त जानकारी में पाया गया है कि इसके बारे में से कोई चर्चा नहीं की गई है।


इन तमाम धांधलियों को अंजाम दिया है सिंकदर कुमार ने बतौर कुलपति जो वर्तमान में राज्यसभा के सांसद हैं तथा इसे जारी रखा रखा हुआ है सतपाल बंसल ने जो कार्यवाहक कुलपति है जिन्होंने केन्द्रीय विष्वविद्यालय धर्मषाला की साख तो खत्म की ही और अब हिमाचल प्रदेष विष्वविद्यालय को बर्बाद कर रहे हैं।


सहयोग में है ज्योति प्रकाष जो प्रतिकुलपति के लिए भी आयोग्य है और अपने पद का दुरूपयोग करते हुए नियमों के खिलाफ 1996-99 तक की अपनी सेवाओं को अपने अनुभव में जोड़ रहें हैं, ताकि कुलपति के लिए आवष्यक सेवा पर्त पूरी कर सकें।


एस० एस० आई० मांग करती है:


• वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगे ।


वि० वि० के भ्रष्ट अफसरों को पद से हटाया जाए जिसमें ज्योतिप्रकाष (Pra-VC) नागेष (Member EC). अरबिंद भटट (Dean Planning)] कलभुङ्कण चंदेल (Dean of Studies), पवन गर्गा (Dean & Director). पी०एल० षर्मा (Director) Most Corrupt Officers of the University


• अभी तक जो नियमों को ताक पर रखकर 260 से भी ज्यादा षिक्षकों की भर्तिया हो चुकी है 2020 से अब तक की जांज के लिए माननीय उच्च न्यायालय के बरिष्ठ न्याधीष की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाए, ताकि देष व प्रदेष में विष्वविद्यालय के षिक्षक भर्ती का घोटाले का पर्दाफाष हो से और कानून का षासन स्थापित हो सके।


हम तमाक षिक्षक हपुटा और हपुटवा, गैर- षिक्षक और छात्र संगठनों से भी अपील करना चाहते है कि इस भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ एक जुट हो ताकि देष व प्रदेष के लाखों करोड़ो बेरोजगार युवाओं के देष की कानून और नियमों पर भरोसा बने।


एस०एफ०आई० ने पहले भी कई घोटालों का पर्दाफाष किया है और प्रदेष विष्वविद्यालय के वर्तमान षिक्षक घोटाले का भड़ाफोड़ करने के लिए एक सषक्त आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी और फिर से आपके रूबरू होंगे।



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