मनरेगा मज़दूरों को मिला काम,यूनियन ने करवाया था सामूहिक आवेदन
जनरल हैड के कामों भी मनरेगा मज़दूरों को लगाने की उठायी मांग
धर्मपुर विकास खण्ड में सीटू से सबंधित मनरेगा मज़दूर यूनियन ने गत 30 जनवरी को बीडीओ धर्मपुर कार्यालय में 2304 मनरेगा मजदूरों के सामूहिक आवेदन करवाये थे जो जोढन,सजाओपीपलु, पिपली भराड़ी, डरवाड़,घरवासड्डा, सरी, बिंगा, सिद्धपुर, ततोहली, रोसो, सधोट,चोलथरा, सरौन, गरयोह, कोट, दतवाड, सोहर, कोठुहुवाँ आदि 16 ग्राम पंचायतों से सबंधित थे। बीडीओ धर्मपुर ने इन सभी आवेदनों को सबंधित पंचायतों के भेज दिया था और उन्हें 15 दिनों में काम देने के लिए निर्देश दिये थे।मामला मीडिया में आने पर मनरेगा लोकपाल मंडी राकेश कपूर ने भी इसका संज्ञान लिया और वे स्वयं सबंधित ग्राम पंचायतों में जा कर मज़दूरों और पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों से इस बारे चर्चा की थी और पात्र महदूरों को रोज़गार देने के निर्देश जारी किए थे औऱ ये भी कहा था कि अगर 15 दिनों में इन सब मज़दूरों को काम नहीं मिला तो वे बेरोज़गारी भत्ते के हक़दार हो जायेंगे।इसके बाद कुछ पंचायतों ने पिछले सप्ताह ही काम शुरू करवा दिये थे और आज से शेष सभी मज़दूरों को काम उपलब्ध कराने के लिए मस्ट्रोल शुरू हो गये हैं।यूनियन के खंड अध्यक्ष करतार सिंह चौहान, कीर्णवाला शर्मा, पूजा देवी, मंजू देवी, अति देवी, शारदा सकलानी, शांता पठानिया, अन्नू देवी, सुनीता पठानिया, उर्मिला, सुमना, वीना, सरोजनी,अरुणा, आशा, नीलम, रीतू देवी, रोहिणी देवी, निशा भनवाल ,शोमा देवी, माया देवी, गोमा देवी, रीना, मीना देवी,हिमा, पुष्पलता,जमीला, रजनी,स्नेहलता, सीमा, रीना, नरेश कुमारी, राजकुमारी, सीमा इत्यादि ने काम मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की है और इसे यूनियन की जीत बताया है।उधर यूनियन के राज्य महासचिव और पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने कहा कि यूनियन अगले वित्त वर्ष में शुरू में ही मज़दूरों के लिखित में आवेदन करवायेगी ताकि मजदूरों को 120 दिनों का पूरा काम मिल सके।उन्होंने बताया कि पंचायतों में मनरेगा के अलावा जनरल हैड, वित्तायोग,ज़िला परिषद, पँचायत समिति, विधायक व सांसद निधि के काम भी होते हैं लेकिन उनमें मनरेगा मज़दूरों को काम पर नहीं लगाया जाता है और ये काम ठेकेदारों के माध्यम से करवाये जाते हैं। जिसका यूनियन विरोध करती है और मांग करती है कि ये सभी काम जॉब कार्ड धारक मनरेगा मज़दूरों से ही करवाये जायें।इसके अलावा लोकनिर्माण, कृषि और बागवानी विभागों के काम भी मनरेगा के साथ जोड़ कर करवाये जा सकते हैं लेकिन इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है जिससे मज़दूरों को ज़्यादा दिनों का काम भी मिल सकता है और यही नहीं मनरेगा के अतिरिक्त अन्य मद्दों के काम करने पर मज़दूरों को सरकार की निर्धारित 350 रु मज़दूरी भी मिलेगी।इसलिये सरकार को सभी विभागों को निर्देश जारी करने चाहिये कि वे अपने विभागीय कार्य मनरेगा मज़दूरों से ही करवायें और ठेकेदारों से न करवायें।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ कर्मचारी और पँचायत प्रतिनिधि उन मज़दूरों पर दबाब डाल रहे हैं और धमका रहे हैं तथा उन्हें जानबूझकर दूर वाले वार्ड में भेज रहे हैं जिन्होंने लिखित में बीडीओ से काम मांगा था। यूनियन ऐसे कर्मचारियों और प्रतिनिधियों का भी विरोध करेगी।






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