100% किसानो को सर्कल रेट मंजूर नहीं, बल्ह की भूमि बहुत जयादा उपजाऊ है। इसलिए एअरपोर्ट हेतु वैकल्पिक स्थान जाहू में बनाया जाये: अध्यक्ष, प्रेमदास चौधरी
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यादविंदर कुमार नेरचौक:- सामाजिक प्रभाव की रिपोर्ट के अनुसार 100% किसानो को सर्कल रेट मंजूर नहीं, बल्ह की भूमि बहुत जयादा उपजाऊ है। इसलिए एअरपोर्ट हेतु वैकल्पिक स्थान जाहू में बनाया जाये: अध्यक्ष, प्रेमदास चौधरी
आज दिंनाक 11 मार्च को बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष, प्रेमदास चौधरी ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए कहा कि हाल ही में सामाजिक मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर यह बात स्पष्ट हो गई कि समिति पिछले 5 बर्षो से पूर्व जयराम सरकार को बार बार आग्रह करने के बाबजूद की वह अपने ड्रीम एअरपोर्ट को गैर उपजाऊ जमीन पर बनाए और अब रिपोर्ट के अनुसार हवाई परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश के मंडी/हमीरपुर के बीच वैकल्पिक भूमि जाहू को उपयुक्त माना गया है जो की तीन जिलो मंडी ,बिलासपुर और हमीरपुर को जोड़ता है और वहां पर ज्यादातर भूमि बंजर और कम उपजाऊ है। जिसमें 80% भूमि सरकारी व 20% भूमि निजी है और बल्ह की तुलना में भूमि अधिग्रहण से बहुत कम लोगो का बिस्थापन होगा, इसलिए एस आर एशिया टीम ने सुझाव दिया है कि जाहू में तकनिकी सर्वे के आधार पर प्रस्ताबित हवाई अड्डे को वैकल्पिक स्थान जाहू में बनाया जाये I
सचिव, नन्द लाल वर्मा ने कहा कि सामाजिक सर्वे के आधार पर 100% लोगो ने जमीन के सर्कल रेट को नकारते हुये बाजार भाव के आधार पर अपनी भूमि देने की शर्त रखी है जबकि प्रचार किया जा रहा है कि जयादातर लोग अपनी जमीन देने के लिए सहमत हो गए हैं जो सरासर झूठ है और दूसरी तरफ रिपोर्ट के अनुसार 88% किसानो ने शर्त रखी है कि बल्ह जैसी उपजाऊ जमीन दी जाये तभी वह अपनी जमीन देंगे इसके इलाबा 70% किसानों ने रोजगार की सर्त रखी है और रिपोर्ट के अनुसार 100% किसान सर्कल रेट का बहुत ही कम होना ब उससे आने बाले दिनों में जमीन ब मकान से विस्थापन होने का डर सता रहा है। उलटे बेरोजगारी ब बाढ़ का दंश झेलना पड़ेगा, सर्वे रिपोर्ट ने यह भी माना है की प्रस्ताबित जमीन पर हवाई अड्डे के निर्माण से कृषि/सब्जी उत्पादन में भारी नुकसान हो जायेगा जिसके कारण किसान बेरोजगार हो जायेंगे, रिपोर्ट ने माना है कि बल्ह इलाका सब्जी उत्पादन में मिनी पंजाब माना जाता है और हवाई अड्डे के निर्माण से सब्जी उत्पादन का नुकसान होगा और इससे किसानों की आर्थिक , सामाजिक, मानसिक स्थिति को बुरी तरह से प्रभाबित करेगा ।जबकि अपनी उपजाऊ जमीन पर 3 नकदी फसले उगा कर 75% किसान 2-3 लाख सालाना एक बीघे से कमा रहे हैं और वह अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं,और उससे वह बंचित हो जायेंगे I
अध्यक्ष, जोगिन्दर वालिया ने कहा कि एअरपोर्ट अथॉरिटी ने प्रस्ताबित एअरपोर्ट की रिपोर्ट को आधा अधुरा बता कर उसे 31 मार्च 2023 तक दुरुस्त करने को कहा है, समिति का कहना है कि जब अभी तक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) आधी अधूरी थी तो सामाजिक मूल्यांकन का कोई औचित्य नहीं है और आम जनता का मजाक बनाया जा रहा है। दूसरी तरफ हाल ही में सरकार ने धर्मशाला के प्रस्ताबित एअरपोर्ट के 15 किलोमीटर के दाएरे में अब कोई नया निर्माण बिना एअरपोर्ट ऑथोरिटी की मंजूरी से नहीं किया जा सकता ।इसका मतलब साफ है की बल्ह के दायरे में भी मंडी ब सुंदरनगर तक आम लोगो को भवन निर्माण में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। दूसरी तरफ बल्ह बाढ़ क्षेत्र के कारण एअरपोर्ट के बाहरी क्षेर्त्रो में जल भराव का हमेशा डर रहेगा कयोंकि प्रस्तावित हवाई अड्डा 25-30 फुट ऊँचा बनाया जायेगा I
बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति, माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर ठाकुर जी से आग्रह करती है कि हवाई अड्डे को गैर उपजाऊ जमीन पर बनाया जाया जाया और बल्ह की उपजाऊ जमीन को हर हालत में बचाया जा सके I
सचिव
नन्द लाल वर्मा
बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति।
आज दिंनाक 11 मार्च को बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष, प्रेमदास चौधरी ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए कहा कि हाल ही में सामाजिक मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर यह बात स्पष्ट हो गई कि समिति पिछले 5 बर्षो से पूर्व जयराम सरकार को बार बार आग्रह करने के बाबजूद की वह अपने ड्रीम एअरपोर्ट को गैर उपजाऊ जमीन पर बनाए और अब रिपोर्ट के अनुसार हवाई परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश के मंडी/हमीरपुर के बीच वैकल्पिक भूमि जाहू को उपयुक्त माना गया है जो की तीन जिलो मंडी ,बिलासपुर और हमीरपुर को जोड़ता है और वहां पर ज्यादातर भूमि बंजर और कम उपजाऊ है। जिसमें 80% भूमि सरकारी व 20% भूमि निजी है और बल्ह की तुलना में भूमि अधिग्रहण से बहुत कम लोगो का बिस्थापन होगा, इसलिए एस आर एशिया टीम ने सुझाव दिया है कि जाहू में तकनिकी सर्वे के आधार पर प्रस्ताबित हवाई अड्डे को वैकल्पिक स्थान जाहू में बनाया जाये I
सचिव, नन्द लाल वर्मा ने कहा कि सामाजिक सर्वे के आधार पर 100% लोगो ने जमीन के सर्कल रेट को नकारते हुये बाजार भाव के आधार पर अपनी भूमि देने की शर्त रखी है जबकि प्रचार किया जा रहा है कि जयादातर लोग अपनी जमीन देने के लिए सहमत हो गए हैं जो सरासर झूठ है और दूसरी तरफ रिपोर्ट के अनुसार 88% किसानो ने शर्त रखी है कि बल्ह जैसी उपजाऊ जमीन दी जाये तभी वह अपनी जमीन देंगे इसके इलाबा 70% किसानों ने रोजगार की सर्त रखी है और रिपोर्ट के अनुसार 100% किसान सर्कल रेट का बहुत ही कम होना ब उससे आने बाले दिनों में जमीन ब मकान से विस्थापन होने का डर सता रहा है। उलटे बेरोजगारी ब बाढ़ का दंश झेलना पड़ेगा, सर्वे रिपोर्ट ने यह भी माना है की प्रस्ताबित जमीन पर हवाई अड्डे के निर्माण से कृषि/सब्जी उत्पादन में भारी नुकसान हो जायेगा जिसके कारण किसान बेरोजगार हो जायेंगे, रिपोर्ट ने माना है कि बल्ह इलाका सब्जी उत्पादन में मिनी पंजाब माना जाता है और हवाई अड्डे के निर्माण से सब्जी उत्पादन का नुकसान होगा और इससे किसानों की आर्थिक , सामाजिक, मानसिक स्थिति को बुरी तरह से प्रभाबित करेगा ।जबकि अपनी उपजाऊ जमीन पर 3 नकदी फसले उगा कर 75% किसान 2-3 लाख सालाना एक बीघे से कमा रहे हैं और वह अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं,और उससे वह बंचित हो जायेंगे I
अध्यक्ष, जोगिन्दर वालिया ने कहा कि एअरपोर्ट अथॉरिटी ने प्रस्ताबित एअरपोर्ट की रिपोर्ट को आधा अधुरा बता कर उसे 31 मार्च 2023 तक दुरुस्त करने को कहा है, समिति का कहना है कि जब अभी तक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) आधी अधूरी थी तो सामाजिक मूल्यांकन का कोई औचित्य नहीं है और आम जनता का मजाक बनाया जा रहा है। दूसरी तरफ हाल ही में सरकार ने धर्मशाला के प्रस्ताबित एअरपोर्ट के 15 किलोमीटर के दाएरे में अब कोई नया निर्माण बिना एअरपोर्ट ऑथोरिटी की मंजूरी से नहीं किया जा सकता ।इसका मतलब साफ है की बल्ह के दायरे में भी मंडी ब सुंदरनगर तक आम लोगो को भवन निर्माण में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। दूसरी तरफ बल्ह बाढ़ क्षेत्र के कारण एअरपोर्ट के बाहरी क्षेर्त्रो में जल भराव का हमेशा डर रहेगा कयोंकि प्रस्तावित हवाई अड्डा 25-30 फुट ऊँचा बनाया जायेगा I
बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति, माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर ठाकुर जी से आग्रह करती है कि हवाई अड्डे को गैर उपजाऊ जमीन पर बनाया जाया जाया और बल्ह की उपजाऊ जमीन को हर हालत में बचाया जा सके I

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