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सोमवार, 10 अप्रैल 2023

बोर्ड ने मज़दूरों के लाभ रोके लेक़िन प्रचार प्रसार में चार करोड़ खर्चे-भूपेंद्र यूनियन 13 अप्रैल को मुख्यमंत्री से उठाएंगी मुद्दा

 बोर्ड ने मज़दूरों के लाभ रोके लेक़िन प्रचार प्रसार में चार करोड़ खर्चे-भूपेंद्र

यूनियन 13 अप्रैल को मुख्यमंत्री से उठाएंगी मुद्दा



BHK NEWS HIMACHAL 

यादविंदर कुमार सुंदर नगर: हिमाचल प्रदेश राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड द्धारा मज़दूरों के लाभ रोकने और अपने चेहतों को प्रचार प्रसार के नाम पर करोड़ों रुपए लुटाने के आरोप बोर्ड सदस्य भूपेंद्र सिंह ने लगाये हैं।उन्होंने कहा कि प्रचार सामग्री और शिवरों के नाम पर राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड ने गत चुनावी वर्ष में सवा चार करोड़ रुपये ख़र्च कर दिये लेक़िन बोर्ड से पंजीकृत निर्माण और मनरेगा मज़दूरों की सहायता सात महीने से गैर कानूनी तरीक़े से रोक रखी है।उन्होंने आरोप लगाया है कि गत भाजपा सरकार ने बोर्ड के पैसे का दुरूपयोग अपने राजनैतिक प्रचार प्रसार के लिए किया है जिसकी  जांच की जानी चाहिए।उन्होंने बताया कि बोर्ड द्धारा मज़दूरों को जागरूक करने के नाम पर तीन करोड़ रुपये खर्च कर दिये हैं और जागरुकता शिविर आयोजित करने का जिम्मा एक विशेष विचारधारा की एनजीओ को दिया गया था लेक़िन इस जागरूकता अभियान के बाद मज़दूरों के पंजीकरण में कोई इज़ाफ़ा नहीं हुआ है।बोर्ड ने इन गैर सरकारी संस्थाओं की पेमेंट भी जारी कर दी है। लेकिन मंडी ज़िला की एक नामी गिरामी एक संस्था जो पिछले तीस वर्ष से कई सफ़ल जागरूकता अभियान संचालित कर चुकी है उसकी छह लाख रुपये की पेमैंट पूर्व जलशक्ति मंत्री के इशारे पर रोक दी है जो अभी तक भी जारी नहीं की है।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि विज्ञापन, होर्डिंग्स और अन्य प्रचार प्रसार पर सवा सौ करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं।उन्होंने भविष्य में ये जागरूकता शिविर ग्राम पंचायतों व पंजीकृत मज़दूर यूनियनों के माध्यम का सुझाव 3 अप्रैल को आयोजित बोर्ड मीटिंग में दिया है और गत वर्ष के ख़र्चों की जांच करने की भी मांग उठाई है।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड जो भवन एवं अन्य निर्माण कामगार क़ानून 1996 में मजदूरों की सहायता के लिए गठित किया गया है उसके पैसे का इस तरह से दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।उन्होंने इसके लिए बोर्ड के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है जो मज़दूरों को फायदा देने के बजाए सत्ताधारी पार्टी के लिए बोर्ड के पैसे का इस्तेमाल करते हैं।उन्होंने कहा कि पिछले साल एक लाख कलेंडर और दो लाख फ़ोल्डर छाप दिए थे लेक़िन वे पूरा साल वितरित भी नहीं हुए हैं और अभी भी बोरियों में भरे पड़े हैं।बोर्ड सदस्य ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में मजदूरों का पंजीकरण एक समान रूप में नहीं हो रहा है और जहां जहां मज़दूर यूनियनें इस काम को कर रही हैं वहीं पर बोर्ड के साथ मज़दूरों का रजिस्ट्रेशन हुआ है जिसमें हमीरपुर, मंडी, कुल्लू और कांगड़ा जिलों में ही मज़दूरों को बोर्ड के लाभ हॉसिल हो रहे हैं।इसलिए इस कार्य के लिए मज़दूर यूनियनों को ही बोर्ड से सहायता प्रदान की जानी चाहिए।लेक़िन वर्तमान सरकार ने 8 फ़रवरी को जारी अधिसूचना के तहत मज़दूर यूनियनों को  रोज़गार प्रमाण पत्र जारी करने और सत्यापन करने के अधिकार को ही समाप्त कर दिया है।जिसका सभी मज़दूर संगठन विरोध कर चुके हैं और अब इस बारे 13अप्रैल को मुख्यमंत्री से मिलने का समय निर्धारित किया गया है और उसके बाद भी अधिकारियों द्धारा ग़लत तरीके से रोका मज़दूरों का पंजीकरण, नवीनीकरण और लंबित लाभ जारी नहीं होते हैं तो यूनियन शिमला में सरकार और बोर्ड के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करेगी।



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