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गुरुवार, 6 अप्रैल 2023

विधानसभा में चन्द्रशेखर और दिल्ली रैली में भूपेंद्र ने उठायी मनरेगा की मांग धर्मपुर को मनरेगा और ग्रामीण विकास का मॉडल बनाने का दिया सुझाव

 विधानसभा में चन्द्रशेखर और दिल्ली रैली में भूपेंद्र ने उठायी मनरेगा की मांग



धर्मपुर को मनरेगा और ग्रामीण विकास का मॉडल बनाने का दिया सुझाव



BHK NEWS HIMACHAL 

ज्योति सुन्दर नगर :  मनरेगा के बजट में कटौती, ऑनलाईन हाज़री, बीस कार्यों की शर्त, मूल्यांकन के लिए शेड्यूल बनाने और  अन्य समस्याओं बारे धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर द्धारा गत 5 अप्रैल को विधानसभा में मुद्दा उठाया तो वहीं मज़दूरों ने मज़दूर नेता भूपेंद्र सिंह की अगुवाई में सड़कों पर प्रदर्शन जारी हैं और 5 अप्रैल को ही रामलीला मैदान दिल्ली में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुआ जिसमें धर्मपुर से मनरेगा मज़दूरों ने उनकी अगुवाई में भारी तादात में हिस्सा लिया। मनरेगा मज़दूर यूनियन धर्मपुर ने विधायक चंद्रशेखर द्धारा मज़दूरों की मांगों बारे विधानसभा में रखे प्रस्ताव का स्वागत किया है और उनका इसके लिए धन्यवाद किया है।यूनियन के खंड अध्यक्ष करतार सिंह, सचिव प्रकाश वर्मा,प्रताप सिंह, कौल सिंह, रामनाथ शर्मा, कश्मीर सिंह, कीर्णवाला शर्मा, रीतू देवी, रोहणी देवी, सुरेशां, जमीला, शोमा, कृष्णि, निलमा, सरोजनी, रीना, सिमरो, सीमा, शांता, अन्नू, मनसा, वीना, सुमना देवी आदि ने कहा कि विधायक चन्द्रशेखर ने मनरेगा कार्यों की असेसमेंट करने के लिए अलग शेड्यूल बनाने बारे मनरेगा क़ानून बनने के अठारह साल बाद विधानसभा में चर्चा हुई जो स्वागत योग्य है और मज़दूरों के जायज़ हक़ दिलाने के लिए विधायक ने सराहनीय पहल की है  और मजदूरों को न्यून्तम 350 रु दिहाड़ी देने की मांग भी विधानसभा में रखी है। यूनियन के राज्य महासचिव व श्रमिक कल्याण बोर्ड के सदस्य भूपेंद्र सिंह ने बताया कि मनरेगा क़ानून जो 2005 से लागू किया गया था उसमें मनरेगा के लिए अलग शेड्यूल बनाने के निर्देश राज्य सरकारों को दिए गए थे लेकिन आज तक किसी भी सरकार ने इसे लागू नहीं किया और लोकनिर्माण विभाग के शेड्यूल के आधार पर ही असेसमेंट की जाती है जिसके कारण मज़दूरों की निर्धारित मज़दूरी में कटौती कर दी जाती है ।दूसरी तरफ मज़दूरों से जब आठ घंटे काम करवाया जाता है तो फ़िर आठ घण्टे काम करने के बाद असेसमेंट नहीं होनी चाहिए।मनरेगा के लिए अलग शेड्यूल जल्दी बनना चाहिए जिसके बारे यूनियन ने विधायक को 12 मार्च को भराड़ी में माँगपत्र सौंपा था।यूनियन ये मांग लंबे अरसे से कर रही है लेकिन इस पर पहली बार विधानसभा में प्रताव लाया गया और उस पर विस्तृत चर्चा हुई है।भूपेंद्र सिंह ने ये भी मांग की है कि ग्राम पंचायतों में जनरल हैड के विकास कार्यों में ज़रूरतमंद और आर्थिक रूप से कमज़ोर जॉब कार्ड धारकों को काम दिया जाना चाहिए।वर्तमान में ये काम ठेके पर करवाये जा रहे हैं इसके लिए ग्राम पंचायतों को दिशा निर्देश जारी होने चाहिये। उन्होंने विधायक से मांग की है की धर्मपुर में मनरेगा और अन्य विकास कार्यों को करवाने के लिए मॉडल के रूप में विकसित किया जाये। । जबकि पूर्व में धर्मपुर ठीकेदारी का मॉडल था और मनरेगा मज़दूरों को 55-60 दिनों का ही काम मिलता था।अब इसमें सुधार करने के लिए वर्ष के शुरू में ही पंचायतों और बीडीओ को निर्देश दिये जाने चाहिए और इसकी समीक्षा हर तीन महीने में होनी चाहिये जिसके लिए मज़दूर यूनियन सहयोग करने के लिए तैयार है।भूपेंद्र सिंह ने विधायक द्धारा राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड के लाभ रोकने का मुद्दा भी विधानसभा में उठाया है और दो दिन पहले ही राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड की शिमला में आयोजित बैठक में इसे मैंने भी प्रमुखता से उठाया था। लेकिन बोर्ड बैठक में दो साल से रुके हुए लाभों को जारी करने बारे अफसरों ने जानबूझकर अड़चने डाल कर मामले को उलझाने का ही काम कर रहे है। जिसके बारे यूनियन जल्दी ही मुख्यमंत्री से भी मिलेगी और वास्तविक स्थिति से उन्हें अवगत करवायेगी।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्र की भाजपा सरकार जानबूझकर मनरेगा योजना को कमज़ोर कर रही है और इस वर्ष के लिए कुल बजट में 20 हज़ार करोड़ रुपये कम कर दिया है।जिसके ख़िलाफ़ दो दिन पहले दिल्ली में एक बड़ी विरोध रैली हुई है।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा की सरकार तो इस क़ानून को शुरू से ही कमज़ोर कर रही थी और अब तो बजट में भारी मात्रा में कमी करके ये सब साबित हो गया है।उन्होंने कहा कि इस बार धर्मपुर से चुने गए विधायक मज़दूरपक्षी नजरिये के तहत लगातार मनरेगा योजना के बारे में विधानसभा में मुद्दा उठा रहे हैं जबकि पूर्व विधायक और मंत्री  जो ठेकेदारों की बात ज़्यादा करते थे और मनरेगा मज़दूरों की हर कहीं खिल्ली उड़ाते थे।पूर्व मंत्री ने तीन साल पहले कुल्लू में जाकर ये बयान दिया था कि धर्मपुर के मनरेगा मज़दूर काम नहीं करते हैं और बिना काम किये ही मज़दूरी लेते हैं इसी प्रकार उन्होंने मज़दूरों को बोर्ड से स्वीकृत सामग्री को बंटने नहीं दिया और मंडी ऑफिस के सभी कर्मचारियों को वहां से बदल दिया था।इससे नाराज़ मज़दूरों ने उनको इस बार चुनावों में सबक सिखा दिया है और घर बैठा दिया है।।यूनियन मनरेगा में 120 दिनों का रोज़गार सुनिशित करने बारे अप्रैल माह में ही ग्राम पंचायतों में मज़दूरों से आवेदन करवाने का अभियान शुरू करेगी और बीडीओ से भी इस बारे जल्दी ही बैठक करेगी।



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