फ़ॉलोअर

बुधवार, 21 जून 2023

शिमला शहर में देवभूमि व चूड़ेश्वर टैक्सी यूनियनों के मध्य चल रहे विवाद का तुरन्त समाधान करने की मांग

शिमला शहर में देवभूमि व चूड़ेश्वर टैक्सी यूनियनों के मध्य चल रहे विवाद का तुरन्त समाधान करने की मांग 




 सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश ने प्रदेश सरकार व जिला शिमला प्रशासन से शिमला शहर में देवभूमि व चूड़ेश्वर टैक्सी यूनियनों के मध्य चल रहे विवाद का तुरन्त समाधान करने की मांग की है। सीटू ने मांग की है कि कामकाजी जनता के आर्थिक हितों का ख्याल रखते हुए क्षेत्रवाद की राजनीति पर रोक लगाई जाए।


सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि प्रदेश सरकार व शिमला जिला प्रशासन को इस मुद्दे का तुरन्त समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 सभी नागरिकों को रोज़ी रोटी कमाने, आर्थिक स्वतंत्रता व जीने का अधिकार देता है। देश के संविधान के तहत बने विभिन्न कानून निष्पक्षता के सिद्धांत की वकालत करते हैं व एकतरफा कार्रवाई पर रोक लगाते हैं। उन्होंने कहा कि शिमला शहर में कानून व्यवस्था स्थापित करने लिए निष्पक्षता के पैमाने को ही आधार बनाना चाहिए तथा इस संदर्भ में राजनीतिक संरक्षण व क्षेत्रवादी राजनीति बन्द होनी चाहिए। शिमला शहर ऐतिहासिक तौर पर विकसित हुआ है जहां पर शिमला की स्थानीय जनता के साथ ही देश व प्रदेश के विभिन्न प्रान्तों से शिमला में कार्यरत कामकाजी जनता का अग्रणी योगदान रहा है। देश की आज़ादी के पहले व बाद में जनता के तमाम समूहों के योगदान से ही शिमला शहर की सामाजिक व आर्थिक गति सुनिश्चित हुई है। इसलिए शिमला शहर आपसी सौहार्द व भाईचारे के लिए जाना जाता है लेकिन क्षेत्रवाद का नारा उछालकर कुछ शक्तियां शिमला शहर के माहौल को खराब करने की कोशिश कर रही हैं जो सही नहीं है। उन्होंने दोनों टैक्सी यूनियनों से अपील की है कि वे आपसी सौहार्द से इस मसले का समाधान करें। उन्होंने इस मामले के समाधन के लिए हुए प्रयासों को नाकाफी व लचर बताया है। उन्होंने एसडीएम की अध्यक्षता में बनी कमेटी से इस पूरे घटनाक्रम का तुरन्त समाधान करने की मांग की है क्योंकि अभी शिमला में ग्रीष्मकालीन सीज़न चल रहा है जिसके जरिये ही टैक्सी ओपरेटर, कुली, गाइड, रेस्तरां, टूअर एन्ड ट्रेवल, होम स्टे व होटल संचालक अपने रोज़गार व आजीविका को ज़िंदा रखने में सक्षम होते हैं। विवाद के लम्बा खिंचने से इन सबको भारी आर्थिक नुकसान होगा क्योंकि पर्यटन से जुड़े ज़्यादातर लोग बैंक से कर्ज़ा लेकर अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। यह प्रदेश के राजस्व के लिए भी नुक्सानदेह साबित होगा। इस से शिमला शहर व प्रदेश की आर्थिकी पर भी बुरा असर पड़ेगा।



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें