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गुरुवार, 20 जून 2024

*सत्ता और कुर्सी के लालच में इन्सान ने इन्सानियत के ज़मीर को खत्म किया- बालक राम शर्मा*

 *सत्ता और कुर्सी के लालच में इन्सान ने इन्सानियत के ज़मीर को खत्म किया- बालक राम शर्मा*




   *बिलासपुर 20 भारतीय जवान किसान पार्टी के राष्ट्रीय मीडिय प्रभारी व पार्टी प्रदेशाध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश वैटरन सैनिक कल्याण एंव विकास समिति के प्रदेशाध्यक्ष वैटरन कैप्टन बालक राम शर्मा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि आज का इन्सान सत्ता की कुर्सी के लिए अपना इन्सानियत का ज़मीर बेच चुका है आज देश प्रदेश के हालात पर नज़र डालें तो इन्सानियत जिन्दा नहीं है परन्तु इन्सान ने राजनैतिक द्वेष बढ़ाकर सत्ता और कुर्सी को पाने के लिए पता नहीं क्या-क्या हथकंडे अपनाये जा रहे हैं पैसे के लालच के लिए व सत्ता की कुर्सी के लिए राजनैतिक दल एक दुसरे दल को कमज़ोर करने के लिए मज़बूरवश धन व वल का प्रयोग करने पर उतारु हैं चाहे खरीद फरोख्त और सत्ता में पद का लालच देकर अपना इम्मान धर्म  खो चुके हैं ये आने वाले समय के लिए एक गंभीर समस्य पैदा करती जा रही है धर्म जातिवाद धार्मिक आस्था का खिलवाड़ ने करें इन्सान को इन्सान ही रहने दें ये हमारा व्यक्तिगत सुझाव और अपील है*

   *अभी अभी मैं व्हाटसऐप पर एक लाईव इन्टरव्यू देख रहा था जिसमें पंजाब में अंतकवाद को बढ़ावा बात कही जा रही थी परन्तु अंतकवाद को बढ़ावा राजनैतिक षड्यंत्र है और राजनैतिक दल सत्तासींन होने के लिए धर्म जातिवाद धार्मिक आस्था की आढ़ में एक दुसरे में द्वेष पैदा करके और निचा दिखाने के लिए अंतकवाद उग्रवाद का नाम पर ऐसी गतिविधियां पैदा करके समाज में डर भय का मौहल उत्पन्न कर दबाने कुचलने की कार्रवाई की जाती है और अंतकवाद उग्रवाद का नाम पर बदनाम करना उद्देश्य हो चुका है अंतकवाद है नहीं मौहल बनाया जाता है मीडिय अपना असली दायित्व नहीं निभा रहा है जो असली सच्चाई है* 

          *राष्ट्रीय मीडिय प्रभारी बालक राम शर्मा ने आगे बताया की आम गरीब लोगों आवाज को दबाने कुचलने के लिए सरकारें अपने तंत्र अस्त्र का इस्तेमाल करने पर उतारु है तथा आम गरीब लोगों की आवाज को उठाने वाले देश की जनता का चौथा स्तम्भ माने जाने वाले नेशनल मीडिय भी बिकाऊ मीडिय बनकर काम कर रहा है जो तर्कसंगत है और लोकतंत्र की आवाज को खत्म करने वाला नेशनल मीडिय भी बिकाऊ होकर काम कर रहा है जो देश की जनता सब देख रही है शर्म आती है ऐसी बिकाऊ इन्सानियत पर जो इन्सानियत के नाम पर तो देखते हैंं परन्तु सत्ता कुर्सी और चंद पैसों के लिए इन्सान के नाम पर इन्सानियत का ज़मीर बेच कर सच्चाई को छुपाते हैं धिक्कार है ऐसे इन्सानों को जो अपने निजी स्वार्थ के लिए अपना इम्मान बेच देते है ये सब आने वाले समय के लिए घातक सिद्ध होंगें और इन्सान को इन्सान बनकर ही रहना चाहिए इन्सानियत का ज़मीर न बेचें अपनी सच्चाई इमानदारी व मेहनत से काम करके सबकुछ हासिल करने की कोशिश होनी चाहिए न कि किसी अन्य तंत्र अस्त्र शस्त्र का इस्तेमाल करके सत्ता व कुर्सी हासिल करे हमने आज देश प्रदेश में देखने सुनने को मिल रहा है उसी को बयां किया है।  जयहिंद*








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