डॉक्टरों की लापरवाही से हुई हरवंश मौत,जांच करवाये विभाग- भूपेंद्र
दो अस्पतालों के चक्कर लगाने के 22 घण्टे बाद लगाया एसबीवी टीका-परिवाजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत डरवाड़ के गांव छतरैणा निवासी साठ वर्षीय हरवंश लाल पुत्र स्वर्गीय श्याम लाल की पिछले कल 2 अगस्त को तीन दिन पहले सांप काटने के कारण मेडिकल कॉलेज नेरचौक में मौत हो गई।जिसकी मुख्य बजह सरकाघाट और नेरचौक मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की लापरवाही रही।पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए मीडिया में बताया कि दिवंगत हरवंश लाल 30 जुलाई को घर के नज़दीक अपने खेतों में सुबह साढ़े दस बजे घास लाने गया हुआ था जहां उसे सांप ने काट लिया।जिसके उपराँत उसी गांव की युवा महिला डॉक्टर जो उस दिन अवकाश पर थी ने मौके पर ही फर्स्ट एड के रूप में उपलब्ध एविल व टेटनेस के टीके लगा दिए और सरकाघाट अस्पताल में फ़ोन करके ये पता लगाने के बाद हरवंश लाल को वहां भेजा कि वहाँ पर एसबीवी अर्थात सांप काटने के ईलाज का टीका उपलब्ध है या नहीं।यदि वहां टीका नहीं होता तो परिवार व गांव के लोग उन्हें हमीरपुर ले जाने की तैयारी कर रहे थे।सांप काटने की घटना पौने घण्टे के भीतर उन्हें सरकाघाट अस्पताल पहुंचा दिया गया जहां पर डियूटी पर तैनात डॉ अश्वन ज्योति की देखरेख में वह वहां साढ़े चार घण्टे तक रहा लेक़िन दोपहर बाद उसने टीका लगाये बगैर साढ़े चार बजे नेरचौक मेडिकल कॉलेज के लिए रैफर कर दिया गया। परिवार जनों ने उसे सवा छह बजे नेरचौक पहुंचा दिया जहां पर डॉ दीपक ने उन्हें अटेंड किया लेक़िन उन्होंने भी उसे एसबीवी टिका नहीं लगाया और 9 बजे के बाद आये सीनियर डॉक्टरों के देखने के बाद अगली सुबह 31 जुलाई को 9.45 बजे टिका लगाया तब तक जहर पूरे शरीर में फैल गया था और किडनीयां व अन्य अंग ज़हर ने डैमेज कर दिए थे।अगली सुबह जब वहां पर सीनियर डॉक्टर ने फ़ाईल देखी तो रात को डियूटी दे रहे डॉक्टर ने कहा कि उन्होंने सोचा कि टीका सरकाघाट में लगा दिया गया होगा लेक़िन फ़ाईल और रैफर स्लिप किसी ने भी ध्यान से नहीं पढ़ी।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि सरकाघाट अस्पताल में या यहाँ तक कि नेरचौक अस्पताल में भी डॉक्टरों ने टीका लगा दिया होता तो हरवंश की मौत नहीं होती।इसलिए ये घोर लापरवाही बरतने का मामला है जिसकी तुरन्त जांच करवायी जाये। नेरचौक में परिवारजनों ने अगली सुबह डॉक्टरों को आपस में ये कहते सुना कि रात को डियूटी दे रहे प्रशिक्षु डॉक्टर ने बिना फ़ाईल पढ़े ये सोच लिया कि उनको टीका सरकाघाट अस्पताल में लग गया होगा जबकि परिवारजनों ने डॉक्टर और अन्य स्टाफ़ को कई बार बताया कि उसे सांप ने काटा है और उसका पैर और टांग जहर से नीली हो गई थी और वो बुरी तरह से तड़प रहा था लेकिन उन्होंने कोई परवाह नहीं कि। वे टैस्ट करवाने के नाम पर समय बर्बाद करते रहे और मृतक और परिवारजनों से सांप के रंग और साईज़ इत्यादि की ही पूछताछ करते रहे।पूर्व पार्षद ने बताया कि परिवाजनों ने मौके पर ही उसकी टांग को तीन जगहों से बांध दिया था ताकि जहर शरीर में न फैले और उसे पौने घण्टे में ही सरकाघाट अस्पताल पहुंचा दिया गया था।यही नहीं जब नेरचौक अस्पताल में भी उसे टीका नहीं लगाया गया तो जहर पूरी तरह फैलने से हरवंश लाल वहां तड़पता रहा और फ़िर उसे 31 जुलाई को आईसीयू में भर्ती किया गया लेक़िन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और अगले दिन उसकी मौत हो गई जिसके लिए सरकाघाट और तथाकथित नेरचौक मैडिकल कॉलेज और अस्पताल जिम्मेदार है।पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह पँचायत प्रधान रणजीत सिंह पूर्व प्रधान लता ठाकुर उप प्रधान नरेंद्र पठानिया वार्ड पंच राजकुमारी, ललिता देवी, सुमनलता, हिमा देवी, यशवंत सिंह के अलावा पत्नी सुषमा देवी बेटे रोहित कुमार व गांववासी मोहिंदर सिंह,रसपाल बराड़ी,जगदीश चन्द, संजीव कुमार, बलदेव सिंह, अजय कुमार, प्रेम सिंह, नानक चन्द,गुरुदेव, कुलदीप सिंह,सुशील कुमार,तपन सकलानी,रिंकू व दोनों महिला मण्डलों और युवक मण्डल छतरैना ने लापरवाही बरतने के लिए सरकाघाट और नेरचौक अस्पताल के डॉक्टरों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाई करने की मांग सरकार और स्वास्थ्य विभाग से की है।वहीं भूपेंद्र सिंह ने सरकाघाट और नेरचौक में उपचार कर रहे डॉक्टरों को तुरन्त सस्पेंड करके जांच करने और उन पर जानबूझ कर ईलाज न करने के लिए हत्या का मुक़दमा दर्ज़ करने की भी मांग उठाई है और विभाग से भविष्य के लिए भी ऐसी लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कदम उठाए जाने की मांग की है।

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