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शुक्रवार, 7 मार्च 2025

राष्ट्रीय कवि चौपाल दौसा द्वारा आकस्मिक काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन काव्य गोष्ठी में भीलवाड़ा के कवि कैलाश मंडेला का किया सम्मान

 राष्ट्रीय कवि चौपाल दौसा द्वारा आकस्मिक काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन


काव्य गोष्ठी में भीलवाड़ा के कवि कैलाश मंडेला का किया सम्मान




दौसा : हिमाचल अब तक : हरीश शर्मा -: राष्ट्रीय कवि चौपाल, दौसा के तत्वावधान में शाहपुरा, भीलवाड़ा से पधारे राष्ट्रीय गीतकार कवि कैलाश मंडेला के आतिथ्य में सम्मान समारोह एवं आकस्मिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय कवि चौपाल दौसा के जिलाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रचारक कवि कृष्ण कुमार सैनी, उपाध्यक्ष डॉ.बृजमोहन मीना, महासचिव कवि कैलाश सुमा, सलाहकार मिमिक्री कलाकार अशोक खेड़ला ने संस्था के माध्यम से भीलवाड़ा के कवि कैलाश मंडेला का माला, दुप्पटा, सम्मान पत्र एवं कलम भेंट कर सम्मान किया गया। जिलाध्यक्ष कवि कृष्ण कुमार सैनी ने राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर से प्रकाशित अपनी पुस्तक "नमन शहीदों को" एवं महासचिव कैलाश सुमा ने अपनी पुस्तक "करारी चोट" की प्रति भेंट की। इस दौरान सभी ने अपनी अपनी कविताएं भी सुनाई।



                         सर्वप्रथम कवि कैलाश मंडेला ने "बनते नहीं है गीत कभी भी प्रयास से, कहता है कोई और ही मेरे कयास से, जुड़ते हैं तार श्वास के गूंजता है नाद, मदहोशियां को लिखता हूं होशो हवास से" गीत सुना कर खूब वाह वाही लूटी। कवि कृष्ण कुमार सैनी ने वीर रस की कविता "स्वर्णाक्षर से लिक्खेंगे इतिहास हमेशा वीरों का, गाएगी गुणगान सदा ही ये दुनिया रणधीरों का, दी हैं जान जिन्होंने अपने वतन क़ी रक्षा की खातिर , होगा सदा सम्मान वतन में ऐसे हीरों का" सुनाकर वीर जवानों को याद किया। मिमिक्री कलाकार अशोक खेड़ला ने विभिन्न जानवरों एवं साधनों की, फिल्म अभिनेताओं की आवाज निकाल कर अपनी कला का प्रदर्शित किया और खूब वाह वाही लूटकर जमकर तालियां बटोरी।



                     डॉ.बृजमोहन मीना ने "झूठे वादों से मन कितना बहलाओगे, तुम मेरी जान हमें कितना तरसाओगे, सच बताऊं कि बन ठन के तुम इस तरह, किससे मिलने सनम रात तुम जाओगे" प्रेम गीत सुनाया। कवि कैलाश सुमा ने "बता दे सत्य की राहे वही तो ज्ञान है जग में, मिले हर और मधुवानी वही सम्मान है जग में, दया और सत्य के बल से हर जो दर्द दीनों का, विपत में साथ जो देता वही इंसान है जग में" भावपूर्ण कविता सुनाई। इस दौरान कवि कैलाश मंडेला ने संस्था के पदाधिकारियों का आभार प्रकट किया।



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