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बुधवार, 7 जनवरी 2026

*ओ बेसब्री , सेहत के लिए तू तो हानिकारक है !*

 *ओ बेसब्री , सेहत के लिए तू तो हानिकारक है !*




           {  मुमुक्षु  के. ठाकुर  }


और सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं , बल्कि तन , मन , धन , प्राण , आत्मा सभी के लिए ही ये व्याकुलता और बेसब्री नुकसानदेह है ।  सब्र और संयम का दूसरा नाम ही शांति और आनंद है । ऐसा करोड़ों लोग जानते हैं , लेकिन व्यवहार में मानते कुछ सौ लोग भी नहीं ! ठीक उसी तरह कि काम ,  क्रोध , लोभ , मोह , अहंकार  हमारे लिए बहुत हानिकारक होते हैं ।

                 हमारे देश के  99% लोग तो बेसब्री और बेचैनी के महाउपासक हैं । हम हिंदुस्तानी छ: महीने के बच्चे दस सेकेंड भी दूध का इंतज़ार नहीं कर सकते और पानी मिलने की पांच सेकेंड की देरी में ही आदरणीय बजुर्ग चिल्लाने लगते हैं ।

                          भारतीय युवाओं की तो हम बात ही क्या करें ? उन्हें तो सब कुछ बस चुटकी बजाते ही मिल जाने की घोर आकांक्षा रहती है । रातों-रात करोड़पति बन जाना चाहते हैं । दो-चार महीने पढ़ाई करके ही कलेक्टर ( आई . ए. एस. ) हो जाने की अभिलाषा रहती है ।  लोग सौ माला मंत्र जप करके ही मोक्ष या ईश्वर प्राप्ति की इच्छा रखते हैं । तात्पर्य ये कि हमारे देश के हर उम्र , हर वर्ग के लोगों के ऊपर ये उतावलापन और बेसब्री भयंकर रूप से छाए हुए हैं ।

                    

                    थोड़ा गौर करें तो , मध्य-पूर्व ( मिडल ईस्ट ) ऐशिया और दुनिया के कुछ देशों में तो सिर्फ जैसे - तैसे ज़िंदा रहना ही लगभग  बहुत बड़े संघर्ष जैसा  होता है ।  और भूगोलिक रूप से हमारे भारत के एक बहुत ही बड़े भू-भाग में काफी सरल , सहज जीवन होते हुए भी हम इतने बेसब्र , बेचैन , व्याकुल क्यों रहते हैं , इसका उत्तर तो शायद सिर्फ भगवान परमात्मा ही दे सकता है ।

                    बेसब्री के इस मामले में हम देश के कुछ नेताओं से अच्छा सबक सीख सकते हैं । उदाहरण के रूप में  ' नोटबंदी ' के कारण कुछ नेताओं का तो करोड़ों-अरबों रुपयों का नुकसान हो गया था । अब इसका कारण चाहे भय , लोक-लज्जा रहा हो या कुछ और । लेकिन , कुछ राजनीतिज्ञों ने चीखना-चिल्लाना तो दूर , बल्कि सार्वजनिक रूप से उफ्फ तक नहीं की थी !  ऐसे लोगों के सब्र की प्रशंसा में ताली ठोकना तो ज़रूर बनता है ।


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            = मुमुक्षु के. ठाकुर ,

        {  ओबड़ी ,  चम्बा  }

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