" *मुलाकात अंतरराष्ट्रीय हिंदी कवि आदरणीय श्री अशोक दर्द जी के साथ*
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( अविनेश कुमार )
डलहौजी के सुरम्य वातावरण में बसे छोटे से गाँव घट्ट में जन्मी एक ऐसी महान विभूति से आज उनके निवास स्थान पर भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिन्होंने अपनी लेखनी से न केवल हिमाचल बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। एक शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका जीवन निरंतर समाज सेवा और साहित्य साधना में समर्पित है। "बम भोले" जैसी सरल और ओजस्वी प्रतिभा के धनी इस व्यक्तित्व ने अब तक 10 से अधिक पुस्तकें हिंदी और पहाड़ी भाषाओं में रचित की हैं, जिनमें 'कविए दी लाड़ी' जैसी कालजयी कविताएं और 'संवेदना के फूल' जैसा मर्मस्पर्शी काव्य संग्रह शामिल है।
राष्ट्रीय स्तर के इस प्रख्यात कवि को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए अब तक 50 से अधिक पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हिमाचल कला, संस्कृति और भाषा अकादमी, शिमला के सम्मानीय सदस्य के रूप में भी प्रदेश की भाषा और संस्कृति के उत्थान में अतुलनीय योगदान दिया है। आज उनके पैतृक गाँव घट्ट में हुई यह मुलाकात अत्यंत प्रेरणादायी रही, जहाँ उनकी सादगी और विद्वत्ता से साहित्य के गहरे अर्थ सीखने को मिले। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ख्याति प्राप्त करने वाली ऐसी अद्वितीय प्रतिभा श्री अशोक दर्द जी और उनके साहित्यिक व मानवीय मूल्यों को मैं सादर नमन करता हूँ |
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= अविनेश कुमार
*BHK* में
प्रस्तुति : - मुमुक्षु के. ठाकुर

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