भाजपा उमीदवारों के ख़िलाफ़ मतदान करेगी सीटू-डॉ कश्मीर ठाकुर
मज़दूर विरोधी व मॅहगाई बढ़ाने वाली नीतियां लागू कर रही है भाजपा की सरकारेंं
BHK NEWS Himachal Yadvinder
सीटू हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी की मीटिंग आज सीटू कार्यालय मंडी में राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा की अध्यक्षता में आयोजित की गई।मीटिंग में फैसला लिया गया कि केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार लगातार मज़दूर विरोधी नीतियां लागू कर रही है जिसके विरोध में आगामी लोकसभा व विधानसभा उप चुनावों में सीटू मजदूरों व आमजनता से भाजपा उमीदवारों के ख़िलाफ़ मतदान करने की अपील करेगी और उन्हें हराने के लिए काम भी करेंगे।केंद्र की मोदी सरकार ने 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया है और उसके स्थान पर चार श्रम सहिंता लागू करने का निर्णय लिया है और उनमें बहुत से मज़दूर विरोधी प्रावधान रखे गए हैं।काम का समय आठ घण्टे से बढ़ाकर बारह कर दिया गया है।छंटनी की पूरी छूट कंपनियों को दे दी गई है।स्थाई रोज़गार के स्थान पर ठेके पर रोज़गार देने की नीति लागू की जा रही है जिससे मजदूरों का शोषण हो रहा है।प्रदेश सरकार अभी तक आऊटसोर्सिंग पर रखे गए मज़दूरों को के लिए एक समान वेतन और उन्हें रैगुलर करने के लिए नीति नहीं बना पाई है।कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन योजना को बहाल करने में उदासीनता वरती जा रही है।आंगनवाड़ी, मिड डे मील और आशा वर्करज को न्यून्तम वेतन सरकार नहीं दे रही है।मनरेगा में मजदूरों को 120 दिनों का काम नहीं दिया जा रहा है और इनके साथ राज्य सरकारसौतेला व्यवहार कर रही है और उन्हें तीन सौ के बजाये 202 रु दिहाड़ी दी जाती है।केंद्र सरकार की नीतियों के कारण रसोई गैस सिलेंडर के दाम एक हज़ार रुपये से ज़्यादा हो गए हैं और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें लगातार बढ़ रही है और मॅहगाई ने मज़दूर व आम मेहनतकशों की कमर तोड़ दी है।सरकार लगातार सार्वजनिक क्षेत्र की विक्री कम्पनियों को कोड़ियों के भाव कर रही है और अब रेलवे स्टेशन व लाइनें बेचने का काम भी शुरू कर दिया गया है। इन सब मज़दूर विरोधी गतिविधियों के कारण सीटू भाजपा को उपचुनावों में हराने के लिए काम करेगी।बैठक में फैसला लिया गया कि 21 अक्टूबर को राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाईपलाईन के विरोध में 21 अक्टूबर को ज़िला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे। 26 नवंबर को दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के एक साल के मौके पर किसानों के समर्थन में खण्ड स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड की लचर कर्यप्रणाली के ख़िलाफ़ 1 दिसंबर को निर्माण व मनरेगा मज़दूर बोर्ड के राज्य कार्यालय शिमला में विरोध रैली आयोजित करने का भी फैसला मीटिंग में लिया गया।इसके अलावा प्रवासी व असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों को मिलने वाली समाजिक सुरक्षा के लिए मनदूरों को पंजीकृत करवाने का भी निर्णय लिया गया।आउट सोर्स मजदूरों व कर्मचारियों को राज्य स्तर पर संगठित करने का फैसला भी मीटिंग में लिया गया।बैठक में डॉक्टर कश्मीर ठाकुर, विजेंदर मेहरा, प्रेम गौतम, भूपेंद्र सिंह, राजेन्द्र सिंह, राजेश शर्मा, रविन्द्र कुमार, जगत राम, केबल सिंह, राजेश ठाकुर, कुलदीप सिंह, अजय दुलटा, विहारी सेवगी, मनोज़ कुमार, सुदेश ठाकुर, विना देवी, खिमी देवी, कांता महंत, सरचन्द, भूप सिंह, सुरेंद्र कुमार, गुरुदास वर्मा, विजय शर्मा, पदम् प्रभाकर सहित पचास सदस्यों ने भाग लिया।
*पीएचडी दाखिलों में अध्यापकों के बच्चों को बिना नेट जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के दाखिले न्यायसंगत नहीं: अभाविप*
*लाडलों की पीएचडी में दाखिले के लिए नियमों की धज्जियां उड़ा रहा प्रदेश विश्वविद्यालय: अभाविप
दिनांक : 17/10/2021
BHK NEWS Himachal Yadvinder
*अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई*
*पीएचडी दाखिलों में अध्यापकों के बच्चों को बिना नेट जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के दाखिले न्यायसंगत नहीं: अभाविप*
*लाडलों की पीएचडी में दाखिले के लिए नियमों की धज्जियां उड़ा रहा प्रदेश विश्वविद्यालय: अभाविप*
*बिना नेट जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के पीएचडी में लाडलों के दाखिले समानता के अधिकार के विरुद्ध: अभाविप*
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी दाखिले में विश्वविद्यालय अध्यापकों के बच्चों को बिना नेट/जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के दाखिला देना के निर्णय का विरोध करती है । अभाविप हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष विशाल सकलानी ने बताया कि विश्वविद्यालय के द्वारा अध्यापकों के बच्चों को पीएचडी दाखिलों में अनुचित तवज्जो देना आम छात्रों के साथ धोखा है और संविधान के अंतर्गत समानता के अधिकार के विरुद्ध भी है । एक तरफ जहां आम छात्र सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करते हुए , किराए के कमरों में रहकर नेट/जेआरएफ की परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं बावजूद इसके वो पीएचडी में कम सीटों के चलते दाखिला लेने से वंचित रह जाते हैं , अभाविप जहां आम छात्रों की आवाज को बुलंद करते हुए सभी विभागों में पीएचडी की सीटें बढ़ाने की मांग कर रही है वहीं विश्वविद्यालय में कार्यरत अध्यापकों के लाडलों को बिना नेट/ जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के दाखिला देना आम छात्र के साथ धोखा है , अन्याय है और भारतीय संविधान के समानता के अधिकार के विरुद्ध भी है , साथ ही साथ यह फैसला यूजीसी के नियमों की भी सरेआम धज्जियां उड़ा रहा है । एक तरफ जहां छात्र हित के विरुद्ध फैसला लेना हो तो विश्वविद्यालय इन्हीं नियमों व कानूनों का हवाला देता है किंतु जब बात अपने लाडलों को दाखिले देने की आती है तो इन्हीं नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाता है । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अध्यापकों के बच्चों को बिना किसी नेट/जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के पीएचडी दाखिलों का विरोध करती है और विश्वविद्यालय प्रशासन व प्रदेश सरकार से मांग करती है कि छात्र विरोधी व समानता के अधिकार की धज्जियां उड़ाने वाले इस फैसले को वापिस लिया जाए अन्यथा अभाविप उग्र आंदोलन करेगी।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की मंडी जिला कमेटी की विस्तारित बैठक आज मंडी में तारा चंद भवन में आयोजित की गई। इस बैठक में जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों जिनमें विशेषकर कमरतोड़ महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, किसानों की दुर्दशा, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 तथा प्रभावितों की अनदेखी के साथ-साथ जिला में सड़कों, बिजली, पानी व अन्य जन समस्याओं पर चर्चा की गई। इसके साथ ही मंडी लोक सभा के उपचुनावों के बारे भी पार्टी ने चर्चा की। इस बैठक में माकपा के राज्य सचिव डॉक्टर ओंकार शाद भी विशेष रूप से सम्मलित हुए। माकपा की इस विस्तारित जिला कमेटी बैठक में कुशाल भारद्वाज, भूपेन्द्र सिंह, जयवन्ती, महेंद्र राणा, राजेश शर्मा, सुरेश सरवाल, जोगिंदर वालिया, रविकान्त, भीम सिंह, सुनीता ठकुर, वीना वैद्य, दिनेश काकू, संजय जमवाल, गोपेंद्र, रीना शर्मा, प्रकाश चंद, प्रोमिला देवी, बुधि सिंह सहित विभिन्न लोकल कमेटियों के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया।
इस अवसर पर राज्य सचिव डॉक्टर ओंकार शाद ने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की नीतियाँ सीधे-सीधे आम जनता विरोधी और बड़े पूँजीपतियों के हित में हैं। मोदी सरकार ने अपने दूसरे कायकाल में बड़ी तेजी से नवउदारवाद और सांप्रदायिकता के अजेंडे को लागू करने का काम चला रखा है। इन नीतियों के चलते देशी व विदेशी बड़े पूँजीपतियों के मुनाफे व धन दौलत बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं मजदूरों, किसानों व दूसरी मेहनतकश जनता की गरीबी व तकलीफ़ें बढ़ रही हैं। देश में भूखमरी, बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा, असमानता व महंगाई बढ़ रही है। रसोई गैस सिलेन्डर 1000 रूपये का मिल रहा है तो वहीं पेट्रोल 106 रूपये लीटर मिल रहा है। खाने का तेल 250 रूपये प्रति लीटर और दालें 200 रूपये के पार पहुँचने वाली हैं। भाजपा सरकार बड़ी तेजी से देश के संसाधनों को अपने चहेते पूँजीपतियों को बेच रही है। किसानों व मजदूरों के खिलाफ काले कानून बनाए जा रहे हैं। 600 से ज्यादा किसानों के आंदोलन में शहीद हो जाने के बाद भी मोदी सरकार किसानों का पक्ष सुनने व मानने को तैयार नहीं है। केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री किसानों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देता है और उनका बेटा जो स्वयं भाजपा का नेता है, वह और उसके साथी गाड़ियों से किसानों को रौंद कर उनकी बेरहमी से हत्या कर देते हैं। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा की यूपी सरकार मंत्री के बेटे को केस से बचाने और घटनास्थल से उसकी मौजूदगी को छिपाने के प्रयास करती है तथा इस पूरे घटनाक्रम के लिए ज़िम्मेवार मंत्री से प्रधानमंत्री ने इस्तीफ़ा भी नहीं मांगा है। इस से स्पष्ट होता है कि भाजपा सता के नशे में चूर होकर निरंकुश तरीके से शासन चला रही है। भाजपा का सता में बने रहना और उसकी निरकुंश शासन शैली को चुनौती नहीं दी गई तो देश का लोकतन्त्र और संविधान खत्म हो जाएगा तथा देश में पूरी तानाशाही कायम हो जाएगी। माकपा और देश की लोकतंत्र पसंद जनता ऐसा हरगिज नहीं होने देगी। देश की आजादी के संघर्ष में हुई कुर्बानियों और आजादी के बाद भी लोकतन्त्र को मजबूत करने के लिए जनता के चौतरफा संघर्षों को माकपा व्यर्थ नहीं जाने देगी।
इसलिए लोकतंत्र को मजबूत करने, देश के संसाधनों को बिकने से बचाने, महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए माकपा अपनी ऐतिहासिक जिम्मेवारी को निभाते हुए इन उप चुनावों में भाजपा को हराने के लिए काम करेगी ताकि बेलगाम हो चुकी निरकुंश सरकार पर लगाम लगाई जा सके। मंडी लोक सभा उप चुनाव सहित प्रदेश में जहां भी विधान सभा के उपचुनाव हो रहे हैं वहाँ पर माकपा जनविरोधी और बेलगाम हो चुकी भाजपा को हराने के लिए काम करेगी। माकपा का प्रदेश में किसी भी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं है। लेकिन भाजपा को हराने में जो भी पार्टी या प्रत्याशी सक्षम है माकपा आम जनता से अपील करेगी कि भाजपा की निरंकुशता पर ब्रेक लगाने के लिए सक्षम प्रत्याशी को वोट दें। उन्होंने कहा कि महंगाई व बेरोजगारी बढ़ाने वाली नीतियों और तानाशाही से भाजपा समर्थक भी बहुत निराश हैं तथा वे भी इन चुनावों में भाजपा को सबक सिखाना चाहते हैं।
इस अवसर पर माकपा के मंडी जिला सचिव कुशाल भारद्वाज ने कहा कि यह चुनाव केंद्र और राज्य सरकार की अब तक की कारगुजारियों के आधार पर होगा। हकीकत यह है कि हिमाचल प्रदेश का आधा बजट तो एक ही विधान सभा क्षेत्र में लग रहा है और उसमें भी आधा कमीशंखोरी में लग रहा है। सरकारी नौकरियों के दरवाजे बंद हैं। आऊट सोर्स में ही भर्तियाँ हो रही हैं और उसमें भी अधिकांश नौकरियाँ एक या दो विधान सभा क्षेत्र के चहेते ठेकेदारों के बच्चों को दी जा रही हैं। मंडी जिला में आसपास के विधान सभा क्षेत्र का बजट पर भी एक बड़े नेता ने कुंडली मार रखी है। दूसरे विधान सभा क्षेत्रों के छोटे-छोटे काम के ठेके भी एक ही मंत्री के कहने पर दिये जाते हैं। जन मंच के नाम पर अधिकारियों, कर्मचारियों, व अपनी शिकायत ले कर जनमंच में शामिल होने वाले आम लोगों को मंत्रियों द्वारा सरेआम जलील किया जाता है। जो अध्यापक दिन रात मेहनत करके बच्चों का भविष्य सँवारने में लगे हैं उनको भी मंत्री जी भरी सभा में जलील करते हैं। भाजपा ने पिछले विधान सभा चुनावों में अपने घोषणापत्र में वादा किया कि वे भूमि अधिग्रहण प्रभावितों को 2013 के कानून के अनुरूप फैक्टर 2 को लागू करते हुए 4 गुणा मुआवजा देंगे, लेकिन सता में आने के बाद भाजपा ने इसे लागू करने से साफ इंकार कर दिया। भाजपा के वर्तमान उम्मीदवार ने सरकारी पद हासिल करने के बाद प्रदेश के हजारों भूमि अधिग्रहण प्रभावित परिवारों का साथ छोड़ दिया तथा उनके विश्वासघात के कारण हजारों प्रभावित परिवार उनको सामाजिक राजनीतिक जीवन में एक भरोसेमंद नेता नहीं मानते हैं। माकपा इन सभी मुद्दों को जनता के बीच लेकर जाएगी ताकि महंगाई, बेरोजगारी, किसानों, मजदूरों व फल उत्पादकों की दुर्दशा, भूमि अधिग्रहण प्रभावितों, कर्माचारियों की पुरानी पेंशन वहाली की भाजपा की वायदाखिलाफी, मंत्रियों की तानाशाही और मनमर्जी जैसे मुद्दों के आधार पर वोट देकर मंडी लोक सभा क्षेत्र की जनता भाजपा की निरंकुशता पर लगाम लगाए।
उन्होंने कहा कि अगले एक सप्ताह में माकपा सभी विधान सभा क्षेत्रों और सभी लोकल कमेटी क्षेत्र में पार्टी की विस्तारित बैठकें आयोजित करेगी तथा इसके बाद पंचायत और बूथ स्तर पर बैठकें व नुक्कड़ सभाएं आयोजित कर इन मुद्दों पर प्रचार करेगी। माकपा का मानना है कि कोई भी चुनाव मुद्दों के आधार पर ही लड़ा जाना चाहिए, लेकिन भाजपा इस बार न तो प्रधानमंत्री मोदी के नाम से न जय राम ठाकुर सरकार के कार्यों के आधार पर और न ही अपने बड़बोले मंत्री व विधायकों के कार्यों के आधार पर वोट मांग रही है। कुशाल भारद्वाज ने कहा कि असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा इस बार कारगिल हीरो के नाम से वोट मांग रही है। हकीकत यह है कि भाजपा ने दो बार सन 2014 व 2019 के लोक सभा चुनावों में इन्हीं ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर का टिकट काट कर कारगिल हीरो का अपमान कर चुकी है। इस बार जब भाजपा सरकार की कारगुजारियों के खिलाफ जनता में व्यापक गुस्सा है तथा मंत्रियों और बड़े नेताओं ने चुनाव लड़ने से हाथ खड़े कर दिये तो मजबूरी में भाजपा ने खुशाल ठाकुर को चुनाव में आखिरी वक्त में प्रत्याशी बना दिया ताकि असली मुद्दे छुप जाएँ। यदि भाजपा सैनिकों का इनता ही सम्मान करती है तो जब देश में भाजपा की लहर थी तो तब ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर को टिकट न देकर अपने संगठन के व्यक्ति रामस्वरूप शर्मा को टिकट दिया था। अब जब हार सामने है तो ब्रिगेडियर के कंधे पर चुनावी बंदूक थमा कर भाजपा अपनी फजीहत को कम करने की कोशिश कर रही है।