जाईका के अंतर्गत गोहर विकासखंड में 18 परियोजनाओं के अंतर्गत किया जा रहा कार्य*
*391.99 हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि होगी सिंचाई योग्य*
गोहर(राकेश)
हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के दूसरे चरण में परियोजना के उप परियोजना निदेशक डॉ रविंद्र सिंह चौहान व बलजीत सिंह संधू (वरिष्ठ सलाहकार) खंड परियोजना प्रबंधक इकाई गोहर में चल रही सब मॉडल परियोजनाओं का निरीक्षण किया।
उन्होंने सर्व प्रथम बताया कि जिला परियोजना प्रबंधन इकाई मंडी में चार खण्ड परियोजना प्रबंधन इकाई अर्थात मंडी, गोहर, सरकाघाट और कुल्लू के तहत 86 साइटों पर काम किया जा रहा है, जिसमे से खण्ड परियोजना प्रबंधन इकाई गोहर के अंतर्गत 18 उप परियोजनाएं हैं और इसके अंतर्गत 391.99 हेक्टेयर क्षेत्रफल आता है | सबसे पहले उन्होंने मॉडल सब परियोजना गधिमण - मझोठी में बनी कुल्ह के कार्य की गुणवता को जांचा तथा कूल्ह के हेड वियर से लेकर अंतिम तक निरीक्षण किया व निरीक्षण के दौरान डाॅ. रविंद्र चौहान ने खंड परियोजना प्रबंधक इकाई गोहर ब ठेकेदार को निर्माण कार्य को गुणवत्ता पूर्वक अतिशीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए | उप परियोजना का मटिरियल एट साइट रजिस्टर तथा साईट ऑर्डर बुक रजिस्टर को भी मौके पर जांचा गया तथा जिला परियोजना प्रबंधक मंडी को निर्देश दिए की 15 दिनों के भीतर शेष बचे कार्य को पूरा करे ताकि किसानों को समय पर सिंचाई की सुबिधा मिल सके और साथ मे किए गए कार्य की गुणवता की प्रशंसा की, इस मौके पर उपस्थित कृषि विकास संघ के प्रधान चेत राम व उनके सभी सदस्यों से विस्तार से चर्चा की गई जिसमे उन्होंने किसानों से आह्वान किया फसल विविधीकरण को अपनाए तथा उन फसल को बेचने के लिए अन्य बाजार ढूढने की सलाह दी गई जिससे किसानों को फसल का सही मूल्य मिल सके | फसलों को आवारा जानवरों से बचाने के लिए बाड़बंदी तथा किसानों को जायका वेजिटेबल गार्डन, उत्पादन प्रबंधन और मूल्य प्राप्ति योजना तथा नकदी फसलों को उगाकर अपनी आर्थिकी को कैसे मजबूत किया जाए के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा की गई जिसमे उन्होंने कहा की इस उप परियोजना को मॉडल उप परियोजना के रूप में विकसित किया जायेगा। इस मॉडल सब परियोजना के अंतर्गत 14.91 हेक्टेयर रकबा सिंचित होगा, जिस पर कुल लागत 36 लाख रूपये खर्च किये जा रहे है । उप परियोजना सम्बंधित निर्माण कार्यों, परियोजना के उदेश्यों अथवा इस क्षेत्र में उगाई जा रही नगदी फसलों की डिजिटल मार्केटिंग की संभावनाओं और एफपीओ का गठन, भण्डारण, सामूहिक खेती इत्यादी के बारे में किसानों के साथ विस्तृत चर्चा की | साथ ही उन्हें निर्माण कार्यों की जांच में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया | इनके साथ आये बलजीत सिंह संधू (वरिष्ठ सलाहकार) ने अपने संबोधन मे किसानों से अबाहन किया की जाइका के अंतर्गत बन रही परियोनाओ मे नकदी तथा पारंपरिक को उगाए तथा परियोजना के अन्य घटकों के बारे मे विस्तार पूर्वक चर्चा की गई|
उसके उपरांत डा. रविंद्र चौहान
ने खण्ड परियोजना प्रबंधन इकाई गोहर के अधिकारिओं से पुनर्रीक्षण बैठक की तथा उन्हें परियोजना के उदेश्यों को पूर्ण करने तथा किसानो के विकास के लिए अत्यंत समर्पण से कार्य करने की सलाह दी | उसके उपरांत खरखन खड्ड़-लेओटी मॉडल सब परियोजना मे कृषक विकास संघ के प्रधान हरीश चौहान व उनकी कार्यकरणी तथा 40-50 किसानों के साथ उप परियोजना में मोटे अनाजों को बढावा देने हेतु कोदरा के प्रदर्शन प्लाट का निरीक्षण किया तथा अपने सम्बोधन मे डॉक्टर रविंद्र चौहान जी कहा की जल्द ही इस परियोजना का टेन्डर किया जाएगा ताकि किसानों को सिचाई की सुबिधा मिल सके जिससे किसान अपने खेतों मे नकदी फसलों को उगाकर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सके |
दूसरे दिन जाईका के सहयोग से संचालित केंद्र व प्रदेश सरकारों के सांझे प्रयास वाली फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के निदेशक डॉ सुनील चौहान व डॉक्टर अर्चना शर्मा ने देहात कंपनी के अतर्गत बने क्लस्टर जिसमे गोहर , नाउन ,बजरोहडू ,कांडा बगस्याड तथा थूनाग के किसानों से फसलों के सही दाम मिल सके, मार्केटिंग सिस्टम के बारे मे विस्तार पूर्वक चर्चा की गई तथा परियोजना के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पूरी तैयारी से जुट जाएं। परियोजना के माध्यम से संचालित की जा रही विभिन्न योजनाओं में क्ववालिटी कंट्रोल पर केंद्रित रहने को लेकर सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में जो लक्ष्य रखा गया है।उसे समय पर पूरा करे डॉक्टर सुनील चौहान ने परियोजना में इंजीनियरिंग विंग के कामकाज की समीक्षा में कहा कि जिन भी सिंचाई योजनाओं की डीपीआर पूरी कर ली गई हैं उनके टेंडर अवार्ड करने की प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए। उन्होंने परियोजना से जुडे हुए महत्वपूर्ण घटक (कपोंनेंट)खेती के मशीनीकरण पर चर्चा करते हुए कहा कि इस बार इस घटक(कपोंनेंट) पर एक पुराने ढर्रे से हटकर काम करने की योजना है। किसानों को खेती से जुडी हुई ऐसी अत्याधुनिक मशीनों को उपलब्ध करवाया जाएगा जिन्हें अब तक कहीं हिमाचल में प्रयोग में नहीं लाया गया है लेकिन अगर इन्हें प्रयोग में लाएं तो निशचित तौर पर इसके किसानों के हक में बडे फायदे सामने आ सकते हैं। इसके लिए कृषक विकास संघों की दस व पच्चास फीसदी सहभागिता के अनुपात में ये कृषि उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को किसानों की जरूरतों की पहचान करके इसके हिसाब से एक वृहद योजना तैयार करने के लिए कहा है। किसानों में भी उन्हीं को महत्व दिया जाएगा जो इस मामले में पूरी जबावदेही व सक्रियता के साथ आगे बढेंगे।
इस मौके पर परियोजना के उप परियोजना निदेशक, डॉक्टर रविंद्र सिंह चौहान व बलजीत सिंह संधू ,(वरिष्ठ सलाहकार) सोनल गुप्ता (जिला परियोजना प्रबंधक) मंडी, डा. धर्म चंद चौहान (खण्ड परियोजना प्रबन्धक) गोहर तथा अन्य आधिकारी कर्मचारी खण्ड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के प्रभारी अधिकारी भी मौजूद रहे ।




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