*नया सवेरा*
*उठ जाग मुसाफ़िर देखो क्या जग में आया है*
आज फिर से जग ने नया सवेरा लाया है
*मुसाफ़िर बनकर आये हैं हम*
इस संसार को फूलों की तरह सजायेंगे हम
*न करें बटने की बात धर्म जाति है लड़ाई व फ़साद*
राजनीति के चक्कर में न करें कोई विवाद
*रक्षक हैं राष्ट्र के शरहद पर सीना तान खड़ी है सेना*
तिरंगा हमारी शान है इसकी हिफाजत के लिए हमेशा लड़ी है हमारी सेना
*बहाया है लहु वतन की राहों में नहीं हटे हैं हमारे पिछे ये कदम*
देश के प्रहरी बनकर शरहद की दिवार बने हैं हम
*जो टकरायेगा शरहद पर कर देंगें सिर उसका कलम*
सत्ता के लालच में न करो निचा हमें सनम्
*अग्निवीर से भारतीय सेना हो जायेगा पतन*
देश के कर्णधार कर्णवीर सर्वोच्च बलिदान ही है हमारा धर्म
*कब तक टूट-टूट कर जातियों में सदा बंटते रहे हम*
कारण यही था सदियों तक कटते रहे हम
*सबके सिरों पर ताज यदि जातियों का सजेगा*
स्वयं ही सोचिए यह देश अपना कैसे बचेगा
*कह दें कि कोई फूट प्रतिवाद नहीं*
सनातन हिन्दू धर्म में कोई जातिवाद नहीं
*कह दो कि यहां कोई छुआछूत नहीं*
सनातन हिन्दू धर्म में, कोई अछूत नहीं
*धरा का धरा पर रह जायेगा इसको खून की होली से हम संजायेंगे नहीं*
*भारत हिन्दु राष्ट्र को जलियां वाले बाग की घटना जैसी याद को दोहरायें नहीं*
*जन्मे हैं इस धरा पर, इसी मर्म के लिए*
मरना है तो मरेंगे अपने वतन व धर्म के लिए
*सनातन की परम्परा को हम निभायें तो सही*
*मिलकर सभी एक साथ तिरंगे के नीचे आयें तो सही*
*आयें तो सही*
*आयें तो सही*
*समझो तो मोती न समझो तो पानी है*
*हमारे देश की यही कहानी है*
*भारत माता की जय*
*लेखक- बालक राम शर्मा*

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