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रविवार, 22 दिसंबर 2024

*नया सवेरा*

 *नया सवेरा*




*उठ जाग मुसाफ़िर देखो क्या जग में आया है* 

आज फिर से जग ने नया सवेरा लाया है


*मुसाफ़िर बनकर आये हैं हम*

इस संसार को फूलों की तरह सजायेंगे हम 


*न करें बटने की बात धर्म जाति है लड़ाई व फ़साद*

राजनीति के चक्कर में न करें कोई विवाद 


*रक्षक हैं राष्ट्र के शरहद पर सीना तान खड़ी है सेना*

तिरंगा हमारी शान है इसकी हिफाजत के लिए हमेशा लड़ी है हमारी सेना


*बहाया है लहु वतन की राहों में नहीं हटे हैं हमारे पिछे ये कदम*

देश के प्रहरी बनकर शरहद की दिवार बने हैं हम 


*जो टकरायेगा शरहद पर कर देंगें सिर उसका कलम* 

सत्ता के लालच में न करो निचा हमें सनम् 


*अग्निवीर से भारतीय सेना हो जायेगा पतन* 

देश के कर्णधार कर्णवीर सर्वोच्च बलिदान ही है हमारा धर्म 


*कब तक टूट-टूट कर जातियों में सदा बंटते रहे हम*

कारण यही था सदियों तक कटते रहे हम


*सबके सिरों पर ताज यदि जातियों का सजेगा*

स्वयं ही सोचिए यह देश अपना कैसे बचेगा


*कह दें कि कोई फूट प्रतिवाद नहीं*

सनातन हिन्दू धर्म में कोई जातिवाद नहीं


*कह दो कि यहां कोई छुआछूत नहीं*

सनातन हिन्दू धर्म में, कोई अछूत नहीं


*धरा का धरा पर रह जायेगा इसको खून की होली से हम संजायेंगे नहीं*

*भारत हिन्दु राष्ट्र को जलियां वाले बाग की घटना जैसी याद को दोहरायें नहीं* 


*जन्मे हैं इस धरा पर, इसी मर्म के लिए*

मरना है तो मरेंगे अपने वतन व धर्म के लिए


*सनातन की परम्परा को हम निभायें तो सही*

*मिलकर सभी एक साथ तिरंगे के नीचे आयें तो सही*

                    *आयें तो सही*

                    *आयें तो सही*


       *समझो तो मोती न समझो तो पानी है*

          *हमारे देश की यही कहानी है*


                 *भारत माता की जय*


              *लेखक- बालक राम शर्मा*



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