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शुक्रवार, 4 मार्च 2022

मनरेगा व महिला विरोधी है बजट प्रस्ताव-यूनियन अन्य मजदूरों के बराबर 350 रु दिहाड़ी देने की उठायी मांग

 मनरेगा व महिला विरोधी है बजट प्रस्ताव-यूनियन

अन्य मजदूरों के बराबर 350 रु दिहाड़ी देने की उठायी मांग



मनरेगा मजदुरों को आज मुख्यमंत्री द्धारा पेश किए गए बजट प्रस्ताव में निराशा ही हाथ लगी।कियूंकि मुख्यमंत्री ने उनके दिहाड़ी बढ़ाने के लिए बजट में बात तक नहीं कि और न ही दिहाड़ी में बृद्धि कि गयी है।मनरेगा मज़दूर यूनियन के खंड अध्यक्ष करतार सिंह चौहान महासचिव प्रकाश वर्मा,मोहनलाल, रामचन्द, शांता देवी, कंचनलता, कृष्णि देवी, किरणवाला शर्मा,निर्मला देवी,बबली देवी, कुंता देवी, सोमा देवी, रीतू देवी, अनिता देवी, अन्नू देवी, मंजू देवी, रजनी देवी, पूजा देवी, शीला देवी, अति देवी, चन्द्रवंती, कांता देवी, कमलेश,शारदा देवी, नीलम, उर्मिला देवी, सलोचना देवी, आशा देवी, सरोजनी देवी आदि नेमुख्यमंत्री से और मजदूरों के बराबर साढ़े तीन सौ रुपये दिहाड़ी देने की मांग की है।उधर मनरेगा मजदूर यूनियन के राज्य महासचिव भूपेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में सबसे ज्यादा मज़दूर मनरेगा में ही काम करते हैं जबकि दूसरे विभागों में तो सारा काम ठेके पर ही होता है तो ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री द्धारा मनरेगा मजदुरों की बजट में बात न करना उनके मनरेगा मज़दूर विरोधी सोच को ही दर्शाता है।उन्होंने कहा कि एक प्रदेश में दो क़ानून और दो तरह के मज़दूरी के रेट चल रहे हैं जिसके तहत मनरेगा में केवल 203 रु दिहाड़ी ही दी जा रही है और इसमें काम करने वाली लाखों लाख महिला मजदूरों का शोषण किया जा रहा है।इस प्रकार ये बजट मनरेगा और महिला विरोधी है।उन्होंने मांग की है कि मनरेगा मजदूरों को भी 350 रु दैनिक मज़दूरी दी जाए और दिनों की संख्या 120 से 200 दिन वार्षिक किये जायें।

वाइट भुपेंद्र सिंह



सीटू ने बजट को मज़दूर व कर्मचारी विरोधी करार दिया

 सीटू ने बजट को मज़दूर व कर्मचारी विरोधी करार दिया


BHK NEWS HIMACHAL

  यादविंदर (नेरचौक) :  सीटू मंडी ज़िला कमेटी ने प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को मजदूर व कर्मचारी विरोधी करार दिया है। यह बजट ऊंट के मुंह में जीरा डालने जैसा है जहां पर महंगाई के मध्यनजर मजदूरों के वेतन को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ नहीं जोड़ा गया है तथा सरकारी कर्मचारियों के लिए छठे वेतन आयोग की विसंगतियों,एनपीएस कर्मियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम बहाली तथा आउटसोर्स,एसएमसी व स्कूल आईटी अध्यापकों के लिए नीति बनाने के सवाल पर यह बजट खामोश है।


सीटू के ज़िला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह व महासचिव राजेश शर्मा ने कहा है कि यह बजट मजदूरों व कर्मचारियों के साथ क्रूर मजाक है क्योंकि उनके वेतन को महंगाई सूचकांक के साथ नहीं जोड़ा गया है। मजदूरों की 350 रुपये दिहाड़ी की घोषणा पड़ोसी राज्यों व केंद्र सरकार के वेतन की तुलना में बेहद कम है व 50 रुपये प्रतिदिन की वेतन बढ़ोतरी का लाभ भी प्रदेश के उद्योगों,कारखानों व असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले अस्सी प्रतिशत मजदूरों को नहीं मिलेगा। मनरेगा मजदूरों को दो सौ दिन का रोजगार देने व न्यूनतम वेतन 350 रुपये करने के सवाल पर बजट भाषण में मुख्यमंत्री ने कन्नी काट ली है। कोरोना योद्धाओं आशा व आंगनबाड़ी कर्मियों के साथ प्रदेश सरकार ने घोर अन्याय किया है क्योंकि आशा कर्मियों व आंगनबाड़ी सहायिकाओं का 4700 रुपये वेतन,आंगनबाड़ी कर्मी का 9000 रुपये वेतन व मिनी आंगनबाड़ी कर्मी 6100 रुपये वेतन प्रदेश सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन से बेहद कम है। मिड डे मील कर्मियों के लिए केवल 3500 रुपये वेतन की घोषणा की गई है। पड़ोसी राज्यों व केंद्र सरकार के वेतन की तुलना में इस बजट की घोषणाओं के बावजूद भी हिमाचल प्रदेश के मजदूरों व सरकारी कर्मियों का वेतन बेहद कम है। 

वाइट भुपेंद्र सिंह



उन्होंने कहा कि महंगाई के मध्यनजर मजदूरों के वेतन को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ नहीं जोड़ा गया है तथा सरकारी कर्मचारियों के लिए छठे वेतन आयोग की विसंगतियों,एनपीएस कर्मियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम बहाली,आउटसोर्स,एसएमसी व स्कूल आईटी अध्यापकों के लिए नीति बनाने के सवाल पर यह बजट खामोश है। सिलाई अध्यापिकाओं को 7950 रुपये,वाटर कैरियर को 3900 रुपये,जल रक्षक को 4500 रुपये,जलशक्ति मल्टी पर्पज वर्कर्स को 3900 रुपये,पैरा फिटर,पंप ऑपरेटर को 5550 रुपये,पंचायत चौकीदार को 6500 रुपये,राजस्व चौकीदार को 5000 रुपये,राजस्व लंबरदार को 3200 रुपये प्रतिमाह वेतन देना मजदूरों व कर्मचारियों से क्रूर मजाक है क्योंकि इन्हें प्रदेश सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन के दायरे में नहीं लाया गया है। एसएमसी व आईटी टीचर के मानदेय में केवल 1000 रुपये प्रतिमाह बढ़ाने की घोषणा व उनके लिए नीति न बनाने से साफ हो गया है कि यह बजट कर्मचारी हितैषी नहीं है।



अवसर पर सुकेत ट्राला यूनियन के चुनाव की जाएंगे और नई कार्यकारिणी का गठन भी किया जाएगा

 अवसर पर सुकेत ट्राला यूनियन के चुनाव की जाएंगे और नई कार्यकारिणी का गठन भी किया जाएगा



सुंदर नगर।

सुकेत ट्राला यूनियन की बैठक 9 मार्च को यूनियन के ट्राला स्टैंड में होगी। यूनियन के सचिव प्रकाश चंद वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर सुकेत ट्राला यूनियन के चुनाव की जाएंगे और नई कार्यकारिणी का गठन भी किया जाएगा। उन्होंने सुकेत ट्रेलर यूनियन के पदाधिकारियों से आह्वान किया है कि वह इस बैठक में चुनाव प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर के भाग लें ताकि यह चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करवाए जा सकते हैं। यह जानकारी मुनीलाल ने दी।



मुख्यमंत्री स्कालरशिप योजना की शुरुआत, एबीवीपी के आंदोलन की जीत :आकाश नेगी |*

 *अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद*    

 *हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय ईकाई* 


              


*• मुख्यमंत्री स्कालरशिप योजना की शुरुआत, एबीवीपी के आंदोलन की जीत :आकाश नेगी |*



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04 फरवरी 2022


अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष आकाश नेगी ने एक ब्यान जारी करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बजट सत्र में प्रदेश विश्वविद्यालय के शोधार्थियों के लिए मुख्यमंत्री स्कालरशिप योजना की शुरुआत करने के निर्णय का विद्यार्थी परिषद हार्दिक स्वागत करती है |


आकाश ने कहा कि विद्यार्थी परिषद लम्बे समय से यह मांग कर रही थी कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में अध्यनरत शोधार्थियों को भी केंद्रीय विश्वविद्यालय की तर्ज पर छात्रवृति प्रदान की जाए | उन्होंने कहा कि बजट सत्र में विश्वविद्यालय के शोधार्थियों के लिए मुख्यमंत्री स्कालरशिप योजना की घोषणा करने पर हम सरकार के इस निर्णय का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करते हैं |


आकाश ने कहा कि  मुख्यमंत्री स्कालरशिप योजना की शुरुआत विद्यार्थी परिषद के आंदोलनों की ही जीत है | इस मांग का पूरा होना प्रदेश के समस्त छात्र समुदाय की जीत है | 



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गुरुवार, 3 मार्च 2022

जलशक्ति विभाग में हुई भर्तियों में अनुसूचित जातियों की हुई उपेक्षा-भूपेंद्र धर्मपुर मण्डल के तहत हुई भर्तियों में लागू नहीं किया गया आरक्षण का फार्मूला

 जलशक्ति विभाग में हुई भर्तियों में अनुसूचित जातियों की हुई उपेक्षा-भूपेंद्र

धर्मपुर मण्डल के तहत हुई भर्तियों में लागू नहीं किया गया आरक्षण का फार्मूला


BHK NEWS HIMACHAL

 जलशक्ति विभाग धर्मपुर में गत चार वर्षों में 962 मज़दूर विभिन्न श्रेणियों में भर्ती किये गए हैं।लेकिन इन्हें भर्ती करती बार सँविधान के प्रावधानों की उलंघन्ना हुई है।ये बात मज़दूर संगठन सीटू के जिला प्रधान और पूर्व ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने कही।उन्होंने बताया कि संविधान के अनुछेद 15(4) के अनुसार नॉकरियों में 15 प्रतिशत अनुसूचित जातियों तथा साढ़े सात प्रतिशत आरक्षण जनजातियों के लिए 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग तथा 10 प्रतिशत आर्थिक रूप में कमज़ोर परिवारों के लिए निर्धारित किया गया है।लेकिन जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने पिछले चार साल मेंअपने विधानसभा क्षेत्र में जो एक हज़ार के लगभग मज़दूर भर्ती किये हैं उनमें अनुसूचित जातियों व अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को उन्हें मिलने वाले रोज़गार से वंचित किया है और उन्होंने जानबूझ कर उन्हें उनके सवैधानिक अधिकार से वंचित रखा है।भूपेंद्र सिंह ने जलशक्ति मंत्री पर आरोप लगाया है कि वे अपने आप को दलितों और गरीबों का मसीहा बताते फ़िरते हैं औऱ उनसे इसी के बल पर वोट तो जरूर लेते हैं लेकिन हक़ीक़त में वे बड़े बड़े ठेकेदारों व अमीरों के लिए ही काम करते हैं।वे हर चुनाव से पहले एक बार अन्यसुचित जातियों से सबन्धीत लीगों का एक बड़ा सम्मेलन आयोजित करते हैं और फ़िर पांच साल उन्हें भूल जाते हैं।उन्होंने कहा कि धर्मपुर ही एक ऐसा मण्डल है जहाँ पर पिछले चार वर्षों में इतने ज़्यादा मज़दूर जलशक्ति विभाग में भर्ती किये गये हैं लेकिन इनमें अनुसूचित जातियों व आर्थिक रूप में कमज़ोर लीगों की घोर उपेक्षा हुई है।उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि धर्मपुर में हुई भर्तियों में की गई सँविधान की उलंघन्ना की जाँच होनी चाहिये और अनुसूचित जातियों व अन्य आर्थिक रूप में कमज़ोर तबकों को उनके लिए निर्धारित स्थान मिलने चाहिए।उन्होंने ये भी मांग उठाई है कि हिमाचल सरकार को नीजि क्षेत्र में भी सँविधान के प्रावधानों के अनुसार आरक्षण लागू करना चाहिए।उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों से जब इस बारे जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई तो उन्होंने बताया कि इन भर्तियों के लिए सरकार ने जाति आधारित आरक्षण का प्रावधान नहीं किया था इसलिए उनके पास न इसकी जानकारी है और न ही उन्होंने इसके आधार पर भर्तियां की है।इसलिये सरकार को धर्मपुर में हुई भर्तियों की पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए जिससे ये पता चल सके कि कुल भर्ती किये गए मजदूरों में से कितने मज़दूर अनुसूचित जाति से सबंधित हैं और कितने गरीबी रेखा से नीचे से सबंधित हैं।इस भर्ती के लिए जल शक्ति मंत्री स्वय ही सीधे तौर पर जिम्मेवार हैं कियूंकि सभी की भर्ती उन्हीं की सिफ़ारिश पर हुई है।भूपेंद्र सिंह ने इन भर्तियों के लिए सीधे तौर पर इस विभाग के मंत्री दलितों और गरीबों को नॉकरियों से वंचित रखने वाली नीति लागू करने का जिम्मेवार ठहराया है।



कर्मचारियों को दबाने की सीटू ने की निंदा,मुख्यमंत्री का आज विधानसभा में दिया गया ब्यान भी निंदनीय-भूपेंद्र

 कर्मचारियों को दबाने की सीटू ने की निंदा,मुख्यमंत्री का आज विधानसभा में दिया गया ब्यान भी निंदनीय-भूपेंद्र


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ओल्ड पेंशन की मांग करने वाले कर्मचारियों के आज विधानसभा घेराव को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने आज कर्मचारियों को छुट्टी लेने से भी वंचित करके अपने तानाशाही तौर तरीकों का प्रमाण दिया है।लेक़िन सरकार के हर तरह के हथकंडों को धता बताते हुए आज हज़ारों कर्मचारियों ने शिमला पहुंच कर अपनी एकता और ओल्ड पेंशन लागू करने के दृढ़ इच्छाशक्ति को ज़ाहिर कर दिया है हालांकि पुलिस ने उन्हें विधानसभा के नज़दीक पहुंचने से रोकने की हर प्रकार की कोशिश की और कर्मचारियों पर वाटर केनन से पानी की बौछारें भी की जो बहुत ही निंदनीय है।मज़दूर संगठन सीटू के अध्यक्ष व पूर्व ज़िला परिषद सदस्य ने मुख्यमंत्री जयराम द्धारा विधानसभा के अंदर दिए उस ब्यान की कड़े शब्दों में निंदा की है जिसमें उन्होंने आज रैली करने वाले कर्मचारियों को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े हुए बताया है ये भी धमकी दी कि इस प्रकार के प्रदर्शनों के दबाब में वे पुरानी पेंशन योजना लागू नहीं करने वाले हैं।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने शीतकालीन सत्र के दौरान कमेटी बना कर इस मांग को पूरा करने का आश्वाशन दिया था लेकिन आज वे उससे मुकर गए हैं।उन्होंने कहा कि अगर इस सत्र के दौरान ओल्ड पेंशन योजना लागू नहीं होती है तो सीटू से जुड़ी मज़दूर यूनियनें भी कर्मचारियों के समर्थन में सड़कों पर उतरेगी।


टिहरा को पूर्ण तहसील बनाने के लिए मुख्यमंत्री को भेजा माँगपत्र धाड़ता विकास मंच ने सरकार को दिया 15 दिनों का अल्टीमेटम मांग नहीं मानी तो 21 मार्च को टिहरा में में होगी आक्रोश रैली

 टिहरा को पूर्ण तहसील बनाने के लिए मुख्यमंत्री को भेजा माँगपत्र धाड़ता विकास मंच ने सरकार को दिया 15 दिनों का अल्टीमेटम मांग नहीं मानी तो 21 मार्च को टिहरा में में होगी आक्रोश रैली



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 धर्मपुर उपमण्डल के ऊपरी क्षेत्र के साथ हो रहे भेदभाव के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए गठित हुये धाड़ता विकास मंच के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने आज टिहरा उपतहसील को पूर्ण तहसील का दर्जा देने की मांग को लेकर एसडीएम धर्मपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम और राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह को दस हजार हस्ताक्षरों वाले माँगपत्र भेजे। जिसका नेतृत्व मंच के सयोंजक भूपिंदर सिंह, सह सयोंजक अशवनी राणाऔर पूर्व ज़िला परिषद सदस्य भूपेन्द्र सिंह और रन्ताज राणा ने किया।मंच के सयोंजक भूपिंदर सिंह ने बताया कि टिहरा उपतहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत टिहरा,कोट, तनिहार,गरौडु-गद्दीदार, गरयोह, डरवाड़,घरवासड़ा,पिपली, सजाओपीपलु औऱ जोढन औऱ साथ लगती पांच अन्य सरौन, चोलथरा, भदेहड़, देवगढ़ और सधोट पंचायततें जो धाड़ता क्षेत्र में आती हैं।लेक़िन इस क्षेत्र के साथ भेदभाव हो रहा है।उन्होंने टिहरा में पूर्ण तहसील बनाने और टिहरा अस्पताल की स्थिति सुधारने की की ज़रूरत है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इन ग्राम पंचायतों के विकास में सरकार ने कोई प्राथमिकता नहीं दी है ये क्षेत्र अभी तक राजनैतिक तौर पर उपेक्षित रहा है। यहाँ पर अभी तक जो ज़रूरी सुविधाएं सरकार को उपलब्ध करवानी चाहिए थी वो अभी तक मुहैया नहीं हुई है।जिसके कारण यहां की जनता सरकार से नाख़ुश है जिसके चलते यहां के लोगों नेपिछले दिनों विचारधारा से ऊपर उठकर इस क्षेत्र के विकास के लिए धाड़ता विकास मंच का गठन किया है।मंच ने इस क्षेत्र की 17 मुख्य मांगे चयनित की हैं जिनमें से टिहरा में पूर्ण तहसील और अस्पताल की दशा सुधारने की मांग को प्रमुखता से उठाया है।इसके अलावा मंच ने धाड़ता क्षेत्र 

में कॉलेज व तकनीकी शिक्षा संस्थान खोलने और आदर्श विद्यालय खोलने की मांग उठाई है।इसके अलावा में टिहरा में सामुदायिक भवन का निर्माण करने,टिहरा में राष्ट्रीयकृत बैकं की शाखा, गैस एजेंसी, मिल्ट्री केंटिन और पैट्रोल पंप खोलने,टिहरा में टैक्सी औऱ बस स्टैंड बनाने,टिहरा-कमलाह सड़क पर यातायात बहाल करने,टिहरा स्कूल के खेल मैदान का विस्तार करने,टिहरा से माता कंचनापुरी मंदिर घरवासडा के लिए वाया टिक्कर सड़क का निर्माण करने, टिहरा में कृषि प्रसार अधिकारी के ख़ाली पद पर जल्द नियुक्ती करने,टिहरा में बागवानी प्रसार अधिकारी का पद सृजित करने,



धाड़ता क्षेत्र के लिए सिंचाई योजना बनाने,सभी लिंक सड़को पर बसें चलाने तथा धर्मपुर,सरकाघाट तथा संधोल के लिए अतरिक्त बसें चलाने,संधोल से वाया टिहरा शिमला व चंडीगढ़ के डीलक्स व वोल्वो बसें चलाने

और सभी पंचायतों में बागवानी क्लस्टर तैयार करनेऔर उसके लिए पानी और मार्केटिंग सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग उठाई है। धाड़ता विकास मंच ने तहसील औऱ अस्पताल की माँग बारे सभी ग्राम पंचायतों से लगभग दस हजार हस्ताक्षर करवा कर आज  मुख्यमंत्री औऱ राजस्व मंत्री हिमाचल प्रदेश को भेजे हैं और अगले 15 दिनों विशेष तौर पर विधानसभा सत्र के दौरान टिहरा को पूर्ण तहसील का दर्जा देने का अल्टीमेटम दिया है।मंच के सयोंजक भूपिंदर सिंह ने कहा कि यदि पन्द्रह दिनों में टिहरा को पूर्ण तहसील का दर्जा नहीं मिला तो 21 मार्च को टिहरा में इसके लिए एक विशाल रैली निकाली जाएगी।उधर पूर्व ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने कहा कि टिहरा में पूर्ण तहसील बनाने की मांग को लेकर वर्ष 2016 में भी लंबा आंदोलन हुआ था और उस समय वर्तमान विधायक व मंत्री ने ये कहा था कि भाजपा की सरकार बनते ही यहां पर तहसील बनाने का आश्वाशन दिया था लेकिन पिछले चार साल में उन्होंने इस दिशा में कोई पहल नहीं कि है इसलिए अब इस क्षेत्र की जनता एकजुट हुए है और ज़रूरत पड़ी तो दोबारा से आंदोलन भी करेगी।